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सुर गंगा संगीत महोत्सवः अल्ताफ रजा के गानों पर झूमा पूरा बनारस

Wed, 17 May 2017 10:38 AM IST
टीम डिजिटल,वाराणसी
टीम डिजिटल,वाराणसी Updated Wed, 17 May 2017 10:38 AM IST
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altaf raja performance at sur ganga music festival
अल्ताफ रजा - फोटो : अमर उजाला
सड़कों -गलियों में अक्सर गूंजने वाले गीत -तुम तो ठहरे परदेसी साथ क्या निभाओगे... के बोल जब मंगलवार की रात टाउनहाल के मैदान में गूंजे तो हर हर महादेव के जयघोष के साथ तालियों की बौछार होने लगी।
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मंच पर एक ओर पार्श्व गायक अल्ताफ  रजा थे तो दूसरी ओर खचाखच भीड़ से भरी दीर्घा में उनके साथ सुर लगाने और थिरकने वाले बेताव युवक-युवतियां। मंगलवार की रात सुर गंगा संगीत महोत्सव की कव्वाली निशा कुछ ऐसे ही भावों के साथ जवान हुई।
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यूनेस्को के क्रिएटिव सिटीज नेटवर्क, नगर निगम और सामाजिक संस्था पहल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सुरगंगा संगीत महोत्सव की 29 वीं निशा प्रख्यात कौव्वाल चांद पुतली को समर्पित थी। रात ढलती गई और अल्ताफ रजा के सुरों का रंग गाढ़ा होता गया।
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आवारा हवा का झोंका हूं... के बाद इश्क और प्यार का मजा लीजिए...पहले तो कभी -कभी गम था...तुमसे कितना प्यार है...पंगा ले लिया...दोनो ही मोहब्बत के जज्बात में जलते हैं... जैसे अल्ताफ के गीतों पर टाउनहाल का मैदान का हर कोना भाव विभोर हो उठा।

इससे पहले अवतरण ग्रुप ने -बालम तुम तो हो गए गुलरी के फुलवा...से कौव्वाली निशा को आगे बढ़ाया। श्वेता, रीतिका, आकांक्षा, मनोहर, एकांश ने इसमें भागीदारी की। इनके बाद कव्वाली गायक अनवर साबरी ने प्रस्तुति दी।

उन्होंने कव्वाली गीत -नाते रसूल और उसके बाद गजल -आदमी से डरते है..पेश कर वाहवाही बटोरी। वारिस अजमत एवं शहाबुद्दीन वारसी ने भी कव्वाली प्रस्तुत की। विशाल ने कव्वाली -उपर खुदा आसमा नीचे जहान...के बाद जय प्रकाश ने -अपने मां बाप का दिल ना दुखा...जैसे गीत पेश किए।

आबिद जमाल एवं उनकी टीम ने थीम सांग पेश किया। संचालन ओजस्वी शर्मा, अपूर्वा श्रीवास्तव, नेहा गुप्ता, उत्कर्ष सहस्त्रबुद्धे ने संयुक्त रूप से किया।

बनारस सुरों का खुशनुमा शहर, कलाकारों का तीर्थ

altaf raja performance at sur ganga music festival
अल्ताफ रजा - फोटो : अमर उजाला
तुम तो ठहरे परदेशी साथ क्या निभाओगे...जैसे गीतों से लोकप्रिय हुए पार्श्व गायक अल्ताफ रजा पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में सुर नहीं लगाना चाहते। वजह है सरहद पर तनावपूर्ण माहौल। वह कहते हैं कि इस माहौल में तो पाकिस्तान जाकर प्रस्तुति देने का सवाल ही नहीं उठता।

जहां हमारे देश के जवानों के साथ बर्बरता की हद की जाती हो, वहां कदम रखने का सवाल नहीं पैदा होता। टाउनहाल के मैदान में मंगलवार की रात सुरगंगा संगीत महोत्सव में प्रस्तुति से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत मे यह जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि हम खुले दिल का परिचय देकर सबको अवसर देते हैं। वह पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में मिल रहे बड़े अवसरों की भी चर्चा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सुर गंगा संगीत महोत्सव एक बड़ी उपलब्धि है। काशी के नाम एक विश्व रिकार्ड बन रहा है।

यह बाबा विश्वनाथ और गंगा की नगरी होने के साथ ही सुरों का शहर है। कला साधकों का तीर्थ है। इस धरती को नमन करने का मौका मिलना ही बहुत नसीब की बात है। पहली बार काशी आकर बहुत सुकून मिला। कुछ देर में ही ढे़र सारी ऐसी यादें जुड़ गई हैं जो हमेशा मेरे साथ रहेंगी।
 
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