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क्या हादसों के बाद जागेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
Updated Mon, 04 Jul 2016 02:00 AM IST
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बारिश के दिनों में शहर के बेहद जर्जर हो चुके भवन कभी भी बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। निगम प्रशासन ऐसे जर्जर भवनों को ढहाने के नाम पर चुप्पी साधे हुआ है। यह स्थिति तब है, जब दो साल पहले ही अलग-अलग हिस्सों से कुल 141 भवनों को चिह्नित किया जा चुका है।
पक्के महाल में तो कई ऐसे भवन हैं, जिनकी दीवारें टेढ़ी हो चुकी हैं। उन्हें बांस, बल्ली के सहारे रोका गया है। छतों से सिमेंट का चप्पड़ निकल रहा है। ईंटें दरक रही हैं। इसके बाद भी नगर निगम का इंजीनियरिंग विभाग हरकत में नहीं है। यह तब है, जब भवनों को दो साल पहले ही चिह्नित किया जा चुका है। कोतवाली क्षेत्र में 19, दशाश्वमेध में 54, आदमपुर में चार, भेलूपुर में 11, चौक-कोतवाली 38 और वरुणापार जोन में 15 मकान जर्जर घोषित किए जा चुके हैं।
इसमें कोतवाली और दशाश्वमेध जोन में 111 ऐसे भवन हैं, जिनकी हालत काफी खराब हो चुकी है और सौ साल से अधिक के हैं। ये भवन कभी भी गिर सकते हैं और बड़ा हादसा हो सकता है।
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चिन्हांकन के बाद नगर निगम ने भवन स्वामियों को चेताया था कि वे खुद मरम्मत करा लें, या फिर ढहवाने के लिए तैयार रहें। बाद में मामला ठंडा पड़ गया। नगर निगम के मुख्य अभियंता कैलास सिंह का कहना है कि ऐसे ज्यादातर भवनों में किराएदारी और न्यायालयी विवाद है। इसके चलते ढहाने में दिक्कत आ रही है। जिन भवनों में विवाद नहीं है, उन्हें नोटिस देकर चेतावनी दी गई है कि वे मरम्मत करा लें। नहीं तो उन्हें ढहा दिया जाएगा।
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पक्के महाल में तो कई ऐसे भवन हैं, जिनकी दीवारें टेढ़ी हो चुकी हैं। उन्हें बांस, बल्ली के सहारे रोका गया है। छतों से सिमेंट का चप्पड़ निकल रहा है। ईंटें दरक रही हैं। इसके बाद भी नगर निगम का इंजीनियरिंग विभाग हरकत में नहीं है। यह तब है, जब भवनों को दो साल पहले ही चिह्नित किया जा चुका है। कोतवाली क्षेत्र में 19, दशाश्वमेध में 54, आदमपुर में चार, भेलूपुर में 11, चौक-कोतवाली 38 और वरुणापार जोन में 15 मकान जर्जर घोषित किए जा चुके हैं।
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इसमें कोतवाली और दशाश्वमेध जोन में 111 ऐसे भवन हैं, जिनकी हालत काफी खराब हो चुकी है और सौ साल से अधिक के हैं। ये भवन कभी भी गिर सकते हैं और बड़ा हादसा हो सकता है।
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चिन्हांकन के बाद नगर निगम ने भवन स्वामियों को चेताया था कि वे खुद मरम्मत करा लें, या फिर ढहवाने के लिए तैयार रहें। बाद में मामला ठंडा पड़ गया। नगर निगम के मुख्य अभियंता कैलास सिंह का कहना है कि ऐसे ज्यादातर भवनों में किराएदारी और न्यायालयी विवाद है। इसके चलते ढहाने में दिक्कत आ रही है। जिन भवनों में विवाद नहीं है, उन्हें नोटिस देकर चेतावनी दी गई है कि वे मरम्मत करा लें। नहीं तो उन्हें ढहा दिया जाएगा।