वाराणसी। लालपुर की रहने वाली अंजलि भारद्वाज तीन प्रादेशिक और जूनियर वर्ग की एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा ले चुकी है। वह खेलने के लिए चाय की दुकान पर काम करते हुए परिजनों के काम में हाथ बंटाती हैं। अपने जुनून, हौसले से अपने सपने को साकार करने का प्रयास करती है। यह कहानी है काशी की राष्ट्रीय फुटबॉलर अंजलि भारद्वाज की। जो रोजाना सुबह 5 बजते ही डॉ. भीमराव आंबेडकर क्रीड़ा संकुल बड़ा लालपुर के पास अपनी छोटी सी चाय की दुकान में पिता का काम में हाथ बंटाती है।
इसके कुछ घंटों बाद लड़की फुटबॉल के मैदान में तेज रफ्तार स्ट्राइकर बन जाती है। पैरों में साधारण जूते लेकिन आंखों में असाधारण सपने। मैदान पर उसका आत्मविश्वास देखने लायक होता है। कोच उप क्रीड़ा अधिकारी इरशाद अहमद कहते हैं कि संसाधनों की कमी के बावजूद अंजजि कर खेल हर दिन बेहतर होता जा रहा है। अब तक विभिन्न प्रतियोगिता में 50 से ज्यादा गोल कर चुकी हैं। आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन समाज की सोच के बावजूद उनका सपना एक दिन राष्ट्रीय स्तर पर खेलना है। अंजलि बताती है कि वह सुबह चाय बेचती हैं ताकि शाम को अपने सपनों को जिंदा रख सकूं। फुटबॉल ही मेरी पहचान है। यह कहानी सिर्फ एक लड़की की नहीं बल्कि उन लाखों बेटियों की है जो हालात से लड़कर अपने सपनों की उड़ान भर रही हैं। वह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे जैसी हो, अगर हौसला मजबूत हो तो मंज़िल दूर नहीं।