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कुचिपुड़ी नृत्य उत्सव: तीन शहरों के 40 कलाकारों ने सजाईं देव झांकियां, कला, भक्ति और परंपरा का दिखा अनुपम संगम
Mon, 04 May 2026 05:44 PM IST
Pragati Chand
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: Pragati Chand
Updated Mon, 04 May 2026 05:44 PM IST
सार
Varanasi News: कुचिपुड़ी नृत्य उत्सव का भव्य समापन हुआ। इस दौरान नेहरू पार्क में आयोजित इस उत्सव में कला, भक्ति और परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला।
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वरुणा संध्या में नृत्य करतीं कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छावनी परिषद एवं दीपिका कल्चर सोसायटी ऑफ इंडिया की ओर से, आधार एवं पर्यटन मंत्रालय के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय कुचिपुड़ी नृत्य उत्सव का रविवार को भव्य समापन हुआ। ‘वरुणा संध्या’ के तहत कैंटोमेंट स्थित नेहरू पार्क में आयोजित इस उत्सव में कला, भक्ति और परंपरा का अनुपम संगम देखने को मिला।
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प्रतिष्ठित नृत्य गुरु रापरला चंद्रशेखर और गुरु सरोजा प्रियदर्शिनी (आर्मूर) के मार्गदर्शन में विशाखापत्तनम, तिरुपति और विजयवाड़ा से आए करीब 40 कलाकारों ने अपनी मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक पुष्पांजलि से हुई, जिसमें कलाकारों ने देवाधिदेव भगवान शिव को नमन करते हुए श्रीकाशी विश्वनाथ के पावन चरणों में अपनी प्रस्तुति समर्पित की।
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कलाकारों ने ‘भो शंभो’, ‘अंबाष्टकम्’, ‘तांडवांबरम्’, ‘नमः शिवायते’ और ‘लिंगाष्टकम्’ जैसी भावप्रधान एवं आध्यात्मिक रचनाओं पर नृत्य प्रस्तुत कर भक्तिरस की अविरल धारा प्रवाहित की। कुचिपुड़ी नृत्य की शास्त्रीय गरिमा, लय-ताल की सटीकता और भावाभिनय की गहराई ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। देव झांकियों के माध्यम से कलाकारों ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिकता को सजीव रूप में प्रस्तुत किया।
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कलाकारों में मेधा, वल्लभी, अनिका, प्रसन्ना, समीक्षा, शानवी, अनन्या, श्रेष्ठिका, आद्या, अंशु, सुरभि, वासुकी, हासंती, भवानी, मुद्रा, हम्सिका, आरुही, दृश्य, पर्णिका, रिषिका, सानवी, जप, वसुधा और ऐश्वर्या प्रमुख रूप से शामिल रहीं।