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Varanasi News: अमन कबीर ने बनाई अपनी संस्था, किशोरी को उसकी दीदी से मिलाया; पिता को देख छलके बेटे के आंसू

Sun, 25 May 2025 03:56 PM IST
अमन विश्वकर्मा अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी। Published by: अमन विश्वकर्मा Updated Sun, 25 May 2025 03:56 PM IST
सार

वाराणसी के समाजसेवी अमन कबीर बिछड़ों को परिवार से मिलाने का काम कर रहे हैं। इसके साथ ही वे उनके लोगों की भी मदद करते हैं, जिनके पास अपनों का अंतिम संस्कार और दवा करने के भी पैसे नहीं होते। अब अमन कबीर सेवा न्यास के माध्यम से लोगों की सेवाएं की जाएंगी।

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Aman Kabir formed his own organization in varanasi reunited teenager with sister son meet his father
बिछड़ों को अपनों से मिलाकर खिल उठते हैं अमन। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वाराणसी में समाजसेवक अमन कबीर ने अब अपने कार्यों को और बढ़ाएंगे। इसके लिए उन्होंने अमन कबीर सेवा न्यास का गठन कर लिया है। बीते दो दिन पहले उनके पास पहले बार ऐसा केस आया जब एक बच्ची अपनी दीदी की डांट से नाराज होकर कहीं चली गई थी।

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सुबह करीब सात बजे सिगरा स्थित साजन सिनेमा के पास से कुछ लोगों ने अमन को फोन किया। माैके पर पहुंचे अमन ने सोशल मीडिया का उपयोग कर 13 साल की किशोरी के परिवार को सूचना देकर बुलाया। यहां पहुंची उसकी दीदी और जीजा ने बताया कि किशोरी की मां का देहांत हो जाने पर यह हमारे ही घर रह रही थी।
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शनिवार को इसे डांट दिया तो आज यह नाराज होकर यहां चली आई। हम भी इसे खोज ही रहे थे कि आपका फोन आ गया। महमूरगंज में किराए पर रहने वाला परिवार और उस किशोरी को अमन ने समझाया। किशोरी भी परिवार के साथ जाने को राजी हो गई।
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इसके पहले जयप्रकाश नगर के एक गरीब परिवार के पास इतने रुपये नहीं थे कि वह अपने पिता का अंतिम संस्कार कर सके। अमन कबीर सेवा न्यास के माध्यम से हरिशचंद्र घाट पर मृतक का अंतिम संस्कार किया गया।

अपनों को देख छलके आंसू

Aman Kabir formed his own organization in varanasi reunited teenager with sister son meet his father
मिलने के बाद अमन का आभार जताते हैं परिजन। - फोटो : अमर उजाला

Aman Kabir Varanasi: बिहार के कैमूर जिले के रहने वाले बचनू राम बीते 17 दिन से लापता थे। बनारस के मंडलीय असप्ताल में वे भर्ती थे। अमन कबीर ने इनके भी परिवार को ढूंढ निकाला। घटाव गांव के लालबाबू राम अपने पिता के मिलने की सूचना पर काशी पहुंच गया। उसने बताया कि हम लोग उम्मीद खो चुके थे। पिताजी एक शादी समारोह में शामिल होने के लिए घर से निकले थे। वे यहां कैसे पहुंच गए कुछ नहीं पता।

इसी कड़ी में बिहार के औरंगाबाद ने गोरेलाल अपनी नाै महीन की बेटी के साथ किसी काम से गोरखपुर जा रहा था। अलईपुर स्थित सिटी स्टेशन पर बेहोश होने के बाद वह अपनी बेटी से बिछुड़ गया। पुलिस ने उसका उपचार कराया और उसकी बेटी को चाइल्ड लाइन में दे दिया गया। गोरेलाल जब होश में आया तो वह अपनी बेटी को खोजने लगा। दो दिन बाद वह अपनी बेटी से मिला, जिसका उपचार कराया जा रहा है।

वहीं, कैंट स्टेशन के सामने एक होटल में काम करने वाला 37 वर्षीय संजय पेट की समस्या से बचपन से परेशान था। एक सप्ताह पहले उसकी हालत काफी गंभीर हो गई। उसके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह अपना इलाज करवा सके। इसी जानकारी मिलने पर अमन ने संजय को मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डाॅक्टरों ने बिना समय गंवाए उसकी बीमारी का इलाज किया।

डाॅक्टरों ने बताया कि संजय की पेट में पानी भर गया था, जो जहर की तरह अन्य हिस्सों में भी फैल रहा था। कुछ दिन बाद यह और गंभीर समस्या हो जाती, जिससे उसकी माैत भी हो सकती थी। 

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