गुजरात के बाद अब वाराणसी में कोरोना मरीजों के इलाज में उपयोग होंगी आयुर्वेदिक दवाएं, पर ये होगी अहम शर्त
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वाराणसी के कोविड अस्पतालों में भर्ती कोरोना पॉजिटिव मरीजों के इलाज में अब आयुर्वेदिक औषधियों का भी उपयोग किया जाएगा। रविवार को जिलाधिकारी और बीएचयू चिकित्सकों की टीम के साथ हुई बैठक में दीनदयाल अस्पताल में भर्ती मरीजों को आयुर्वेदिक औषधियां देने का निर्णय लिया गया। इसमे मरीजों की सहमति जरूरी होगी।
बीएचयू आयुर्वेद संकाय के डॉक्टर पीएस व्याडगी, वैद्य सुशील दुबे और आईएमएस बीएचयू न्यूरोलॉजी के प्रोफेसर आरएन चौरसिया, ईएनटी से डॉ. विशंभर सिंह के देखरेख में तैयार किए गए प्रोजेक्ट को बीएचयू की एथिकल कमेटी से पास होने के बाद अब जिलाधिकारी ने भी इसकी सहमति दे दी। जिलाधिकारी से मिलने पहुंचे चिकित्सकों ने विस्तार से जानकारी दी।
वैद्य सुशील दुबे ने बताया कि गुजरात में चल रहे इस प्रोजेक्ट की सफलता के बाद अखिल भारतीय सह गो सेवा प्रमुख अजीत महापात्रा के प्रस्ताव पर अब इसे वाराणसी में लागू किया जा रहा है। डॉ. व्याडगी और वैद्य सुशील दुबे ने बताया कि जिलाधिकारी के सहमति के बाद दीनदयाल अस्पताल में भर्ती मरीजों को औषधि पंचगव्य घृत, गोजिह्वादी क्वाथ, शिरीषादी क़वाथ, शुंठी चूर्ण और संजीवनी वटी को तीन ग्रुप में आयुर्वेद चिकित्सकों की देखरेख में दिया जाएगा।
स्वस्थ मरीजों को भी देंगे शुंठी चूर्ण, फिर करेंगे आंकलन
कोरोना मरीजों को आयुर्वेदिक दवाओं के देने के साथ ही ऐसे मरीजों के घर के लोगों और अन्य स्वस्थ मरीजों को कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए शुंठी का चूर्ण सुबह-शाम दिया जाएगा। इसके परिणाम के आधार पर आगे आकलन भी किया जाएगा। इसके लिए जिलाधिकारी की ओर से बजट की व्यवस्था कराने की सहमति दी गई है।
इस शोध में आईआईटी के डॉक्टर सुनील मिश्रा, प्रोफेसर टीबी सिंह, द्रव्य गुण विभाग से प्रोफेसर केएन द्विवेदी, मेडिसिनल केमेस्ट्री प्रोफेसर वाईबी त्रिपाठी और आईएमएस बीएचयू के माइक्रोबायोलॉजी से डॉक्टर प्रद्योत प्रकाश आदि शामिल हैं।
सभी कार्य कामधेनु आयोग के अध्यक्ष डॉ. बल्लभ भाई कठरिया के सहयोग से किया जा रहा है। मरीजों तक और उनके परिवारों तक इस दवा को पहुंचाने में संघ के स्वयंसेवक और संवैचारिक संगठनों का भी सहयोग लिया जाएगा। यह अपने आप में विश्व का एक अनूठा प्रयास होगा इसमें इस्तेमाल होने वाली आयुर्वेदिक दवाओं का आगे के शोध के लिए भी प्रयोग किया जाएगा।