फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Varanasi News ›   Single Almanac to Unify Kashmir to Kerala in Kashi, Aligning Two Festival Dates Know Details

खास खबर: काशी में बनेगा कश्मीर से केरल का एक पंचांग, त्योहारों की दो तिथियों का हल मिलेगा; जानें इसके बारे में

Fri, 29 Sep 2023 09:25 AM IST
शाहरुख खान आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी
आलोक कुमार त्रिपाठी, अमर उजाला, वाराणसी Published by: शाहरुख खान Updated Fri, 29 Sep 2023 09:25 AM IST
सार

काशी में कश्मीर से केरल तक का एक पंचांग तैयार होगा। धार्मिक राजधानी काशी के विद्वान नवंबर में पंचांग तैयार करेंगे। इसमें महाकुंभ में लोकार्पण, त्योहारों पर दो तिथियों का हल निकलेगा।

विज्ञापन
Single Almanac to Unify Kashmir to Kerala in Kashi, Aligning Two Festival Dates Know Details
प्रोफेसर नागेंद्र पांडेय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार्मिक और सांस्कृतिक राजधानी में बीएचयू देश के लिए एक पंचांग बनाएगा। इससे व्रत, तीज व त्योहारों की तिथियों पर बन रही भ्रम की स्थिति दूर होगी। यह पहल काशी विश्वनाथ मंदिर से हुई है। काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. नागेंद्र पांडेय ने पंचांगों में एकरूपता के लिए नई स्मृति निर्माण कराने का निर्णय लिया है। 
विज्ञापन


प्रयागराज महाकुंभ के दौरान नई स्मृति का लोकार्पण होगा। इससे एक देश-एक पंचांग का निर्माण हो जाएगा। स्मृति के निर्माण के लिए बीएचयू को केंद्र में रखा गया है। प्रो. पांडेय ने काशी के विद्वानों का आह्वान किया और कहा कि नवंबर में स्मृति निर्माण समिति की पहली बैठक होगी। इसमें धर्मशास्त्र, ज्योतिषविदों के अलावा पंचांगकारों को भी शामिल किया जाएगा। बीएचयू के ज्योतिष विभाग और वैदिक विज्ञान केंद्र में ही स्मृति निर्माण के लिए प्रस्ताव रखा जाएगा।
विज्ञापन


कश्मीर से केरल तक होगा एक पंचांग
प्रो. पांडेय ने बताया कि प्राचीन धर्मग्रंथों, स्मृति और पुराणों को आधार बनाया जाएगा। उसकी जांच होगी, फिर सब मन बनाकर नई स्मृति के निर्माण का श्रीगणेश करेंगे। इसमें तर्कसंगत मत और परंपराओं को ही स्थान दिया जाएगा। नई स्मृति को आधार बनाकर जब पंचांग का निर्माण होगा तो कश्मीर से केरल तक तिथि, त्योहार और व्रत में भ्रम की स्थिति नहीं होगी। 
विज्ञापन
विज्ञापन


इसमें पूरब से पश्चिम, उत्तर से दक्षिण तक की परंपराओं और धर्मशास्त्रों का समावेश होगा। इससे सनातन धर्म की एकजुटता के साथ ही एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना भी साकार होगा।

स्मृति का अर्थ
धर्म, दर्शन, आचार-व्यवहार आदि से संबंध रखने वाले प्राचीन हिंदू धर्मशास्त्र, जिनकी रचना ऋषि-मुनियों ने की थी। इसे प्राचीन हिंदू विधि संहिता भी कहा जाता है। इसके आधार पर तिथि, त्योहार और व्रत आदि का निर्धारण किया जाता है।

होली, दीपावली की तिथियों पर भ्रम से लोग परेशान
होली, रक्षाबंधन, जन्माष्टमी के बाद देव दीपावली की तिथि पर विवाद से लोग परेशान हैं। आरती समितियां उदया तिथि तो काशी विद्वत परिषद प्रदोषव्यापिनी तिथि का समर्थन कर रही है।उनका कहना है कि हर त्योहार दो दिन का पड़ रहा है। इससे दिक्कत होती है। काशी में परेशानी बढ़ती है। श्रद्धालु बहार से आते हैं तो क्रूज, बजड़े, नाव, होटल व वाहन की बुकिंग निरस्त करानी पड़ती है। इसका संज्ञान लेकर ही एक देश एक पंचांग बनाने का खाका तैयार किया गया है।

काशी से प्रकाशित होने वाले पंचांग
काशी से निकलने वाले पंचांगों में विश्व पंचांग, श्री ऋषिकेश (काशी विश्वनाथ) पंचांग, बापूदेव शास्त्री प्रवर्तित दृक्सिद्ध पंचांग, ज्ञानमंडल सौर पंचांग, श्री महावीर पंचांग, श्री गणेश आपा पंचांग, ठाकुर प्रसाद पंचांग प्रमुख हैं।

 

तीन तरह के होते हैं पंचांग
हिंदू पंचांग तीन तरह के होते हैं। इसमें पहला चंद्र आधारित, दूसरा नक्षत्र आधारित और तीसरा सूर्य आधारित कैलेंडर पद्धति है। भिन्न-भिन्न रूप में यह पूरे भारत में माना जाता है। एक साल में 12 महीने होते हैं। प्रत्येक महीने में 15 दिन के दो पक्ष होते हैं- शुक्ल और कृष्ण।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed