अमर उजाला शिक्षा अभियान: भूदान की भूमि से फैल रहा शिक्षा का उजियारा, बभनियांव गांव में बना विद्यालय
वाराणसी शहर से 25 किलोमीटर दूर राजातालाब क्षेत्र के बभनियांव गांव में स्थित सरकारी विद्यालय ने अपनी अलग जगह बनाई है। पहले प्राथमिक फिर उच्च प्राथमिक विद्यालय के जरिए यह विद्यालय विद्यादान के लिए जाना जाता है।
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वाराणसी शहर से 25 किलोमीटर दूर राजातालाब क्षेत्र के बभनियांव गांव में स्थित सरकारी विद्यालय ने अपनी अलग जगह बनाई है। पहले प्राथमिक फिर उच्च प्राथमिक विद्यालय के जरिए यह विद्यालय विद्यादान के लिए जाना जाता है। विनोबा भावे के अभियान के तहत भूदान में मिली चार बीघे जमीन में बने जूनियर हाईस्कूल में 13 कमरे हैं। ग्रामीण इसे भूदान समिति के विद्या दानी स्कूल के नाम से भी पुकारते हैं।
विद्यालय को संवारने में ग्राम प्रधान रत्नेश कुमार सिंह का भी काफी अहम योगदान है। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय के 13 कमरों में टाइल्स लगवाने के साथ ही विद्यालय परिसर को हरा-भरा बनाने के लिए हरित उपवन तैयार किया है। किचन गार्डन के साथ ही औषधीय पौधे व सजावटी व फूलदार पौधे लगाए गए हैं। कक्षाओं की बाहरी व भीतरी दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी कराई गई है।
वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक राजेंद्र कुमार सिंह व अध्यापक सुनील कुमार सिंह ने विद्यालय को संवारने में सहयोग दिया है, जिससे आज यह विद्यालय एक अलग पहचान बना सका है। विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों के लिए जल्द ही डेस्क व बेंच की भी व्यवस्था भी हो जाएगी। इसके लिए गांव के संभ्रांत लोगों व सामाजिक संस्थाओं ने हामी भरी है।
एक लाख की एफडी से बच्चों को मिलती है छात्रवृत्ति
गांव के निवासी व विद्यालय के पूर्व छात्र यशोवर्धन सिंह ने बच्चों के लिए विद्यालय में आरो वॉटर प्लांट लगवाने के साथ ही एक लाख रुपये की राशि प्रदान की है। यह राशि बैंक में एफडी कराई गई है। इस पर मिलने वाले ब्याज से बच्चों को हर साल छात्रवृत्ति प्रदान करने के साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताओं के पुरस्कार दिए जाते हैं।
ग्रामीणों ने की हाईस्कूल बनाने की मांग
ग्राम प्रधान सुशीला देवी ने बताया कि ग्रामीणों की मांग है कि जूनियर हाईस्कूल को इंटर कॉलेज के रूप में परिवर्तित कर दिया जाए। इससे बभनियांव सहित महावन, कृष्णदत्तपुर, ढढोरपुर, गाजपुर, मूंगवार, पनियरा, राजापुर, बहोरनपुर, नियेसीपुर के छात्र-छात्राएं शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे। ग्रामीण इसके लिए अभियान भी चला रहे हैं, जिसके तहत वे शिक्षा विभाग के अधिकारियों व प्रदेश के शिक्षा मंत्री से भी गुहार लगा चुके हैं।