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अमर उजाला पड़तालः वाराणसी आरटीओ में दलाल हावी, बिना सुविधा शुल्क काम कराना मुश्किल

Fri, 18 Dec 2020 10:54 AM IST
विचित्र सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: विचित्र सिंह Updated Fri, 18 Dec 2020 10:54 AM IST
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Amar Ujala live investigation brokers dominate in Varanasi RTO difficult to work without facility fee
वाराणसी आरटीओ में लगी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

शासन और प्रशासन भले ही संभागीय परिवहन कार्यालय में कामकाज के सुधार को लेकर लाख प्रयास कर रहा हो, मगर वहां जमे लोग व्यवस्था बदलाव के सभी प्रयास असफल कर रहे हैं। कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर ही दर्जनों की संख्या में अवैध वेंडर जमे हैं और कार्यालय में प्रवेश करने वालों को बाहर ही दबोच लेते हैं। उधर, कार्यालय में लंबी लंबी कतारों का भय दिखाकर उनसे मोटी वसूली भी की जा रही है। कार्यालय में तैनात बाबुओं की अपने पटल से गैरमौजूदगी दलालों के हौसले बढ़ाती है। कारण, बिना सुविधा शुल्क के एक भी फाइल आगे नहीं बढ़ रही है।

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परिवहन कार्यालय में वाहन पंजीकरण पटल पर सबसे ज्यादा भीड़ थी। कुर्सी पर लिपिक बैठे हुए थे और चार-पांच बाहरी लोग पंजीकरण के लिए आने वाली फाइलों की जांच कर रहे थे। पटलों में अंदर मौजूद भीड़ को लेकर स्थिति साफ नहीं थी, मगर आवेदक खिड़की के बाहर थे और अंदर वाले कर्मचारी नहीं थे।

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अमर उजाला पड़ताल

  • हरहुआ स्थित संभागीय परिवहन कार्यालय में बृहस्पतिवार को प्रवेश करने से पहले दर्जनों लोगों ने घेर लिया। हर किसी का एक ही सवाल था कि क्या काम है। जैसे ही उन्हें जानकारी हुई कि ट्रक का फिटनेस करना है तो काम कराने को लेकर मोलभाव शुरू कर दिया।
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  • ड्राइविंग लाइसेंस के आवेदनों को जांच करने वाले पटल-1 स्क्रूटनिंग पर लंबी कतार लगी थी। अंदर लिपिक गायब था। बाहर दलाल अभ्यर्थियों को सुविधा शुल्क के जरिए काम सुलभ करने का वादा कर रहे थे। ज्यादातर कमरों में अधिकारी ही मौजूद नहीं थे।
  • आरटीओ के कमरे में छत पर फाइलों के सैकड़ों बंडल फेंके गए थे। गलियारे में ही बेतरतीब फाइलें पड़ी हुईं थीं। कार्यालय में बाहर से ज्यादा भीड़ अंदर कमरों में थी।

 

वाराणसी आरटीओ में छत पर पड़ी फाइलें।वाराणसी आरटीओ में छत पर पड़ी फाइलें।

 

कार्यालय में न जांच, न अफसर
कार्यालय में लिपिकों की मनमानी को लेकर किसी तरह की निगरानी नहीं थी। एआरटीओ प्रशासन और आरटीओ भी कार्यालय में नहीं मिले। हालांकि आरटीओ ने बताया कि एक जरूरी बैठक में शामिल होने के लिए अभी निकला हूं। मगर लिपिकों के कामकाज की निगरानी नहीं होने से अव्यवस्था हावी थी।

आरटीओ हरिशंकर सिंह से सवाल-जवाब

पटलों पर बाबू नदारद क्यों रहते हैं?

  • समस्या यह है कि एक एक बाबुओं के पास दो-तीन पटल का काम है। कई लोगों का तबादला हो गया और कई पद रिक्त हैं।

दलालों पर नियंत्रण के लिए क्या प्रयास करते हैं?

  • कार्यालय आने वाले लोगों को सीधे काम कराने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। ज्यादातर आवेदन ऑनलाइन हो गए हैं। हम भी दलालों की धरपकड़ का अभियान चलाते हैं। लोग भी जागरूक रहे और नियमानुसार काम कराएं।

छतों पर पड़ी फाइलें कैसी हैं?

  • फाइलें पुरानी है और नष्ट करने वाली हैं। इसकी प्रक्रिया की जा रही है।

लिपिकों के काम की निगरानी क्यों नहीं करते?

  • निगरानी होती है, कार्यालय में औचक निरीक्षण कर व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त किया जाता है। आज जरूरी बैठक में निकल गया था। सबसे जवाब तलब करूंगा। 

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