{"_id":"5f29a66fc619f865da3faf61","slug":"ayodhya-news-english-translation-of-ramayana-was-first-in-kashi","type":"story","status":"publish","title_hn":"Ayodhya News: रामायण का सर्वप्रथम अंग्रेजी में अनुवाद है काशी की देन, संस्कृत विवि में अंगेज स्कॉलर आरटीएच ग्रिफिथ को जाता है श्रेय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Ayodhya News: रामायण का सर्वप्रथम अंग्रेजी में अनुवाद है काशी की देन, संस्कृत विवि में अंगेज स्कॉलर आरटीएच ग्रिफिथ को जाता है श्रेय
Wed, 05 Aug 2020 12:20 AM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Wed, 05 Aug 2020 12:20 AM IST
विज्ञापन
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रोम-रोम में बसने वाले राम संपूर्ण ब्रह्मंड के नायक हैं। जाति, देश, वर्ग, सीमाओं से परे राम के आदर्श संपूर्ण दुनिया के लिए अनुकरणीय है। देश और दुनिया की कई भाषाओं में रामायण का अनुवाद हुआ और हर किसी ने इसमें समाहित आदर्शों का रसपान भी किया। रामायण का सर्वप्रथम अंग्रेजी में अनुवाद काशी की ही देन है। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सन 1870 के आसपास अंग्रेज विद्वान आरटीएच ग्रिफिथ ने रामायण को अंग्रेजी में अनुवादित किया।
विज्ञापन
विश्वविद्यालय परिसर में ही बैठकर उन्होंने रामायण के छंदों का अंग्रेजी छंदों में अनुवाद किया था। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजाराम शुक्ल का कहना है कि संस्कृत दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है। यह सिर्फ भाषा ही नहीं, ज्ञान का समृद्ध कोष भी है। इसकी महता को समझते हुए विश्व के तमाम विद्वान काशी में प्राच्य विद्या की साधना कर चुके हैं।
विज्ञापन
इनमें प्रमुख अंग्रेज विद्वान आरटीएच ग्रिफिथ भी थे। ग्रिफिथ ने जहां अनुवाद किया था वह स्थल स्मारक के रूप में विवि में आज भी विद्यमान है। यहां पत्थर पर उकेरी गई खुली किताब लोगों को बरबस उनकी याद दिलाती है।
विज्ञापन
ब्रिटिश शासनकाल में अंग्रेजों को संस्कृत की महत्ता समझाने के लिए ग्रिफिथ ने संविवि में ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद व अथर्ववेद संग कालिदास द्वारा रचित कुमार संभव का भी अंग्रेजी में अनुवाद किया था। जे म्योर संस्कृत कालेज के पहले प्राचार्य थे, जबकि जेआर वैलेंटाइन दूसरे व आरटीएच ग्रिफिथ तीसरे प्राचार्य रहे।
उच्च कोटि के संस्कृत विद्वान ग्रिफिथ वर्ष 1861 से 1876 तक बनारस संस्कृत कॉलेज के प्राचार्य रहे। उन्होंने संस्कृत के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया। संस्कृत के कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का उन्होंने अंग्रेजी में अनुवाद किया। 1830 में यहां संस्कृत के साथ अंग्रेजी की पढ़ाई भी शुरू हुई थी। 1857 से स्नातकोत्तर की कक्षाएं व 1880 से लिखित परीक्षा प्रणाली शुरू हुई थी।