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Ram Mandir News: कबीर दास जन्मस्थली की मिट्टी भी जाएगी अयोध्या, राम मंदिर में होगी समाहित

Thu, 30 Jul 2020 06:55 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: गीतार्जुन गौतम Updated Thu, 30 Jul 2020 06:55 PM IST
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Ayodhya Ram Mandir Bhoomi Pujan News: Soil Of Kabir Das Birthplace Will Be Included In Construction Of Ayodhya Ram Temple
ram mandir - फोटो : ram mandir

श्रमसाधक कबीर दास कहते हैं कि सबमें रमै रमावै जोई, ताकर नाम राम अस होई। अर्थात जो हर किसी में बसता है और सभी को अपने में समाहित कर लेता है, वही राम है। राममंदिर निर्माण के लिए कुछ ऐसा ही संयोग व स्थितियां बन रही हैं। वाराणसी के संत कबीर प्राकट्य स्थली की सुगंध भी भगवान राम की जन्मस्थली में समाहित होगी।

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लहरतारा मठ की मिट्टी भी श्रीराम मंदिर शिलान्यास के लिए जाएगी। बुधवार को लहरतारा मठ के प्रबंधक गोविंद दास शास्त्री ने ताम्रपात्र में फूलों के साथ कबीर जन्मस्थली की मिट्टी काशी के विहिप के अध्यक्ष कन्हैया एवं संगठन मंत्री सत्येंद्र सिंह एवं प्रमोद मिश्रा को सौंपी। मठ के प्रबंधक गोविंद दास शास्त्री ने कहा कि प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए भारत के मठों, मंदिरों और नदियों का जल व मिट्टी अयोध्या भेजी जा रही है।
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उन्होंने बताया कि इसी संयोग में हम कबीर पंथ के साधुओं द्वारा प्रभु श्रीराम के मंदिर निर्माण के लिए संत शिरोमणि कबीर दास जी महाराज की जन्मस्थली लहरतारा की मिट्टी भेज रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त होने से हिंदू-मुस्लिम संप्रदाय के बीच चले आ रहे 400 वर्ष पुराने विवाद का अंत हो जाएगा। संत कबीर दास जी ने भी कहा है कि भाई रे दोई जगदीश कहां से आया। समस्त भारतवासियों को मंदिर निर्माण के लिए आगे आने का आग्रह किया।

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संत कबीर ने भी व्यापक रूप में राम का नाम लिया है। राम का नाम स्मरण के कारण बहुतेरे लोग कबीर को वैष्णव संप्रदाय का अनुयायी मानते हैं। राम का नाम लेने के कारण रामानंदी संप्रदाय के लोग कबीर को रामानंद का शिष्य कहते हैं। रमते इति राम। जो कण-कण में रमते हों उसे राम कहते हैं।

कबीर दास कहते हैं कि घाट-घाट राम बसत हैं भाई, बिना ज्ञान नहीं देत दिखाई। आतम ज्ञान जाहि घट होई, आतम राम को चीन्है सोई। कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूंढे वन माहि। ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया खोजत नाहिं।

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