Amar Ujala Samvad: डॉक्टर्स बोले- एआई से वक्त बच रहा है लेकिन इससे पूछकर दवा खाना खतरनाक, दी कई जानकारियां
Varanasi News: अमर उजाला वाराणसी कार्यालय में आयोजित संवाद कार्यक्रम में बीएचयू के चिकित्सकों ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) मरीजों की हिस्ट्री का विश्लेषण करने और त्वरित निर्णय लेने में सहायक साबित हो रहा है। इससे समय की बचत हो रही है, लेकिन केवल एआई की सलाह पर दवा लेना खतरनाक हो सकता है। डॉक्टर की सलाह आवश्यक है।
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Varanasi News: एआई के मेडिकल साइंस में इस्तेमाल से डॉक्टर्स का वक्त बच रहा है। उन्हें जल्दी फैसले लेने में और मरीज की हिस्ट्री का एनॉलिसिस करने में मदद मिल रही है। लेकिन वहीं इससे जुड़े खतरे भी हैं। क्योंकि अगर सही प्रॉम्प्ट नहीं दिया तो एआई गलत इलाज बता सकता है। ऐसे में काशी के चार अलग अलग विशेषज्ञ डॉक्टर्स ने अमर उजाला में मेडिकल साइंस और एआई पर संवाद किया।
सिर्फ एआई से इलाज नहीं कर सकते, कंट्रोल करना जरूरी
आई सबसे ज्यादा आसान कर देता है डायग्नोसिस। वो ड्रग डेवलपमेंट और मेडिकल रिसर्च में भी काफी मजबूत टूल है। कैंसर के इलाज की बात हो तो वो बता देता है कि कैंसर में कैसे बदलाव आ रहे हैं। इस पर डेवलपमेंट से जुड़ी कई कॉन्फ्रेंस हो चुकी है। एआई में इमोशंस की कमी है। सिर्फ एआई से इलाज नहीं कर सकते, उसे इंसानी दिमाग से कंट्रोल करना भी जरूरी है। बीएचयू में हॉस्पिटल इंफो सिस्टम के लिए हम एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। - प्रो. एसएन संखवार, निदेशक, आईएमएस बीएचयू
एआई को-पायलट, ऑटो पायलट की तरह नहीं
आई इमरजेंसी और क्रिटिकल केयर के वक्त इलाज में ज्यादा मदद कर सकता है। ट्रॉमा के वक्त जब टाइम इज टिशू, मतलब हर सेकंड अहम है तब एआई डॉक्टर को पेशेंट की दिक्कत समझने में आसानी पैदा करेगा। एआई के जरिये जल्दी फैसला लेने से कई बार जिंदगीभर की दिक्कत से मरीज को बचाया जा सकता है। बीएचयू को या इस तरह के बड़े अस्पतालों को कमांड सेंटर की तरह काम करना चाहिए और उससे जुड़े पीएचसी, सीएचसी को एआई से जोड़ना चाहिए। - प्रो. विक्रम गुप्ता, एनेस्थिसिया, आइएमस, बीएचयू
एआई बेस्ड मशीनों ने डॉक्टर के काम को आसान किया
यनकोलॉजी में आइवीएफ केस के लिए एआई ये डिटेक्ट कर बता देता है कि कौन सा एम्ब्रियो ट्रांसप्लांट करना है। प्री जेनेटिंग टेस्टिंग में काफी मदद करता है। लेट प्रेगनेंसी में क्या रिस्क है ये मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री देखकर पता कर लेता है इसलिए एआई मेडिकल साइंस में रिस्क मैनेजमेंट में काफी सहायक है। इसके अलावा एआई बेस्ड जो मशीनें आ रही हैं उन्होंने डॉक्टर के काम को आसान किया है। - डॉक्टर ममता, स्त्री रोग विशेषज्ञ, बीएचयू
एआई केवल उपकरण है, चिकित्सक का विकल्प नहींं
आई केवल उपकरण है, चिकित्सक का विकल्प नहींं है। डेंटिस्ट में टेढ़ा मेढ़ा काम पेशेंट को समझाना होता है। ऐसे में एआई की मदद से आप रिजल्ट क्या होगा ये आसानी से दिखा सकते हैं। एआई जो मूवमेंट दांतों का बनाकर देता है, वो 90 प्रतिशत सही होता है। पहले के जमाने में पुट्टी से मिक्स बनाकर सांचा तैयार करना होता था। अब कुछ सेकंड में एआई सब बना देता है। - डॉ अमर अनुपम, सचिव, इंडियन डेंटल एसोसिएशन