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कार्पेट एक्सपो में कारोबारियों को लुभा रही ‘अहिंसा’ रेशम कालीन
जयेंद्र चतुर्वेदी,अमर उजाला,वाराणसी
Updated Thu, 12 Oct 2017 02:51 PM IST
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तिल के पेड़ की छाल और दुंबा की गर्दन के बाल से तैयार धागे की भी बिक्री
- फोटो : अमर उजाला
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अहिंसा पर संत-महात्माओं से इसके महत्व पर धर्मगुरुओं के प्रवचन तो हम सब आए दिन सुनते हैं। ‘अहिंसा परमो धर्म:’ पर हम अपने आसपास अमल होते भी देखते हैं। अब अहिंसा रेशम भी बाजार में आ गया हैं।
जी हां, अब अहिंसा सिल्क (रेशम) से कालीन और कपड़े तैयार होने लगे हैं। कार्पेट एक्सपो में लगे धागों के एकमात्र स्टाल पर पहली बार प्रदर्शित अहिंसा सिल्क लोगों को लुभा रहा है।
स्टाल संचालक विनीत राय बताते हैं कि रेशम के कीड़ों से सिल्क निकालने की इस नई प्रक्रिया में किसी कीड़े की मौत नहीं होती है। ककून को इस तरह धीरे-धीरे गर्म किया जाता है कि कीड़े बाहर आ जाते हैं और उन्हें सिल्क से जीवित अवस्था में ही अलग कर दिया जाता है।
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चूंकि इसमें इसमें कीड़ों की मौत नहीं होती है, इसीलिए इस प्रक्रिया से उत्पादित सिल्क और धागों को अहिंसा सिल्क का नाम दिया गया है। राय की मानें तो यह धागे तेजी से प्रचलन में आ रहे हैं।
कार्पेट एक्सपो में नायलान के धागे भी कारोबारियों को खूब लुभा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि विशेष प्रक्रिया से तैयार होने वाला इस धागे की खास बात यह है कि न तो यह जलता है और गंदा होता है।
इसे ‘न दाग न आग’ की तर्ज पर बेचा जा रहा है। यही नहीं, दुंबे की गर्दन के बाल से तैयार धागा, तिल के पेड़ की छाल से चरखे पर तैयार धागे की भी चर्चा हो रही है।
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जी हां, अब अहिंसा सिल्क (रेशम) से कालीन और कपड़े तैयार होने लगे हैं। कार्पेट एक्सपो में लगे धागों के एकमात्र स्टाल पर पहली बार प्रदर्शित अहिंसा सिल्क लोगों को लुभा रहा है।
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स्टाल संचालक विनीत राय बताते हैं कि रेशम के कीड़ों से सिल्क निकालने की इस नई प्रक्रिया में किसी कीड़े की मौत नहीं होती है। ककून को इस तरह धीरे-धीरे गर्म किया जाता है कि कीड़े बाहर आ जाते हैं और उन्हें सिल्क से जीवित अवस्था में ही अलग कर दिया जाता है।
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चूंकि इसमें इसमें कीड़ों की मौत नहीं होती है, इसीलिए इस प्रक्रिया से उत्पादित सिल्क और धागों को अहिंसा सिल्क का नाम दिया गया है। राय की मानें तो यह धागे तेजी से प्रचलन में आ रहे हैं।
कार्पेट एक्सपो में नायलान के धागे भी कारोबारियों को खूब लुभा रहे हैं। जानकार बताते हैं कि विशेष प्रक्रिया से तैयार होने वाला इस धागे की खास बात यह है कि न तो यह जलता है और गंदा होता है।
इसे ‘न दाग न आग’ की तर्ज पर बेचा जा रहा है। यही नहीं, दुंबे की गर्दन के बाल से तैयार धागा, तिल के पेड़ की छाल से चरखे पर तैयार धागे की भी चर्चा हो रही है।
कालीन मेले में इस बार पत्थरबाजी का दंश
कार्पेट एक्सपो में विदेशी कारोबारी
- फोटो : अमर उजाला
जम्मू कश्मीर के स्टॉलों पर सजे कालीनों में नए प्रयोग नहीं दिख रहे हैं। अपनी खूबसूरती के लिए विश्वविख्यात कालीनों में पुराने डिजाइनों की भरमार है। प्रतिनिधियों की मानें तो पिछली बार बाढ़ तो इस बार पत्थरबाजी को लेकर बनाए गए माहौल से कारीगर नहीं मिल रहे।
चार दिवसीय कालीन मेले में विभिन्न स्टालों पर लगी मनमोहक डिजाइन विदेशी आयातकों को आकर्षित कर रही हैं। नई दिल्ली के रग्स ओवरसीज के मालिक बोथराज मल्होत्रा ने कालीन पर पेरिस स्थित एफिल टावर की डिजाइन प्रदर्शित की है। मेले में इसे खूब पसंद किया जा रहा है।
इस बार कालीन में ऊन के बहुत सारे प्रयोग दिखाई पड़ रहे हैं। परंपरागत कालीनों में जहां सिर्फ ऊन का प्रयोग होता था वहीं अब सिल्क, बंबू सिल्क, जूट, काटन का भी प्रयोग हो रहा है। इससे आधुनिक डिजाइन भी बनाई जा रही हैं।
निर्यातकों का कहना है कि अब आयातकों को फिनिशिंग, कलर व टेक्स्चर प्रभावित कर रहा है। निर्यातकों ने कहा कि कालीन मेले से उन्हें नए प्रयोग करने के लिए प्रेरणा मिलती है । अमेरिका के आयातक कैमरॉन फिजी ने कहा कि यहां काफी अच्छी वेरायटी है।
आज हैंडलूम टेक्सटाइल की मांग हमारे देश में बढ़ रही है। एक बायर के प्रतिनिधि मुश्ताक ने कहा कि भारत की टेक्सटाइल मशीन मेड की अपेक्षा हैंडमेड को बाहर बहुत पसंद किया जा रहा है। परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि मेले में अब तक पांच सौ से अधिक विदेशी आयातक और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।
चार दिवसीय कालीन मेले में विभिन्न स्टालों पर लगी मनमोहक डिजाइन विदेशी आयातकों को आकर्षित कर रही हैं। नई दिल्ली के रग्स ओवरसीज के मालिक बोथराज मल्होत्रा ने कालीन पर पेरिस स्थित एफिल टावर की डिजाइन प्रदर्शित की है। मेले में इसे खूब पसंद किया जा रहा है।
इस बार कालीन में ऊन के बहुत सारे प्रयोग दिखाई पड़ रहे हैं। परंपरागत कालीनों में जहां सिर्फ ऊन का प्रयोग होता था वहीं अब सिल्क, बंबू सिल्क, जूट, काटन का भी प्रयोग हो रहा है। इससे आधुनिक डिजाइन भी बनाई जा रही हैं।
निर्यातकों का कहना है कि अब आयातकों को फिनिशिंग, कलर व टेक्स्चर प्रभावित कर रहा है। निर्यातकों ने कहा कि कालीन मेले से उन्हें नए प्रयोग करने के लिए प्रेरणा मिलती है । अमेरिका के आयातक कैमरॉन फिजी ने कहा कि यहां काफी अच्छी वेरायटी है।
आज हैंडलूम टेक्सटाइल की मांग हमारे देश में बढ़ रही है। एक बायर के प्रतिनिधि मुश्ताक ने कहा कि भारत की टेक्सटाइल मशीन मेड की अपेक्षा हैंडमेड को बाहर बहुत पसंद किया जा रहा है। परिषद के अध्यक्ष महावीर शर्मा ने बताया कि मेले में अब तक पांच सौ से अधिक विदेशी आयातक और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।