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विश्वविद्यालयों में क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम लागू करने की तैयारी

अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी Updated Sat, 04 Apr 2015 02:28 AM IST
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वाराणसी। शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के उद्देश्य से आगामी सत्र से विश्वविद्यालयों में क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम (सीबीसीएस) लागू करने की तैयारी है। इसके तहत विद्यार्थियों की ओवरआल रैंकिंग हो सकेगी। एक घंटे की क्लास अटेंड करने पर स्टूडेंट को एक प्वाइंट हासिल होगा। शुक्रवार को बीएचयू में आयोजित कार्यशाला में यूजीसी के चेयरमैन और विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के केंद्रीय, राज्य, डीम्ड एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से इस योजना पर चर्चा की। 
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यूजीसी के वाइस चेयरमैन प्रो. एच देवराज ने बताया कि क्रेडिट बेस्ड च्चाइस सिस्टम से छात्रों की ओवरआल रैंकिंग की जा सकेगी। एक घंटे की क्लास अटेंड करने पर स्टूडेंट को एक प्वाइंट हासिल होगा। इससे विद्यार्थी क्लास में रुचि लेंगे। जाहिर है इससे शिक्षा का स्तर बढ़ेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस व्यवस्था को किसी पर थोपा नहीं जा रहा है। इसमें परिवर्तन करने को आप विश्वविद्यालय स्वतंत्र हैं। कुलपति प्रो. जीसी त्रिपाठी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के व्यक्तित्व विकास के लिए समग्र शिक्षा एवं अंतरविषयी


शिक्षा प्रणाली को उपयोग में लाना जरूरी है। इसलिए सीबीसीएस को लागू किया जाना चाहिए। कुलसचिव डॉ. केपी उपाध्याय ने कार्यशाला की रूपरेखा रखी। कार्यशाला में बीएचयू के संस्थानों के निदेशक, संकाय प्रमुख एवं विभागाध्यक्षों ने भी हिस्सा लिया। संचालन प्रो. पद्मिनी रविंद्रनाथ ने किया। यूजीसी के संयुक्त सचिव केपी सिंह, प्रो. वीके कौल, प्रो. रमेश शर्मा, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कौंसिल के मोहन रेड्डी, एमएचआरडी के डिप्टी एजूकेशनल एडवाइजर डॉ. डीके पालीवाल, डिप्टी सेक्रेट्री सूरत सिंह आदि मौजूद रहे।
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कई कुलपतियों ने जताई असहमति
वाराणसी। क्रेडिट बेस्ड च्वाइस सिस्टम लागू करने पर कई कुलपतियों ने असहमति जताई। साथ ही इससे होने वाली परेशानियां भी गिनाईं। गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने कहा कि अब तक सारे विश्वविद्यालयों में सेमेस्टर सिस्टम ही लागू नहीं हुआ है। ऐसे में आगामी सत्र से इस व्यवस्था को कैसे लागू किया जा सकता है।पूर्वांचल यूनिवर्सिटी के वीसी प्रो. पीयूष रंजन अग्रवाल और  बीएचयू के शिक्षा संकाय के डीन प्रो. एचसीएस राठौर का कहना था कि विश्वविद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों का मानक तय नहीं है। ऐसे में इस व्यवस्था को लागू करने में दिक्कत आएगी।
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क्या है सीबीसीएस
च्वाइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम के तहत विद्यार्थी अपनी अभिरुचि के अनुसार विषय की पढ़ाई कर सकते हैं। फाउंडेशन कोर्स में विद्यार्थियों को इंग्लिश लैंग्वेज, वैल्यू एजूकेशन और पर्सनालिटी डेवलपमेंट की भी शिक्षा दी जाएगी। इस व्यवस्था से पाठ्यक्रम में समग्रता और एकरूपता आएगी। यही नहीं इससे विद्यार्थियों को कालेज बदलने की भी सुविधा हो जाएगी।

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