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विंध्याचल की एसटीपी से गंगा में आ रहे शैवाल, रिपोर्ट तैयार

Fri, 11 Jun 2021 01:37 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 11 Jun 2021 01:37 AM IST
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Algae coming into the Ganges from Vindhyachal's STP, report ready
गंगा में हरे शैवाल विंध्याचल की एसटीपी से बहकर आ रहे हैं। इसका खुलासा पांच सदस्यीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में किया है। टीम शुक्रवार को जिलाधिकारी को रिपोर्ट सौंपेगी। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बताया कि जांच में पता चला है कि विंध्याचल में पुरानी तकनीक से बने एसटीपी से यह शैवाल बहकर वाराणसी आ रहे हैं। पिछले दिनों हुई बरसात में इनकी संख्या काफी ज्यादा थी। रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी और जिम्मेदारों पर कार्रवाई के लिए लिखा जाएगा। कहा कि जलस्तर कम होने और प्रवाह नहीं होने से शैवाल की समस्या गंभीर हो गई है। जलस्तर बढ़ने के साथ ही यह समस्या दूर हो जाएगी। पिछली बार भी मिर्जापुर के पास से लोहिया नदी से ये शैवाल गंगा में आए थे। शैवालों के कारण गंगा के इको सिस्टम पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की प्राथमिक जांच में भी यह बात सामने आई थी कि गंगाजल में नाइट्रोजन और फास्फोरस की मात्रा निर्धारित मानकों से ज्याद है।
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शैवाल से कम होता है पानी में ऑक्सीजन
बीएचयू में इंस्टीट्यूट आफ एनवायरमेंट एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट के वैज्ञानिक डॉ. कृपाराम ने बताया था कि जल में यूट्रोफिकेशन प्रक्रिया होने से हरे शैवाल बनते हैं। ऐसा तब होता है जब जल में न्यूट्रीएंट काफी बढ़ जाते हैं। इस कारण गैर जरूरी स्वस्थ जीवों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि होती है। ऐसे में शैवालों को प्रकाश संश्लेषण करने का सबसे उपयुक्त वातावरण मिलता है। तब पानी में ऑक्सीजन कम होने लगता है। इससे बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (बीओडी) सबसे पहले प्रभावित होती है।
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डीएम ने अधिकारियों को लगाई फटकार
वाराणसी। काशी में गंगा की खराब स्थिति ने शासन और प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, कागजों पर असि नाले को बंद करने की रिपोर्ट दी गई है, लेकिन हकीकत में अभी भी गंगा में असि नाले से सीवेज बहाया जा रहा है। जिलाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए जल निगम के अधिकारियों को फटकार भी लगाई। गंगा में गिर रहे नालों को जल्द से जल्द बंद करने के निर्देश दिए। ब्यूरो
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