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अमर उजाला शिक्षा अभियान: कोराना काल में ऑनलाइन पढ़ाई ने बिगाड़ीं आदतें, कक्षाओं में अब मन नहीं लगा रहे छात्र

Wed, 30 Mar 2022 09:48 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी Published by: उत्पल कांत Updated Wed, 30 Mar 2022 09:48 AM IST
सार

कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का नकारात्मक पक्ष यह रहा कि इससे स्कूली बच्चों की आदतें भी बिगड़ने लगीं। नतीजतन, अब स्कूल खुलने के बाद कई विद्यार्थियों में पहले वाला भाव नजर नहीं आ रहा है। 

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Amar Ujala Abhiyan Education Health Online studies spoiled habits during Corona Crisis now students are no longer interested in classes
वाराणसी के स्कूलों में ऑफलाइन कक्षाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कोरोना संक्रमण काल में शैक्षणिक संस्थान बंद थे, ऐसे में प्रश्न उठा कि बच्चों की पढ़ाई कैसे हो? इस पर मंथन हुआ तो ऑनलाइन का विकल्प मिला। इससे जहां शिक्षण प्रणाली बदल गई, वहीं शिक्षक से लेकर विद्यार्थी तक हाईटेक हो गए। लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह रहा कि इससे बच्चों की आदतें भी बिगड़ने लगीं।

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नतीजतन, अब स्कूल खुलने के बाद कई विद्यार्थियों में पहले वाला भाव नजर नहीं आ रहा है। कुछ तो विद्यालय में जाने से कतरा रहे हैं और इसके कारण अभिभावकों ने उनका स्कूल ही बदल दिया।  कोरोना काल में करीब दो साल घर पर रहने वाले बच्चे अब कक्षाओं में पढ़ाई से जी चुराने लगे हैं। वहीं, बच्चों के इस व्यवहार से शिक्षक और अभिभावक दोनों चिंतित हैं।

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ऑफलाइन कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति कम

बच्चों का पढ़ाई के प्रति रुझान कम होने से ऑनलाइन और फिर ऑफलाइन कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति कम हो रही है। कंपोजिट विद्यालय केशरीपुर के प्रधानाध्यापक राजेश त्रिपाठी का कहना है कि दो साल में कोविड के कारण प्रभावित हुई शिक्षा को पटरी पर लाने में वक्त लगेगा।

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बच्चों का मन पढ़ाई से हट गया है और उनकी कक्षा में लंबे समय तक अनुशासन के साथ बैठने की आदत समाप्त हो गई है। इससे बहुत समस्या बच्चों को पढ़ाने में आ रही है। मोबाइल से पढ़ने की आदत ने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। किसी भी प्रश्न को पूछने पर अब छात्र-छात्राएं गूगल का सहारा लेने लग गए हैं।

 

क्या बोले छात्र

कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई का विकल्प तो बेहतर मिला। लेकिन ऑफलाइन कक्षाएं शुरू हुई तो दो सालों की ऑनलाइन कक्षाओं के कारण बच्चों को पुराने ढर्रे पर लाने में काफी मेहनत करनी पड़ रही है।
- पीयूष दुबे, बाल विद्यालय सीनियर सेकें डरी स्कूल, पड़ाव

कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई से कोर्स तो किसी तरह पूरा हो गया, लेकिन सीखने के नाम पर कुछ खास नहीं मिला। अब नियमित कक्षाओं में उन्हें कई गतिविधियों से जोड़क र पढ़ाया जा रहा है।- कविता बसाक, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय कोटवां

ऑनलाइन क्लास के लिए अभिभावकों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ा। दो या फिर अधिक बच्चे होने के कारण परिवार में सभी को एक साथ क्लास करवाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कोविड में सबसे ज्यादा परेशानी अभिभावकों को ही हुई।
- गजानन विश्वकर्मा, केशरीपुर

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