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वाराणसी: महज दस मिनट में चमक जाएंगी ट्रेनें, सफाई में 90 फीसद तक पानी की होगी बचत

Tue, 06 Jul 2021 06:41 PM IST
हरि User अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: हरि User Updated Tue, 06 Jul 2021 06:41 PM IST
सार

मंडुवाडीह कोचिंग डिपो में पूर्वोत्तर रेलवे के पहले ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट का कार्य शुरू हो गया। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर जानकारी दी।

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Automatic Coach Washing Plant started at Manduwadih Coaching Depot Railway Minister Piyush Goyal informed by tweeting
ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वॉशिंग लाइन में अब महज दस मिनट में ही ट्रेनों की सफाई हो जाएगी। इस दौरान ट्रेनों की साफ सफाई में खर्च होने वाले पानी की भी काफी बचत होगी। अभी एक कोच की धुलाई में औसतन एक हजार लीटर पानी खर्च होता है लेकिन वाराणसी के मंडुवाडीह कोचिंग डिपो में पूर्वोत्तर रेलवे के पहले ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट का कार्य शुरू होने से अब एक कोच की धुलाई में सौ लीटर ही पानी खर्च होगा।

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रेलमंत्री पीयूष गोयल ने किया ट्वीट
वाराणसी के मंडुवाडीह कोचिंग डिपो में पूर्वोत्तर रेलवे के पहले ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट का कार्य शुरू हो गया है। प्लांट से ट्रेन के कोचों की धुलाई में लगने वाले समय में कमी आएगी। साथ ही इससे पानी की बचत भी होगी। इस पर निगरानी के लिए प्लांट में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। रेलमंत्री पीयूष गोयल ने ट्वीट कर मंगलवार को यह जानकारी दी।

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पानी को रीसाइकिल कर उपयोग किया जा सकेगा

अत्याधुनिक ऑटोमेटिक कोच वॉशिंग प्लांट के प्लांटेशन का कार्य विगत वर्ष अक्तूबर माह में शुरू किया गया था। जिसे मंगलवार को पूरा कर लिया गया। यह 10 मिनट में ही ट्रेन के 24 कोच की धुलाई कर सकता है। इससे 90 फीसद पानी की बचत होती है। प्लांट की एक और खासियत यह है कि इसके माध्यम से पानी को रीसाइकिल कर उपयोग में लिया जा सकता है। साथ ही इसमें सीसीटीवी भी लगाया गया है। जो ट्रेन के कोचों पर निगरानी रखता है। यह देखता है कि कोच सही से साफ हुए या नहीं।

जानें इसकी खासियत

Automatic Coach Washing Plant

इस मशीन में सेंसर लगा है। सेंसर इसके चलने का सही समय निर्धारित करता है। मशीन में बेलनाकार ब्रश, क्लीनिंग केमिकल की मदद से अधिकतम आठ किमी की रफ्तार से चल रही ट्रेन की सफाई की जा सकती है। यह ऑटोमेटिक कोच वाशिंग प्लांट पानी की खपत को काफी कम कर देता है। 

इसका इनबिल्ट एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट इस मशीन में उपयोग किए जाने वाले लगभग 90 फीसद पानी को रीसाइकिल कर देता है। इससे पानी की खपत काफी कम हो जाती है। यानी कि एक कोच में महज 100 लीटर पानी ही इसके माध्यम से खर्च होगा। 
 

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