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रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देने की जरूरत
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वाराणसी। बीएचयू में काशी मंथन की ओर से आयोजित विशेष व्याख्यान में रिटायर्ड वायु सेना अधिकारी एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने एयरोस्पेस के क्षेत्र में रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देने की बात कही। कहा कि हम सबको इस सवाल का जवाब भी तलाशना होगा कि जब हम अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की कर सकते हैं तो रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में क्यों पिछड़ रहे हैं।
कृषि विज्ञान संस्थान के कामधेनु सभागार में भारतीय क्षेत्र में सामरिक एवं वायु क्षेत्र में वास्तविकताएं विषय पर आयोजित व्याख्यान में एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने आजादी के बाद से सामरिक और वायुसैनिक रणनीतियों की विस्तार से चर्चा की। वायुसेना के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए कहा कि इसमें भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। कुल 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृति के बाद भी वायुसेना में केवल 30 स्क्वाड्रन ही बचे हैं। राफेल जैसे विमान के खरीदने का निर्णय 2000-2001 में लिया गया था। उसमें पहला विमान 2019 में आया, पूरी खेप आने में दो-तीन साल और लगने हैं। इस तरह की देरी वायुसेना की क्षमताओं को कम करती है और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को समझना चाहिए की उनकी राजनीति से सैन्य क्षमता किस हद तक प्रभावित होती है।
पाक-चीन से अधिक है भारत की क्षमता
पाकिस्तान व चीन के संदर्भ में भारत की वायुसैनिक क्षमताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि पहले भारत की पूरी सामरिक रणनीति पाकिस्तान को लेकर केंद्रित होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन से आ रही चुनौतियों के मद्देनजर भी रणनीति बनानी शुरू हो गई है। चीन ने भले ही रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में भारी निवेश किया हो लेकिन भारत की वायु सैनिक कौशल, क्षमता, सैन्य अनुभव अधिक है। जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी बढ़िया प्रदर्शन किया है। काशी मंथन के सचिव मयंक नारायण सिंह ने सवाल जवाब किया और छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह ने एयर मार्शल को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान संयोजक डॉ. पंकज सिंह, राज दूबे, चंद्राली मुखर्जी, बीरम चौरसिया, डॉ. सुमील तिवारी, डी. गांगुली, संतोष सिंह, कल्याण, अंशिका, रजित बघेल आदि मौजूद रहे।
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कृषि विज्ञान संस्थान के कामधेनु सभागार में भारतीय क्षेत्र में सामरिक एवं वायु क्षेत्र में वास्तविकताएं विषय पर आयोजित व्याख्यान में एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने आजादी के बाद से सामरिक और वायुसैनिक रणनीतियों की विस्तार से चर्चा की। वायुसेना के आधुनिकीकरण पर बात करते हुए कहा कि इसमें भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। कुल 42 स्क्वाड्रन की स्वीकृति के बाद भी वायुसेना में केवल 30 स्क्वाड्रन ही बचे हैं। राफेल जैसे विमान के खरीदने का निर्णय 2000-2001 में लिया गया था। उसमें पहला विमान 2019 में आया, पूरी खेप आने में दो-तीन साल और लगने हैं। इस तरह की देरी वायुसेना की क्षमताओं को कम करती है और इसके लिए सभी राजनीतिक दलों को समझना चाहिए की उनकी राजनीति से सैन्य क्षमता किस हद तक प्रभावित होती है।
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पाक-चीन से अधिक है भारत की क्षमता
पाकिस्तान व चीन के संदर्भ में भारत की वायुसैनिक क्षमताओं पर चर्चा करते हुए बताया कि पहले भारत की पूरी सामरिक रणनीति पाकिस्तान को लेकर केंद्रित होती थी, लेकिन पिछले कुछ सालों से चीन से आ रही चुनौतियों के मद्देनजर भी रणनीति बनानी शुरू हो गई है। चीन ने भले ही रक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में भारी निवेश किया हो लेकिन भारत की वायु सैनिक कौशल, क्षमता, सैन्य अनुभव अधिक है। जवानों ने विपरीत परिस्थितियों में भी बढ़िया प्रदर्शन किया है। काशी मंथन के सचिव मयंक नारायण सिंह ने सवाल जवाब किया और छात्र अधिष्ठाता प्रो. एमके सिंह ने एयर मार्शल को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया। इस दौरान संयोजक डॉ. पंकज सिंह, राज दूबे, चंद्राली मुखर्जी, बीरम चौरसिया, डॉ. सुमील तिवारी, डी. गांगुली, संतोष सिंह, कल्याण, अंशिका, रजित बघेल आदि मौजूद रहे।
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