अमर उजाला अभियान शिक्षा: तनाव प्रबंधन के साथ स्कूल को किया हरा-भरा, लॉकडाउन में विद्यालय की बदल गई सूरत
वाराणसी के जक्खिनी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज को कोरोना संक्रमण काल में पठन-पाठन के लिए प्रयुक्त होने वाली कक्षाओं, प्रायोगिक कक्षों की मरम्मत और रंग-रोगन करा लिया गया। ताकि कोरोना की समाप्ति पर जब बच्चे विद्यालय में आएं तो उन्हें परिसर बदला हुआ लगे।
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कोरोना संक्रमण काल ने शिक्षा व्यवस्था में ढेर सारे बदलाव किए। आंतरिक और बाहरी बदलाव ने शिक्षक, अभिभावक और छात्रों को नई दिशा भी दिखाई। संक्रमण काल में बंद होने से विद्यालय की साज-सज्जा को बेहतर करने का अवसर मिला। वहीं, विद्यार्थियों के लिए सुरुचिपूर्ण पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए प्रधानाचार्य व शिक्षकों को मंथन करने का मौका मिला।
वाराणसी के जक्खिनी स्थित राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामाश्रय शुक्ला का कहना है कि संक्रमण काल में पूरे विद्यालय परिसर, पठन-पाठन के लिए प्रयुक्त होने वाली कक्षाओं, प्रायोगिक कक्षों की मरम्मत और रंग-रोगन करा लिया गया। ताकि कोरोना की समाप्ति पर जब बच्चे विद्यालय में आएं तो उन्हें परिसर बदला हुआ लगे। चारों तरफ हरियाली का विशेष ध्यान रखा गया।
पंचवटी के पौधे लगाए गए। पुष्प वाटिका भी सजाई गई। बताया कि विद्यालय को हरा-भरा करने तथा छात्रों को अधिकाधिक प्रवेश दिलाने के लिए क्षेत्रीय लोगों ने भी सहयोग किया। शहंशाहपुर निवासी अवकाश प्राप्त शिक्षक हरी प्रसाद सिंह ने एक दर्जन आम के पौधे विद्यालय को प्रदान किए। ग्राम प्रधान तथा गणमान्य लोगों ने संक्रमण के दौरान लोगों को राजकीय विद्यालय में पढ़ने के लिए प्रेरित किया। इससे नामांकन में बढ़ोतरी हुई।
तनाव कम करने का किया प्रयास
स्कूल खुलने के बाद छात्रों का तनाव कम करने के लिए प्रार्थना सभा में कई तरह के प्रयोग किए जाते रहे। योग, संगीत के साथ प्रार्थना और अन्य गतिविधियों को शामिल किया गया। विद्यालय के महत्वपूर्ण आयोजनों में भी ऑनलाइन और ऑफलाइन में सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया। संक्रमण काल में ऑनलाइन शिक्षण भी जारी रहा।
बच्चों ने कोरोना काल में खुद को किया मजबूत
डॉ. रामाश्रय बताते हैं कि उन्होंने शिक्षकों के साथ छात्रों की परिचर्चा करा कर यह जानने का प्रयास किया कि कोरोना से लगातार छुट्टियों और समाज में घटनाओं से बच्चे अवसाद में तो नहीं आए, लेकिन जानकर आश्चर्य हुआ कि बच्चे कोरोना से बचने के उपाय न सिर्फ अपनाते थे बल्कि अन्य ग्रामीणों को भी प्रेरित करते थे।
बच्चों ने बताया कि वह बड़े होकर वैज्ञानिक, चिकित्सक बन कर कोरोना की भयावहता को दूर करेंगे। इससे स्पष्ट हुआ कि बच्चे कोरोना से डरे नहीं बल्कि उस चुनौती का सामना करने के लिए आपदा में अवसर ढूंढते रहे।
कृषि विभाग ने धरातल पर उतारा प्रयोग
राजकीय इंटर कॉलेज में कृषि विभाग ने अपने प्रायोगिक कार्य को धरातल पर उतारा। इससे छात्रों में पढ़ाई के साथ प्रयोग में भी रुचि जगी। छात्रों ने न सिर्फ विभिन्न प्रकार की सब्जियों को परिसर में लगाया बल्कि उससे अधिक ऑर्गेनिक उत्पादन भी प्राप्त किया। कृषि शिक्षक राजेश कुमार राय के निर्देशन में बच्चों ने तरह-तरह की सब्जियां उगाईं और उसके उत्पादन और प्रायोगिक विधि को फील्ड में सीखा।