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दुस्साहसः डूब क्षेत्र पर भी कर लिया कब्जा
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 14 Apr 2016 01:56 AM IST
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वरुणा में अवैध निर्माण की बाढ़
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नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की मिलीभगत ने काशी की पहचान से जुड़ी वरुणा नदी का अस्तित्व ही खतरे में डाल दिया है। नदी के पचास मीटर डूब क्षेत्र तक सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए हैं। बीच शहर उच्चाधिकारियों की नाक के नीचे यह सिलसिला अब भी थमा नहीं है लेकिन जिम्मेदार बेखबर बने बैठे हैं। निगरानी करने वालों ने ही आंखें मूंद रखी हैं। बेखौफ अंदाज में कराए गए अवैध निर्माणों ने न सिर्फ वरुणा के प्रवाह को बाधित किया है बल्कि पूरे शहर को एक भीषण संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। सीएम के ड्रीएम प्रोजेक्ट वरुणा कॉरिडोर के लिए कराए गए डेन सर्वे में नदी क्षेत्र में अवैध निर्माण का यह सच सामने आने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई न होने से खुद प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं।
राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 50 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। डूब क्षेत्र में अतिक्रमण कोई अचानक नहीं हुआ। नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की मिलीभगत से वर्षों से चल रहा यह खेल अब पूरे शहर के लिए संकट का कारण बन गया है। सब प्रशासन और संबंधित विभागों की आंखों के सामने हुआ लेकिन जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। नतीजा यह हुआ कि नदी किनारे से पचास मीटर डूब क्षेत्र तक सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए। भवन, होटल खड़े हो गए। जिसे जैसे बन पड़ा, नदी की जमीन कब्जा ली। जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से अवैध कब्जों का बढ़ावा मिला। जिस समय कब्जे की शुरुआत हुई उस दौरान न तो किसी अधिकारी ने कोई पहल की और न ही नगर निगम, वीडीए या फिर किसी संबंधित विभाग ने ध्यान दिया। जबकि, उच्चाधिकारियों और वीवीआईपी हों या शहर के जनप्रतिनिधि, हालात किसी से छिपे नहीं थे।
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राजस्व और सिंचाई विभाग के रिकार्ड में वरुणा किनारे से 50 मीटर तक का दायरा डूब क्षेत्र है। डूब क्षेत्र में अतिक्रमण कोई अचानक नहीं हुआ। नगर निगम, वीडीए और भू-माफिया की मिलीभगत से वर्षों से चल रहा यह खेल अब पूरे शहर के लिए संकट का कारण बन गया है। सब प्रशासन और संबंधित विभागों की आंखों के सामने हुआ लेकिन जिम्मेदार हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। नतीजा यह हुआ कि नदी किनारे से पचास मीटर डूब क्षेत्र तक सैकड़ों अवैध निर्माण हो गए। भवन, होटल खड़े हो गए। जिसे जैसे बन पड़ा, नदी की जमीन कब्जा ली। जानकारों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों के ढुलमुल रवैये से अवैध कब्जों का बढ़ावा मिला। जिस समय कब्जे की शुरुआत हुई उस दौरान न तो किसी अधिकारी ने कोई पहल की और न ही नगर निगम, वीडीए या फिर किसी संबंधित विभाग ने ध्यान दिया। जबकि, उच्चाधिकारियों और वीवीआईपी हों या शहर के जनप्रतिनिधि, हालात किसी से छिपे नहीं थे।
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