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बीएचयू में अमेरिकी शिक्षकों ने जाना जैविक खेती का तौर-तरीका
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Fri, 11 Aug 2017 02:44 PM IST
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बौद्धिक सम्मेलन में भाग लेने आए अमेरिकी शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
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कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू में आयोजित बौद्धिक सम्मेलन में भाग लेने आए मिसिगल स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका के शिक्षकों ने गुरुवार को जैविक खेती की विधि और तौर-तरीके जाने। यहां से लौट कर शिक्षक अपने संस्थान के छात्रों को जैविक खेती के गुर सिखाएंगे।
टीम में शामिल प्रो. स्नैप ने कहा कि उनकी टीम जैविक खेती की बारीकियां जानने के लिए बीएचयू के कृषि फार्म में भी जाएगी। कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
उन्होंने बताया कि अमेरिकी किसान तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत है और इसके सहारे कृषि विकास की ओर अग्रसर है। बताया कि अमेरिकी छात्र भारत में हो रही जैविक खेती के बारे में जानना चाहते हैं।
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अमेरिका के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में साल भर बारिश होती है। इसलिए वहां के मौसम के अनुसार जैविक खेती पर अमल करना होगा।
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टीम में शामिल प्रो. स्नैप ने कहा कि उनकी टीम जैविक खेती की बारीकियां जानने के लिए बीएचयू के कृषि फार्म में भी जाएगी। कहा कि कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है।
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उन्होंने बताया कि अमेरिकी किसान तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत है और इसके सहारे कृषि विकास की ओर अग्रसर है। बताया कि अमेरिकी छात्र भारत में हो रही जैविक खेती के बारे में जानना चाहते हैं।
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अमेरिका के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में साल भर बारिश होती है। इसलिए वहां के मौसम के अनुसार जैविक खेती पर अमल करना होगा।
महिलाओं में कृषि शिक्षा का अभाव चुनौती
मिसीगन यूनिवर्सिटी यूएसए की प्रो. लिंडा
- फोटो : अमर उजाला
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली, भारतीय किसान संघ और कृषि विज्ञान संस्थान बीएचयू के तत्वावधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय बौद्धिक सम्मेलन के अंतिम दिन कृषि शिक्षा में महिलाओं की भूमिका पर विस्तृत चर्चा हुई।
इस दौरान मिसीगन यूनिवर्सिटी यूएसए की प्रो. लिंडा ने कहा कि महिलाओं में कृषि शिक्षा का अभाव चिंतनीय है। इसे एक चुनौती के रुप में स्वीकारते हुए दूर करने की जरूरत है।
संस्थान के शताब्दी कृषि भवन में आयोजित सम्मेलन में प्रो. लिंडा ने कृषि में महिलाओ के योगदान पर विस्तृत चर्चा की। स्पष्ट किया कि विकासशील देशों विशेष रुप से भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि विकास में महिलाओं का योगदान पुरुषों से अधिक रहा है।
अध्यक्षता करते हुए पद्मभूषण डॉ. आरबी सिंह ने की। समापन सत्र में निदेशक प्रो.ए वैश्मपायन ने सम्मेलन की उपयोगिता पर बल देते हुए भावी उपलब्धियों की चर्चा की। अपेक्षा किया कि केंद्र सरकार निश्चित रुप से कृृषि शिक्षा एवं शोध के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध करायेगी।
इस दौरान मिसीगन यूनिवर्सिटी यूएसए की प्रो. लिंडा ने कहा कि महिलाओं में कृषि शिक्षा का अभाव चिंतनीय है। इसे एक चुनौती के रुप में स्वीकारते हुए दूर करने की जरूरत है।
संस्थान के शताब्दी कृषि भवन में आयोजित सम्मेलन में प्रो. लिंडा ने कृषि में महिलाओ के योगदान पर विस्तृत चर्चा की। स्पष्ट किया कि विकासशील देशों विशेष रुप से भारतीय उपमहाद्वीप में कृषि विकास में महिलाओं का योगदान पुरुषों से अधिक रहा है।
अध्यक्षता करते हुए पद्मभूषण डॉ. आरबी सिंह ने की। समापन सत्र में निदेशक प्रो.ए वैश्मपायन ने सम्मेलन की उपयोगिता पर बल देते हुए भावी उपलब्धियों की चर्चा की। अपेक्षा किया कि केंद्र सरकार निश्चित रुप से कृृषि शिक्षा एवं शोध के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध करायेगी।