पुरातात्विक खुदाई में मिला प्रमाण, इतने साल पहले बसी थी काशी
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विश्व की प्राचीन नगरी कही जाने वाली काशी का जिक्र तो वेद और पुराणों में भी है। लेकिन काशी की उम्र क्या है यह हमेशा से ही चर्चा का विषय रहा है। किसी ने ठीक ही कहा है कि गंगा और काशी एक दूसरे के पूरक है। इसी रिश्ते को सिद्ध कर दिया है वाराणसी में हुई पुरातात्विक खुदाई ने।
आईआईटी बीएचयू में काशी कथा के तहत चल रही कार्यशाला के ग्यारहवें दिन काशी के बसने और गंगा अवतरण पर मंथन हुआ। जिसमें मुख्य वक्ता प्रो. उमाकांत शुक्ल ने कहा कि रामनगर और राजघाट में हुई पुरातात्विक खुदाई में 3800 साल पहले काशी के बसने का प्रमाण मिलता है।
मालवीय उद्यमिता संवर्धन केंद्र में चल रही कार्यशाला में प्रो. शुक्ल ने कहा कि काशी में गंगा का आगमन 40 हजार साल पहले हुआ था। गंगा अपने वर्तमान स्वरूप में सात हजार साल से है। ऐसा टेक्टोनिक प्लेटों में हलचल के कारण हुआ था, जिससे इस क्षेत्र में दो बड़े भूकंप आने के प्रमाण मिलते हैं।
काशी में कभी भूकंप नहीं आ सकता
काशी की भौगोलिक अवस्थापना ऐसी है कि यहां कभी भी भूकंप, बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदा नहीं आ सकती। पहले घाटों को और उनके ऊपर बड़ी इमारतें बनाने के पीछे उद्देश्य यही था कि गंगा शहर को खत्म न कर दें।
काशी के भौगोलिक सर्वेक्षण पर बोलते हुए प्रो. पृथ्वीश नाग ने कहा कि बनारस प्राचीन नगर ही नहीं, सबसे प्राचीन सुनियोजित शहर भी है। पक्का महाल, संकरी गलियां, ड्रेनेज सिस्टम और तालाबों का जाल इस तथ्य की पुष्टि करता है। उन्होंने स्लाइड के माध्यम से रिमोट सेंसिंग द्वारा बनाए मानचित्र की व्याख्या की।