ज्ञानवापी: लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र को हटाने के लिए आवेदन, की गई ये मांग; अगली सुनवाई 7 अप्रैल को
चार नाम अदालत में देकर उनमें से किसी एक को वाद मित्र बनाए जाने की मांग की गई है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 अप्रैल की तिथि नियत की है।
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सिविल जज सीनियर डिवीजन (फास्ट ट्रैक कोर्ट) युगल शंभू की अदालत में लॉर्ड विश्वेश्वर के वर्ष 1991 के वाद में एक हिंदू पक्षकार अनुष्का तिवारी की तरफ से आवेदन दिया गया है। आवेदन में लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाए जाने की मांग की गई है।
यह आवेदन सिविल प्रक्रिया संहिता 1908 के आदेश 32 नियम 9 के तहत दायर किया गया है। इसमें लॉर्ड विश्वेश्वर के मुकदमे में लघु देवता वादी, स्वयंभू भगवान विश्वेश्वर की प्राचीन मूर्ति के वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को हटाने की मांग की गई है।
लॉर्ड विश्वेश्वर के वर्ष 1991 के वादी रहे पंडित सोमनाथ व्यास का निधन 7 मार्च 2000 को हुआ था। उनके निधन के बाद अक्तूबर 2019 में विजय शंकर रस्तोगी को मुकदमे में देवता के हित का प्रतिनिधित्व जारी रखने के लिए लॉर्ड विश्वेश्वर का वाद मित्र नियुक्त किया गया था।
आवेदन में कहा गया है कि स्थानांतरण आवेदन का विरोध करके देवता के अनेक भक्तों की भावनाओं को वाद मित्र ठेस पहुंचा रहे हैं। राज्य सरकार, भारत संघ और काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट को पक्षकार नहीं बनाया गया। इन संस्थाओं की पक्षकार के रूप में अनुपस्थिति संभावित रूप से कार्यवाही की व्यापकता और प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकती है।
इसी तरह काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट आसन्न मंदिर का प्रबंधन करता है और इस मुकदमे के परिणाम में निहित स्वार्थ रखता है। आवेदन में कहा गया कि एक सुस्थापित कानून है कि यदि वाद मित्र मामले को ठीक से नहीं संभाल रहा है। नाबालिग या देवता के हितों की रक्षा नहीं कर रहा है तो न्यायालय द्वारा वाद मित्र को हटाया जा सकता है। ऐसे में वाद मित्र विजय शंकर रस्तोगी को वादी के वाद मित्र के पद से हटाया जाए।
आवेदक की ओर से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, संकटमोचन मंदिर के महंत प्रो. विश्वंभर नाथ मिश्र और सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन व अश्वनी उपाध्याय का नाम में से किसी एक को लॉर्ड विश्वेश्वर के वाद मित्र के रूप में नियुक्त करने का अनुरोध किया गया है।