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अब काशी में भी लगेंगे सेब के पौधे
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वाराणसी। छह से सात हजार रुपये की लागत से किसान अब बनारस में भी सेब की खेती की शुरुआत कर सकेंगे। जिसके लिए हिमाचल प्रदेश की दो सेब की प्रजातियों को केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान रहमान खेड़ा लखनऊ (सीआईएसएच) ने पूर्वी यूपी के अनुकूल तैयार किया है। जिसे पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले 50 पौधे लगाने की योजना है। जिसे नवंबर से दिसंबर के बीच लगाया जा सकता है। जो तीन साल में दिसंबर और जनवरी में फल भी देना शुरू कर देंगे।
सीआईएसएच के शोध सहायक डॉ. मनोज कुमार सोनी ने बताया कि पश्चिमी उत्तरप्रदेश के सहारनपुर और बिजनौर जिलों में सफलता के बाद पूर्वी यूपी के वाराणसी सहित कुशीनगर, फैजाबाद जिलों को सेब की खेती के लिए चुना गया है। जिनके पर्यावरण के अनुकूल हिमाचल प्रदेश की दो प्रजाति अन्ना और डारसेट सेब के पौध विकसित किए हैं। पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इच्छुक किसानों 50-50 पौधे दिए जाएंगे। मनोज ने बताया कि पांच से सात हजार की लागत में किसान इसकी शुरुआत कर सकते है। बशर्ते इसके पहले सेब की खेती करने के बारे में प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। वैसे सेब के पेड़ के लिए 20 से 22 डिग्री का तापमान अनुकूल माना जाता है। मगर उक्त दोनों प्रजातियों की क्षमता 50 डिग्री होगी। जिसका पौधरोपण नवंबर से दिसंबर माह में कम से कम दो गुना दो मीटर की दूरी पर किया जाएगा।
आम की तीन प्रजातियां की गईं विकसित
इसके अलावा आम की तीन लेट प्रजाति अनामिका, अरुणिमा और मल्लिक को भी विकसित किया गया है। जिनके फल जुलाई के पहले सप्ताह से पकने शुरू हो जाते हैं। जिनके छिलके का रंग लाल और सुनहरा होता है। इनके पौधे भी अगस्त महीने में रोपित किये जाते हैं। जो कचहरी स्थित कंपनी बाग उपलब्ध है।
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अब तक बनारस में सेब की खेती को लेकर कोई चर्चा नहीं थी। अब अगर संस्थान ने पौध विकसित किया है तो अच्छा है। अमूमन सेब के लिए 20 से 22 डिग्री तक का तापमान अनुकूल होता है। इसके बावजूद 40 से 45 डिग्री वाले बनारस में सेब की खेती कल्पना की गई है तो किसानों के लिए आय के लिए एक बेहतर उपलब्धि होगी।-संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी
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सीआईएसएच के शोध सहायक डॉ. मनोज कुमार सोनी ने बताया कि पश्चिमी उत्तरप्रदेश के सहारनपुर और बिजनौर जिलों में सफलता के बाद पूर्वी यूपी के वाराणसी सहित कुशीनगर, फैजाबाद जिलों को सेब की खेती के लिए चुना गया है। जिनके पर्यावरण के अनुकूल हिमाचल प्रदेश की दो प्रजाति अन्ना और डारसेट सेब के पौध विकसित किए हैं। पहले चरण में पायलट प्रोजेक्ट के तहत इच्छुक किसानों 50-50 पौधे दिए जाएंगे। मनोज ने बताया कि पांच से सात हजार की लागत में किसान इसकी शुरुआत कर सकते है। बशर्ते इसके पहले सेब की खेती करने के बारे में प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होगा। वैसे सेब के पेड़ के लिए 20 से 22 डिग्री का तापमान अनुकूल माना जाता है। मगर उक्त दोनों प्रजातियों की क्षमता 50 डिग्री होगी। जिसका पौधरोपण नवंबर से दिसंबर माह में कम से कम दो गुना दो मीटर की दूरी पर किया जाएगा।
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आम की तीन प्रजातियां की गईं विकसित
इसके अलावा आम की तीन लेट प्रजाति अनामिका, अरुणिमा और मल्लिक को भी विकसित किया गया है। जिनके फल जुलाई के पहले सप्ताह से पकने शुरू हो जाते हैं। जिनके छिलके का रंग लाल और सुनहरा होता है। इनके पौधे भी अगस्त महीने में रोपित किये जाते हैं। जो कचहरी स्थित कंपनी बाग उपलब्ध है।
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अब तक बनारस में सेब की खेती को लेकर कोई चर्चा नहीं थी। अब अगर संस्थान ने पौध विकसित किया है तो अच्छा है। अमूमन सेब के लिए 20 से 22 डिग्री तक का तापमान अनुकूल होता है। इसके बावजूद 40 से 45 डिग्री वाले बनारस में सेब की खेती कल्पना की गई है तो किसानों के लिए आय के लिए एक बेहतर उपलब्धि होगी।-संदीप कुमार गुप्त, जिला उद्यान अधिकारी