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डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का विराेध छात्र मालवीय जी के सिद्धांतों के रक्षा के लिए कर रहे

Thu, 21 Nov 2019 03:29 PM IST
स्‍वाधीन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: स्‍वाधीन तिवारी Updated Thu, 21 Nov 2019 03:29 PM IST
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Appointment of Dr. Feroz Khan to fight the defense of Malaviya ji's principles
स्वामी अविमुक्तेेश्वरानंद - फोटो : a
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय(एसवीडीवी) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ फिरोज खान की नियुक्ति और इसके विरोध का प्रकरण अब और विवादित होता नजर आ रहा है। दोपहर बाद बीएचयू में धरनारत छात्रों से मिलने के लिए शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती के शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने विरोध जता रहे छात्रों से बातचीत भी की और उनका पक्ष जाना। साथ ही विरोध को शांतिपूर्वक करने का आवाहृन भी किया।  
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उन्होंने कहा कि मैं छात्रों से मिला और उनके पक्ष को जानने के बाद साफ कर देना चाहता हूं कि यह कोई हिंदू और मुस्लिम के बीच का विवाद नहीं है, बल्कि यह जो धर्म—विज्ञान संकाय है उसके लिए पूर्व में बीएचयू के संस्थापक महामना मदनमोहन मालवीय जी ने नियमों और सिंद्धातों को बनाया, उन नियमों और सिंद्धातों की रक्षा के लिए ये लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के इस वैचारिक विरोध के लिए जरूरत हुई तो संत समाज भी आगे आएगा। बीएचयू प्रशासन द्वारा डॉ फिरोज खान की नियुक्ति पर उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वह बीएचयू के अन्य संस्थानों में ही संस्कृत पढ़ाएं कोई आपत्ति नहीं, लेकिन नियमों का उल्लंघन करके संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय में ही पढ़ाने की क्या जरूरत है।
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दरसअल, इस विवाद को लेकर छात्र गुट और राजनीतिक दल दो धड़ों में बंटे नजर आ रहे हैं। भाजपा के पूर्व सांसद और अभिनेता परेश रावल, बसपा सुप्रीमो मायावती और कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा ने ट्वीट कर डॉ फिरोज खान का समर्थन किया है और बीएचयू प्रशासन और प्रदेश और राज्य सरकार पर ढुलमुल नीति अपनाने का आरोप लगाया है। 
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बताते चलें कि बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय(एसवीडीवी) में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर डॉ. फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर सैकड़ों छात्र सिंह द्वार पर उतर आए हैं। तो वहीं लगातार 14वें दिन से छात्र भी विरोध में धरने पर बैठे हैं। डा फिरोज के समर्थन में बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद भी आए हैं।

डॉ. फिरोज खान के समर्थन में जॉंइट एक्शन कमेटी के बैनर तले छात्रों ने सिंह द्वार पर जुटकर फिरोज के समर्थन में नारे भी लगाए। उनका कहना था कि शिक्षक की नियुक्ति का विरोध गलत है, इस पर विश्वविद्यालय को जल्द से जल्द फैसला लेने की मांग की गई। 
बीएचयू उर्दू विभाग के अध्यक्ष प्रो. आफताब अहमद आफाकी कहते हैं कि विश्वविद्यालय का मतलब है कि चाहे वह कोई हो किसी धर्म, जाति का हो। अगर योग्य है तो नियुक्ति करना गलत नहीं है। अगर चयन समिति ने डॉ. फिरोज खान की योग्यता के अनुसार उनका फैसला लिया है तो इसका विरोध नहीं होना चाहिए।


विभिन्न विश्वविद्यालय में कई ऐसे छात्र हैं जो संस्कृत पढ़ रहे हैं। इसके अलावा कुछ ऐसे छात्र भी है जो उर्दू पढ़ रहे हैं। बीएचयू में ही संस्कृत पढ़ने वाली एक मुस्लिम छात्रा को दीक्षांत समारोह में टॉपर होने पर सर्वाधिक मेडल मिल चुका है। क्या ऐसे लोग संस्कृत नहीं पढ़ सकते हैं।
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