आरोप: राजातालाब तहसील में 10 दिन के अंदर 4000 मुकदमे हुए खारिज, 70 से 80 जजों के पद; तैनाती सिर्फ 35 से 40 की
अधिवक्ताओं ने अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में न्यायिक प्रणाली पर भी सवाल उठाए। कहा कि अधिकारी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं। जजों की कमी के कारण भी मामले अटके पड़े हैं।
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Varanasi News: राजातालाब तहसील में बंटवारे या धारा 24 के मामले मनमाने तरीके निपटाए जा रहे हैं। 10 दिन में ही 4000 मुकदमे खारिज कर दिए गए। यह कहना है अधिवक्ता सुधीर कुमार सिंह का। वह अमर उजाला की तरफ से शनिवार को चांदपुर स्थित कार्यालय में संवाद के दाैरान अपनी बात रख रहे थे।
अधिवक्ता नित्यानंद राय ने कहा कि जिले में 70 से 80 जजों के पद हैं। इनमें से सिर्फ 35 से 40 की ही तैनाती है। ऐसे में अपराध के अलावा सिविल के मामले लंबित रह जाते हैं। अधिवक्ता सुनील मिश्रा ने कहा कि अदालतों में फाइल रोके जाने से समस्या होती है लेकिन लोग दोष सिर्फ अधिवक्ताओं को देते हैं।
अधिवक्ता धीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी पक्षपात करते हैं। शिकायतों पर सुनवाई नहीं होती है। अखिलेश ने कहा कि हमारा समाज हाशिये पर है। रविंद्र यादव ने कहा कि सदर तहसील में भ्रष्टाचार चरम पर है। मामले मनमाने तरीके से निस्तारित हो रहे हैं।
अधिवक्ताओं ने लगाए कई आरोप
कृष्णा पटेल ने कहा कि अधिकारी बिना न्यायिक प्रक्रिया अपनाए ही आदेश कर रहे हैं। बाहरी कर्मियों से काम कराया जा रहा है। सरबजीत भारद्वाज ने कहा कि राजातालाब तहसील के नक्शे में विश्रामालय था लेकिन इसका निर्माण नहीं कराया गया।
दीपक राय कान्हा ने कहा कि अधिवक्ताओं को सिर्फ सम्मान चाहिए जो मिलना चाहिए। जावेद ने कहा कि पिंडरा तहसील में लंबे समय से सब रजिस्ट्रार नहीं हैं। जवाहर लाल ने कहा कि पिंडरा तहसील में नकल रूम बने। नकल लेने के लिए शहर आना पड़ता है। जिसकी वजह से जेब पर भी बोझ पड़ता है।
प्रेम प्रकाश मिश्रा ने कहा कि हमारी जो भी मांगें हैं वह आमजन से जुड़ी हैं। ऐसे में शासन को ध्यान देकर इसका समाधान कराना चाहिए। इससे अधिवक्ताओं के साथ-साथ आम जनता को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अमृत सिंह ने कहा कि राजातालाब तहसील में रजिस्ट्री कार्यालय नहीं बना है। जिसकी वजह से लोगों को काफी फजीहत उठानी पड़ती है।