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Varanasi News: संशोधित ( प्रेसिडेंट ठीक किया गया है ) पेट्रोल से प्रदूषण कम करने पर काम कर रहे आदित्य, प्रेसिडेंट मेडल और सात गोल्ड मेडल मिलेंगे
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आईआईटी बीएचयू के 13वें दीक्षांत में होंगे सम्मानित, दो कैश प्राइज भी मिलेंगे
कहा, कभी शेड्यूल बनाकर नहीं की स्टडी, बनारस के ठहराव से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
नंबर गेम :
चार भाषाएं जानते हैं
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। आईआईटी बीएचयू से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके छात्र आदित्य नायक को दो दिन बाद 13वें दीक्षांत समारोह में प्रेसिडेंट मेडल दिया जाएगा। साथ ही सात गोल्ड मेडल और दो कैश प्राइज भी दिए जाएंगे। फिलहाल, आदित्य मुंबई में एक बड़ी तेल कंपनी में काम कर रहे हैं। चार भाषाओं उड़िया, मराठी, हिंदी, इंग्लिश के जानकार हैं। उनके जीवन में बनारस का बड़ा रोल रहा।
ओडिशा के रहने वाले आदित्य ने बताया कि बनारस के ठहराव ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पढ़ाई का मूड न हो तो अस्सी घाट की ताजी हवा से रिफ्रेशमेंट मिल जाता था। आदित्य ने बताया कि आईआईटी बीएचयू से इसी साल कैंपस प्लेसमेंट हुआ। कंपनी में क्रूड ऑयल से पेट्रोल-डीजल के अलावा अतिरिक्त पदार्थ जैसे सीएनजी, एलपीजी अलग करने वाले सेक्शन में काम कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल में से नाइट्रस और सल्फर जैसे हानिकारक प्रदूषकों को कम करने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में केमिकल इंजीनियरिंग के फील्ड में बड़े काम करना बाकी है।
कभी समय तय कर नहीं की पढ़ाई
आदित्य ने बताया कि कभी ऐसा नहीं रहा कि इतने घंटे पढ़ाई करनी ही है। क्लास कर आया तो पढ़ लिया, नहीं मन हुआ तो बाहर घूमने चल दिया। कभी खुद को टाइम टेबल में नहीं डाला। कभी कोई शेड्यूल नहीं बनाया। पुणे, मुंबई और ओडिशा में खूब रहा, लेकिन बनारस में किसी को बहुत जल्दी नहीं है। ट्रैफिक है, लेकिन भागदौड़ नहीं। इस शहर की शांति महसूस की जा सकती है। आदित्य ने बताया कि वे सिंगल चाइल्ड हैं। पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मां गृहिणी हैं।
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कहा, कभी शेड्यूल बनाकर नहीं की स्टडी, बनारस के ठहराव से मिली आगे बढ़ने की प्रेरणा
नंबर गेम :
चार भाषाएं जानते हैं
माई सिटी रिपोर्टर
वाराणसी। आईआईटी बीएचयू से केमिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुके छात्र आदित्य नायक को दो दिन बाद 13वें दीक्षांत समारोह में प्रेसिडेंट मेडल दिया जाएगा। साथ ही सात गोल्ड मेडल और दो कैश प्राइज भी दिए जाएंगे। फिलहाल, आदित्य मुंबई में एक बड़ी तेल कंपनी में काम कर रहे हैं। चार भाषाओं उड़िया, मराठी, हिंदी, इंग्लिश के जानकार हैं। उनके जीवन में बनारस का बड़ा रोल रहा।
ओडिशा के रहने वाले आदित्य ने बताया कि बनारस के ठहराव ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। पढ़ाई का मूड न हो तो अस्सी घाट की ताजी हवा से रिफ्रेशमेंट मिल जाता था। आदित्य ने बताया कि आईआईटी बीएचयू से इसी साल कैंपस प्लेसमेंट हुआ। कंपनी में क्रूड ऑयल से पेट्रोल-डीजल के अलावा अतिरिक्त पदार्थ जैसे सीएनजी, एलपीजी अलग करने वाले सेक्शन में काम कर रहे हैं। पेट्रोल-डीजल में से नाइट्रस और सल्फर जैसे हानिकारक प्रदूषकों को कम करने पर काम कर रहे हैं। ऐसे में केमिकल इंजीनियरिंग के फील्ड में बड़े काम करना बाकी है।
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कभी समय तय कर नहीं की पढ़ाई
आदित्य ने बताया कि कभी ऐसा नहीं रहा कि इतने घंटे पढ़ाई करनी ही है। क्लास कर आया तो पढ़ लिया, नहीं मन हुआ तो बाहर घूमने चल दिया। कभी खुद को टाइम टेबल में नहीं डाला। कभी कोई शेड्यूल नहीं बनाया। पुणे, मुंबई और ओडिशा में खूब रहा, लेकिन बनारस में किसी को बहुत जल्दी नहीं है। ट्रैफिक है, लेकिन भागदौड़ नहीं। इस शहर की शांति महसूस की जा सकती है। आदित्य ने बताया कि वे सिंगल चाइल्ड हैं। पिता सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मां गृहिणी हैं।
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