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Varanasi News: काशी में दिखेगा अंकोरवाट मंदिर, 60 फीट के पंडाल में विराजेंगी मां दुर्गा
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वाराणसी। प्रख्यात हथुआ मार्केट का पूजा पंडाल इस बार कंबोडिया के अंकोरवाट मंदिर का दर्शन करवाएगा। पहली बार किसी विदेश के मंदिर के थीम पर पूजा पंडाल तैयार हो रहा है। इसमें मंदिर के स्थापत्य कला के साथ बौद्ध धर्म की आभा भी दिखेगी। 60 फीट ऊंचे और 55 फीट चौड़े पंडाल में तीन शिखर होगा। प्रवेशद्वार पर छह-छह फीट के दो शेर होंगे। करीब तीन दशक बाद मां दुर्गा की प्रतिमा भारतीय शैली में बैठाई जाएगी। इसको किसी तरह की तकनीकी से दूर रखा जाएगा। पंडाल में शास्त्रीय संगीत की धुन गूंजेगी। नवरात्र 11 अक्तूबर से शुरू हो जाएगा।
प्रीमियर बॉयज क्लब के संरक्षक डॉ. रमेशदत्त पांडेय, महामंत्री चंद्रप्रकाश जायसवाल व कोषाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता ने शनिवार को पंडाल परिसर में ही पत्रकारों को बताया कि इस पंडाल को बनारस के अलावा कोलकाता के कारीगर तैयार कर रहे हैं। डेढ़ माह से पंडाल पंडाल का निर्माण शुरू हो गया। 70 फीसदी काम पूरा हो गया है। 14 अक्तूबर बनकर तैयार हो जाएगा। 16 अक्तूबर से पूजा शुरू हो जाएगी। डॉ. रमेश दत्त पांडेय ने बताया कि दुर्गा पूजा के लिए कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोरवाट मंदिर के रूप में पंडाल बन रहा है, जो सनातन विरासत, शक्ति-आराधना और विख्यात स्थापत्य का संगम होगा। भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली सनातन संस्कृति को काशी की शक्ति-आराधना से जोड़ेगा।
उन्होंने बताया कि 12वीं शताब्दी में बने अंकोरवाट मंदिर के विशाल शिखर, विशिष्ट प्रवेश संरचना और सूक्ष्म शिल्पकारी को प्रकाश-सज्जा से पंडाल को आकर्षक बनाएगा, जो दुर्गा पूजा में पूर्वांचल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहेगा। संजय गुप्ता ने बताया कि क्लब के 51वें दुर्गा पूजा समारोह में बदलाव किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मूर्तियों को रखने के बजाय इस बार मां की मूर्ति परंपरागत शैली में होगी। पिछले साल यहां का पंडाल मैसूर के चामुंडा देवी के रूप में था। आईआईटी बीएचयू के छात्र रहे युवा हर्ष गुप्ता ने पंडाल की डिजाइन तैयार किया है।
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प्रीमियर बॉयज क्लब के संरक्षक डॉ. रमेशदत्त पांडेय, महामंत्री चंद्रप्रकाश जायसवाल व कोषाध्यक्ष डॉ. संजय गुप्ता ने शनिवार को पंडाल परिसर में ही पत्रकारों को बताया कि इस पंडाल को बनारस के अलावा कोलकाता के कारीगर तैयार कर रहे हैं। डेढ़ माह से पंडाल पंडाल का निर्माण शुरू हो गया। 70 फीसदी काम पूरा हो गया है। 14 अक्तूबर बनकर तैयार हो जाएगा। 16 अक्तूबर से पूजा शुरू हो जाएगी। डॉ. रमेश दत्त पांडेय ने बताया कि दुर्गा पूजा के लिए कंबोडिया के विश्वविख्यात अंकोरवाट मंदिर के रूप में पंडाल बन रहा है, जो सनातन विरासत, शक्ति-आराधना और विख्यात स्थापत्य का संगम होगा। भारत से दक्षिण-पूर्व एशिया तक फैली सनातन संस्कृति को काशी की शक्ति-आराधना से जोड़ेगा।
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उन्होंने बताया कि 12वीं शताब्दी में बने अंकोरवाट मंदिर के विशाल शिखर, विशिष्ट प्रवेश संरचना और सूक्ष्म शिल्पकारी को प्रकाश-सज्जा से पंडाल को आकर्षक बनाएगा, जो दुर्गा पूजा में पूर्वांचल के श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहेगा। संजय गुप्ता ने बताया कि क्लब के 51वें दुर्गा पूजा समारोह में बदलाव किया गया है। इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मूर्तियों को रखने के बजाय इस बार मां की मूर्ति परंपरागत शैली में होगी। पिछले साल यहां का पंडाल मैसूर के चामुंडा देवी के रूप में था। आईआईटी बीएचयू के छात्र रहे युवा हर्ष गुप्ता ने पंडाल की डिजाइन तैयार किया है।
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