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Varanasi News: किरन के रैकेट के सामने नहीं चला अर्चना का जादू, रोहित के अटैक से शिवेंद्रधर ने जीता सोना
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संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित अंतर संकाय खेलकूद युवा महोत्सव शनिवार को संपन्न हो गया। महिला वर्ग की बैडमिंटन प्रतियोगिता में किरन यादव के सामने अर्चना का खेल फीका पड़ गया। किरन ने अर्चना को सीधे सेट में 2-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। तीसरे स्थान पर निधि गुप्ता रहीं। पुरुष वर्ग में रोहित मिश्र ने सीधे सेट में 2-0 से शिवेंद्रधर द्विवेदी को हरा विजेता बने जबकि अंश तिवारी तीसरे स्थान पर रहे।
प्रतियोगिता में अलग-अलग विभागों के करीब 300 विद्यार्थियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समारोह से पूर्व पारंपरिक वेशभूषा में खिलाड़ियों ने बैडमिंटन प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाया। प्रतियोगिता का आगाज 11 फरवरी को और समापन 14 फरवरी को हुई। समापन शारीरिक शिक्षा और क्रीड़ा विभाग के सचिव प्रभारी डॉ. सत्येंद्र यादव ने संचालन किया। शोध छात्र यज्ञ नारायण संस्कृत में आंखो देखा हाल सुनाया। स्वागत कोच आदित्य कुमार धन्यवाद ज्ञापन सोमनाथ पांडेय ने दिया।
खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रेरित कर कहा कि खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। संस्कृत माध्यम से खेलों का संचालन और उद्घोषणा करना देववाणी को जनभाषा से जोड़ने का प्रयास है। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, सहकार्य एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होता है।
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प्रतियोगिता में अलग-अलग विभागों के करीब 300 विद्यार्थियों ने अलग-अलग स्पर्धाओं में खेल प्रतिभा का प्रदर्शन किया। समारोह से पूर्व पारंपरिक वेशभूषा में खिलाड़ियों ने बैडमिंटन प्रतियोगिता में अपना दमखम दिखाया। प्रतियोगिता का आगाज 11 फरवरी को और समापन 14 फरवरी को हुई। समापन शारीरिक शिक्षा और क्रीड़ा विभाग के सचिव प्रभारी डॉ. सत्येंद्र यादव ने संचालन किया। शोध छात्र यज्ञ नारायण संस्कृत में आंखो देखा हाल सुनाया। स्वागत कोच आदित्य कुमार धन्यवाद ज्ञापन सोमनाथ पांडेय ने दिया।
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खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग
कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने खिलाड़ियों को प्रेरित कर कहा कि खेल भारतीय संस्कृति का अभिन्न अंग हैं। संस्कृत माध्यम से खेलों का संचालन और उद्घोषणा करना देववाणी को जनभाषा से जोड़ने का प्रयास है। इससे विद्यार्थियों में अनुशासन, समर्पण, सहकार्य एवं स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना का विकास होता है।
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