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अस्ताचलगामी सूर्य को दिया अर्घ्य, मांगा सुख-सौभाग्य
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चैती छठ के महापर्व पर श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित किया। अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालुओं ने सुख-सौभाग्य के साथ ही संतान की लंबी आयु की कामना की। गंगा घाट समेत शहर के कुंडों पर व्रतियों ने चैत्र छठ का पहला अर्घ्य अर्पित किया। शुक्रवार को भोर में उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने के साथ व्रत पूर्ण होगा।
बृहस्पतिवार की शाम को शहर के कुंड व तालाबों पर गिनी-चुनी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भीषण गर्मी में व्रत रखकर महिलाओं ने भगवान भास्कर को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। पांच अप्रैल को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ यह पर्व आठ अप्रैल को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो जाएगा। चार दिवसीय छठ के इस पर्व में महिलाएं 36 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर व्रत को पूर्ण करेंगी।
मान्यता है कि छठ माता भगवान सूर्य की बहन हैं। इसलिए छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य को प्रसन्न करना अति आवश्यक है। इसी कारण कृत्रिम तालाब, नदी आदि में कमर तक जल में रहकर महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं। माना जाता है कि चैती छठ के दिन पूजा करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान की उम्र लंबी होती है और निसंतान महिलाओं को संतान का सुख मिलता है। इसके साथ ही माना जाता है कि छठ का व्रत रखने से सैकड़ों गुना यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
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बृहस्पतिवार की शाम को शहर के कुंड व तालाबों पर गिनी-चुनी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। भीषण गर्मी में व्रत रखकर महिलाओं ने भगवान भास्कर को प्रथम अर्घ्य अर्पित किया। पांच अप्रैल को नहाय खाय के साथ शुरू हुआ यह पर्व आठ अप्रैल को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के साथ पूर्ण हो जाएगा। चार दिवसीय छठ के इस पर्व में महिलाएं 36 घंटे निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्योदय के समय अर्घ्य देकर व्रत को पूर्ण करेंगी।
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मान्यता है कि छठ माता भगवान सूर्य की बहन हैं। इसलिए छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए भगवान सूर्य को प्रसन्न करना अति आवश्यक है। इसी कारण कृत्रिम तालाब, नदी आदि में कमर तक जल में रहकर महिलाएं सूर्य को अर्घ्य देती हैं। माना जाता है कि चैती छठ के दिन पूजा करने से सुख-समृद्धि, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संतान की उम्र लंबी होती है और निसंतान महिलाओं को संतान का सुख मिलता है। इसके साथ ही माना जाता है कि छठ का व्रत रखने से सैकड़ों गुना यज्ञ के बराबर फल मिलता है।
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