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BHU: बीएचयू में 1100 दिन बाद आंबेडकर चेयर प्रोफेसर की होगी नियुक्ति, 15 जनवरी है आवेदन की अंतिम तिथि
Wed, 24 Dec 2025 03:19 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Wed, 24 Dec 2025 03:19 PM IST
सार
बीएचयू में 1100 दिन बाद आंबेडकर चेयर प्रोफेसर की नियुक्ति होगी। यहां 2022 के बाद से कोई चेयर प्रोफेसर नहीं था। ये चेयर 6 अप्रैल 2016 को डॉ. आंबेडकर के न्याय के विचारों पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई थी।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बीएचयू में करीब 1100 दिन तक सीट साली रहने के बाद डॉ. आंबेडकर चेयर के लिए चेयर प्रोफेसर की नियुक्ति होगी। 15 जनवरी आवेदन की अंतिम तिथि है। आवेदन की हार्डकॉपी 20 जनवरी को शाम पांच बजे तक होलकर हाउस में जमा करनी होगी। वेतन 1.82 लाख से ज्यादा होगा।
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योग्यता के लिए अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, धार्मिक अध्ययन, दर्शनशास्त्र, संवैधानिक अध्ययन, शिक्षा, ह्यूमैनिटीज, सोशियोलॉजी, सोशल वर्क, लॉ, मानवाधिकार में से किसी एक विषय में पीएचडी की डिग्री अनिवार्य है। कम से कम 10 रिसर्च पेपर प्रकाशित हों। किसी विश्वविद्यालय में 10 साल के शिक्षण का अनुभव हो।
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बीएचयू में यह चेयर सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत काम करेगा। प्रोफेसर के साथ ही पांच पीएचडी छात्रों को भी दाखिला दिया जाएगा। बीएचयू में इससे पहले सामाजिक विज्ञान संकाय के पूर्व डीन प्रो. मंजीत चतुर्वेदी 22 अक्तूबर 2022 तक आंबेडकर चेयर प्रोफेसर रहे। उनके बाद से ही चेयर प्रोफेसर का पद खाली था।
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कई बार इसे लेकर सवाल भी खड़े किए गए। पहले से नियुक्त चेयर के प्रोफेसरों और कर्मचारियों का आधा वेतन और मिलने वाली धनराशि भी नहीं मिली। ये चेयर 6 अप्रैल 2016 को डॉ. आंबेडकर के न्याय के विचारों पर रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए स्थापित की गई थी। भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और रजिस्ट्रार ने इस पर समझौता किया था।
नए समझौते पर होंगे हस्ताक्षर
बीएचयू की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, डॉ. आंबेडकर चेयर में शिक्षाविद्, शोधकर्ता और छात्र डॉ. बीआर आंबेडकर के विचारों और चिंतन को समझकर शोध कर सकेंगे। योग्यता के लिए जरूरी विषयों में अनुसंधान और अध्ययन के क्षेत्र डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन और संबंधित विश्वविद्यालय और संस्थान के बीच संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन किए जाएंगे। शोध कार्यों के निष्कर्षों को यूजीसी-केयर सूची में शामिल करना और अंतरराष्ट्रीय रिसर्च पेपर प्रकाशित किया जाएगा।
वंचित वर्ग के अतीत और वर्तमान पर होंगे शोध
वंचित वर्गों के अतीत और वर्तमान पर शोध होंगे। व्याख्यान, संगोष्ठी, सेमिनार, कार्यशालाएं कराईं जाएंगी। चेयर में न्यूनतम पांच पीएचडी शोधार्थियों को अनुसंधान कार्य के लिए एडमिशन देना होगा। रिसर्च फंड प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रारूप में शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करना। इनका मूल्यांकन और चयन डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन की अनुसंधान मूल्यांकन समिति करेगी। सरकार के लिए एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा। एक डेडीकेटेड और अलग वेबसाइट तैयार की जाएगी। इस पर सभी शोध परिणाम और गतिविधियां नियमित रूप से अपलोड की जाएंगी। इस वेबसाइट का लिंक विश्वविद्यालय/संस्थान की वेबसाइट के माध्यम से डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन की वेबसाइट से भी जोड़ा जाएगा।
वंचित वर्ग के अतीत और वर्तमान पर होंगे शोध
वंचित वर्गों के अतीत और वर्तमान पर शोध होंगे। व्याख्यान, संगोष्ठी, सेमिनार, कार्यशालाएं कराईं जाएंगी। चेयर में न्यूनतम पांच पीएचडी शोधार्थियों को अनुसंधान कार्य के लिए एडमिशन देना होगा। रिसर्च फंड प्राप्त करने के लिए निर्धारित प्रारूप में शोध प्रस्ताव प्रस्तुत करना। इनका मूल्यांकन और चयन डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन की अनुसंधान मूल्यांकन समिति करेगी। सरकार के लिए एक थिंक टैंक के रूप में कार्य करेगा। एक डेडीकेटेड और अलग वेबसाइट तैयार की जाएगी। इस पर सभी शोध परिणाम और गतिविधियां नियमित रूप से अपलोड की जाएंगी। इस वेबसाइट का लिंक विश्वविद्यालय/संस्थान की वेबसाइट के माध्यम से डॉ. आंबेडकर फाउंडेशन की वेबसाइट से भी जोड़ा जाएगा।