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आरएस यादव मामलाः अपने ही जाल में उलझीं जांच एजेंसियां, गले की फांस बने अरबों की संपत्ति के कागजात
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Sun, 19 Nov 2017 10:32 AM IST
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निलंबित एआरटीओ आरएस यादव
- फोटो : अमर उजाला
भ्रष्टाचार के आरोप में जेल में बंद निलंबित एआरटीओ आरएस यादव की अरबों की संपत्ति के कागजात अब जांच एजेंसियों के ही गले की फांस बन गए हैं। इन कागजात को पूर्व में दायर किए गए आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया है।
सूत्रों की मानें तो अब या तो दोबारा आरोप पत्र दायर किया जाएगा या फिर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक और मुकदमा दर्ज कर संपत्तियों का ब्यौरा उस मुकदमे में शामिल किया जाएगा। हालांकि ये दोनों ही प्रक्रिया पुलिस के लिए आसान नहीं होगी।
जांच एजेंसियों को आरएस यादव से जुड़ी संपत्तियों का जो ब्यौरा उपलब्ध कराया गया था, उसमें पंद्रह संपत्तियों की रजिस्ट्री के कागजात थे। पहले चंदौली पुलिस और बाद में विजिलेंस ने जांच की थी। सिंतबर में जो आरोप पत्र दाखिल किया गया, उसमें केवल दो संपत्तियों का उल्लेख किया गया।
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होटल वेस्ट इन, गोरखपुर स्थित मॉल, दिल्ली के फ्लैट, पहड़िया स्थित प्लाट समेत अन्य बेनामी कंपनियों का जिक्र ही नहीं किया गया। आरएस यादव की संपत्तियों के कागजात किस तरीके से मुकदमे में शामिल किए जाएं या फिर नया मुकदमा दर्ज किया जाए, इसे लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही।
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सूत्रों की मानें तो अब या तो दोबारा आरोप पत्र दायर किया जाएगा या फिर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक और मुकदमा दर्ज कर संपत्तियों का ब्यौरा उस मुकदमे में शामिल किया जाएगा। हालांकि ये दोनों ही प्रक्रिया पुलिस के लिए आसान नहीं होगी।
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जांच एजेंसियों को आरएस यादव से जुड़ी संपत्तियों का जो ब्यौरा उपलब्ध कराया गया था, उसमें पंद्रह संपत्तियों की रजिस्ट्री के कागजात थे। पहले चंदौली पुलिस और बाद में विजिलेंस ने जांच की थी। सिंतबर में जो आरोप पत्र दाखिल किया गया, उसमें केवल दो संपत्तियों का उल्लेख किया गया।
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होटल वेस्ट इन, गोरखपुर स्थित मॉल, दिल्ली के फ्लैट, पहड़िया स्थित प्लाट समेत अन्य बेनामी कंपनियों का जिक्र ही नहीं किया गया। आरएस यादव की संपत्तियों के कागजात किस तरीके से मुकदमे में शामिल किए जाएं या फिर नया मुकदमा दर्ज किया जाए, इसे लेकर पूरे दिन चर्चा होती रही।
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बचाव की जुगत में माथापच्ची
आरएस यादव
- फोटो : अमर उजाला
सत्ता पक्ष के कुछ नेता और अफसर, जो आरएस यादव के पैरोकार हैं, वह भी इन नई परिस्थितियों को लेकर बचाव का रास्ता निकालने की जुगत में हैं। आरएस को बचाने के लिए एक ‘कद्दावर नेता’ के अलावा कुछ अफसर पैरवी में लगे हुए हैं।
सूत्रों की मानें तो एक नेता गिरफ्तारी के बाद से ही पैरवी में लगे थे लेकिन तब शासन की सख्ती की वजह से उनकी नहीं चली। उस नेता ने फिर बिसात बिछानी शुरू कर दी है और शासन के कुछ आला अफसरों की मदद से वह आरएस यादव को जेल से बाहर लाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
इसके लिए वह मुकदमे को कमजोर कराने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में जिस तरह से संपत्ति से जुड़ी फाइलों को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया, उससे जांच एजेंसियां सवालों के घेरे में हैं।
ऐसी आशंका है कि अफसर किसी के दबाव में काम कर रहे हैं। बसपा और सपा शासनकाल में आरएस यादव के करीबी कहे जाने वाले अफसर भाजपा सरकार में उसकी पैरवी कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो एक नेता गिरफ्तारी के बाद से ही पैरवी में लगे थे लेकिन तब शासन की सख्ती की वजह से उनकी नहीं चली। उस नेता ने फिर बिसात बिछानी शुरू कर दी है और शासन के कुछ आला अफसरों की मदद से वह आरएस यादव को जेल से बाहर लाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
इसके लिए वह मुकदमे को कमजोर कराने में भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। भ्रष्टाचार के मामले में जिस तरह से संपत्ति से जुड़ी फाइलों को आरोप पत्र में शामिल नहीं किया गया, उससे जांच एजेंसियां सवालों के घेरे में हैं।
ऐसी आशंका है कि अफसर किसी के दबाव में काम कर रहे हैं। बसपा और सपा शासनकाल में आरएस यादव के करीबी कहे जाने वाले अफसर भाजपा सरकार में उसकी पैरवी कर रहे हैं।