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मिशन 2019 के लिए अमित शाह ने संभाली तीन प्रांत की चुनावी कमान
गुंजन श्रीवास्तव, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Thu, 05 Jul 2018 01:57 PM IST
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बैठक करते अमित शाह व अन्य पार्टी नेता
- फोटो : अमर उजाला
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लोकसभा चुनाव की तैयारी के क्रम में मिर्जापुर-वाराणसी के दौरे पर आए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने मछली की आंख यानी अगली बार भी एनडीए सरकार का मंतव्य स्पष्ट कर दिया है।
माना जा रहा है कि इस बार 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पर झंडा फहराने के साथ ही भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ जाएगी। 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही शाह ने इस बार भी काशी, अवध और गोरक्ष प्रांत का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
उन्होंने खुद कहा कि दिल्ली की रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी लिहाज से बुधवार को अपने दौरे में उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि नेताओं को संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सहयोग के अभाव में हम लक्ष्य हासिल करने से चूक जाएंगे।
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सपा-बसपा गठबंधन की तमाम तिकड़मों को पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए शाह ने संकेत दिए हैं कि इस बार भी चुनावी संग्राम की केंद्र काशी ही रहेगा। सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष को करारा जवाब देने की रणनीति बना ली गई है।
बूथ स्तर पर तक पैठ बनाने के लिए स्मार्टफोन वाले पार्टी वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई कि किस प्रकार से ग्राफिक्स और कार्टून के माध्यम से जनता तक मेसेज पहुंचाना है।
मोदी सरकार के चार साल के काम काज का तुलनात्मक अध्ययन विपक्षी सरकारों से करने का डेटा बेस मजबूत करने को कहा। उन्होंने आईटी सेल से जुड़े वालटियर्स को इस लड़ाई में इस्तेमाल होने वाली साइबर तकनीक बताई।
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माना जा रहा है कि इस बार 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले पर झंडा फहराने के साथ ही भाजपा पूरी तरह से चुनावी मोड में आ जाएगी। 2014 के लोकसभा चुनाव की तरह ही शाह ने इस बार भी काशी, अवध और गोरक्ष प्रांत का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है।
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उन्होंने खुद कहा कि दिल्ली की रास्ता यूपी से होकर जाता है। इसी लिहाज से बुधवार को अपने दौरे में उन्होंने न केवल कार्यकर्ताओं बल्कि नेताओं को संगठन और सरकार के बीच समन्वय स्थापित करने की सख्त हिदायत दी। उन्होंने कहा कि सहयोग के अभाव में हम लक्ष्य हासिल करने से चूक जाएंगे।
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सपा-बसपा गठबंधन की तमाम तिकड़मों को पीछे छोड़ने का आह्वान करते हुए शाह ने संकेत दिए हैं कि इस बार भी चुनावी संग्राम की केंद्र काशी ही रहेगा। सोशल मीडिया के जरिए विपक्ष को करारा जवाब देने की रणनीति बना ली गई है।
बूथ स्तर पर तक पैठ बनाने के लिए स्मार्टफोन वाले पार्टी वालंटियर को जिम्मेदारी दी गई कि किस प्रकार से ग्राफिक्स और कार्टून के माध्यम से जनता तक मेसेज पहुंचाना है।
मोदी सरकार के चार साल के काम काज का तुलनात्मक अध्ययन विपक्षी सरकारों से करने का डेटा बेस मजबूत करने को कहा। उन्होंने आईटी सेल से जुड़े वालटियर्स को इस लड़ाई में इस्तेमाल होने वाली साइबर तकनीक बताई।
यूपी की 40 सीटों के लिए रणनीति तय
अमित शाह, योगी आदित्य नाथ, महेन्द्र नाथ पांडेय व अन्य
- फोटो : अमर उजाला
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बुधवार को ज्ञान प्रवाह में काशी, अवध और गोरक्ष प्रांत की 40 सीटों के लिए चुनावी रणनीति पर विचार-विमर्श किया। सरकार में शामिल पार्टी नेताओं और संगठन पदाधिकारियों के साथ हुई इस बैठक को पूर्वांचल में सपा-बसपा गठबंधन की पैठ को लेकर पार्टी की सतर्कता के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में पटेल, राजभर, मौर्य और दलित वोट बैंक को सहेजने पर चर्चा की हुई। गठबंधन में शामिल पार्टियों की गतिविधियों पर नजर रखने की भी हिदायत दी गई। बूथ स्तर तक कमेटी को मजबूत करने को कहा गया। इन क्षेत्रों में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों पर भी चर्चा की गई।
बताया गया कि काशी में प्रधानमंत्री 14-15 जुलाई को आ रहे हैं। सभी तैयारियां इससे पहले ही पूरी कर ली जाएं। विचार-विमर्श में शाह के अलावा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश शामिल रहे।
इसके अलावा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला, बृजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्य, सूर्य प्रताप शाही, नंद गोपाल नंदी और सुनील बंसल, सुनील ओझा, पंकज सिंह, लक्ष्मण आचार्य भी मौजूद रहे।
वहीं नगवां स्थित अमेठी कोठी पर अमित शाह ने कोर कमेटी संग चाय पर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो इस दौरान सामाजिक समीकरण साधने के लिए कई बिंदुओं पर नजर रखने की रणनीति तय हुई।
इस दौरान तीनों प्रांतों के क्षेत्रीय अध्यक्ष और संगठन मंत्री को आगामी लोकसभा के मद्देनजर महत्वपूर्ण कार्य सौंपे। यहां रात्रि विश्राम के बाद शाह गुरुवार की सुबह आठ बजे आगरा चले जाएंगे।
बैठक में पटेल, राजभर, मौर्य और दलित वोट बैंक को सहेजने पर चर्चा की हुई। गठबंधन में शामिल पार्टियों की गतिविधियों पर नजर रखने की भी हिदायत दी गई। बूथ स्तर तक कमेटी को मजबूत करने को कहा गया। इन क्षेत्रों में होने वाली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों पर भी चर्चा की गई।
बताया गया कि काशी में प्रधानमंत्री 14-15 जुलाई को आ रहे हैं। सभी तैयारियां इससे पहले ही पूरी कर ली जाएं। विचार-विमर्श में शाह के अलावा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राष्ट्रीय महासचिव भूपेंद्र यादव, उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिवप्रकाश शामिल रहे।
इसके अलावा केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला, बृजेश पाठक, स्वामी प्रसाद मौर्य, सूर्य प्रताप शाही, नंद गोपाल नंदी और सुनील बंसल, सुनील ओझा, पंकज सिंह, लक्ष्मण आचार्य भी मौजूद रहे।
वहीं नगवां स्थित अमेठी कोठी पर अमित शाह ने कोर कमेटी संग चाय पर चर्चा की। सूत्रों की मानें तो इस दौरान सामाजिक समीकरण साधने के लिए कई बिंदुओं पर नजर रखने की रणनीति तय हुई।
इस दौरान तीनों प्रांतों के क्षेत्रीय अध्यक्ष और संगठन मंत्री को आगामी लोकसभा के मद्देनजर महत्वपूर्ण कार्य सौंपे। यहां रात्रि विश्राम के बाद शाह गुरुवार की सुबह आठ बजे आगरा चले जाएंगे।