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हनुमत दरबार में शिवमणि की प्रस्तुति ने श्रोताओं को किया आश्चर्यचकित

Mon, 09 Apr 2018 04:57 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Updated Mon, 09 Apr 2018 04:57 PM IST
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Anandan sivamani performed in sankatmochan music festival
संकट मोचन संगीत समारोह में शिवमणि - फोटो : अमर उजाला
संकटमोचन संगीत महाकुंभ की पांचवीं निशा की पहली प्रस्तुति ही सभी के लिए अकल्पनीय रही। शिवमणि ने पारंपरिक वाद्यों, पूजा के पात्रों और बर्तनों को संगीत का उपकरण बनाकर जिस अंदाज में प्रस्तुत किया वह देखने और सुनने वालों के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था।
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शृंगी, बाल्टी, घंट और घड़ियाल के साथ ही बाल्टी के संयोजन से निकली सुर लहरियों को लोग आश्चर्यचकित होकर देखते रह गए। शिवमणि और उनकी टीम ने राग हंसध्वनि में भगवान गणपति की वंदना से कार्यक्रम का श्रीगणेश किया।
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वातापि गणपति रचना को उनके साथी कलाकारों ने गायन और वादन के जरिए मुखर किया। मेंडोलिन वादक यू राजेश, तबिल वादक तनु तंजौर गोविंदराजन, मृदंग वादक एसबी रमणी ने मिल जुलकर एक अकल्पनीय वातावरण का निर्माण मंदिर प्रांगण में किया।
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वह क्षण देखते ही बनता था जब शिवमणि ने ड्रम वादन करते हुए भगवान को जल अर्पित करने वाली श्रृंगी उठाई और उसे बजाते हुए रखी बाल्टी बजाने लगे तो उत्पन्न होने वाली ध्वनि में अंतर लोगों ने साफ  साफ  महसूस किया।

शिवमणि और उनके साथी करीब डेढ़ घंटे तक मंच पर जमे रहे और एक के बाद एक संगीत प्रस्तुतियों से दर्शकों को रोमांचित करते रहे। शिवमणि के साथ पारंपरिक ड्रम सेट के साथ कई ऐसी चीजें भी थीं जिन्हें देखकर लोगों को आश्चर्य हो रहा था।

उनके पास देवता को जल चढ़ाने वाली श्रृंगी थी, बाल्टी थी, मंदिर में बजाया जाने वाला घंट और घड़ियाल तब तो लोगों को समझ में आया मगर इस ड्रम सेट के साथ रखी खाली बाल्टी ने सभी श्रोताओं का कौतूहल बढ़ा दिया था। ड्रम बजाने वाली स्टिक से बाल्टी पर ऐसा समा बांधा कि श्रोताओं की ओर से तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। 

वनजा उदय और उनकी टीम की शानदार प्रस्तुति

Anandan sivamani performed in sankatmochan music festival
प्रस्तुति देती हुई कुचिपुड़ी नृत्यांगना वनजा उदय - फोटो : अमर उजाला
पांचवीं निशा की दूसरी प्रस्तुति लेकर आईं हैदराबाद की सुप्रसिद्ध कुचिपुड़ी नृत्यांगना वनजा उदय और उनकी टीम ने लगभग डेढ़ घंटे तक अपनी प्रस्तुति दी। इस डेढ़ घंटे की म में जो सबसे खास बात संक्षिप्त रामायण और हनुमान चालीसा के नृत्य की शानदार अभिव्यक्ति रही।

वनजा उदय और उनके साथी कलाकारों ने मात्र 21 मिनट में राम जन्म से लेकर श्री राम राज्याभिषेक तक के कथानक को बड़े ही सहज और सटीक अंदाज में दर्शकों तक पहुंचाया। इसके बाद समापन प्रस्तुति उन्होंने हनुमान चालीसा को नृत्य में अभिव्यक्ति दी।

यह दोनों ही प्रस्तुतियां उन्होंने संकट मोचन संगीत समारोह के लिए खास तौर पर तैयार की थी। इसकी प्रथम अंजलि संकट मोचन संगीत समारोह में ही दी है। वनजा ने बताया कि विगत वर्षों में ही इस प्रस्तुति की रूपरेखा तय हो गई थी।

राम और हनुमान की कथा के बीच उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत गणपति वंदना से की और श्री कृष्ण लीला के अंश भी दिखाए। वनजा उदय के साथ वेंकट नाथ साईं, राधाकृष्णन, विश्व शांति, किरणमई और कुमारी प्रगति ने मंच पर नृत्य किया।

नृत्य के दौरान पारंपरिक शैली को यथावत रखा गया। पांव के नीचे थाली और सिर पर जल से भरा हुआ कलश दोनों के बीच समन्वय बनाते हुए नर्तकों का संतुलन दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित कर गया।

पांचवी निशा की तीसरी कड़ी के रूप में पंडित उल्हास कशालकर का गायन हुआ। पंडित उल्हास ने राग जोग की अवधारणा की। उनके साथ तबले पर पंडित सुरेश तलवरकर ने सधी हुई संगत की।
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