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अधिकमास : भगवान विष्णु की आराधना और पुण्यफल प्राप्ति के लिए श्रद्धालु आज से करेंगे पंचक्रोशी यात्रा
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वाराणसी। अधिकमास रविवार से शुरू हो जाएगा। भगवान विष्णु की आराधना और पुण्यफल प्राप्ति के लिए श्रद्धालु पंचक्रोशी यात्रा करेंगे। देशभर से भक्त इसमें शामिल होंगे। मगर, पंचक्रोशी परिक्रमा के पांचों पड़ावों पर दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। करीब एक किमी तक चौखंडी मार्ग खराब है। परिक्रमा पड़ावों पर एक धर्मशाला तीन वर्षों से बंद है, जबकि तीन में शौचालय नहीं हैं। कपिलधारा, रामेश्वर और भीमचंडी में भी व्यवस्थाएं अधूरी हैं। शनिवार को जिले के आला अधिकारियों ने इन पड़ावों का दौरा कर समस्याओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए। श्रद्धालु 25 कोस की परिक्रमा पैदल करेंगे।
अधिकमास में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा, लेकिन भगवान विष्णु की पूजा और काशी में पंचक्रोशी यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। इस यात्रा को करने के लिए 15 जून तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। परिक्रमा रविवार से शुरू हो रही है, लेकिन प्रशासन अभी तक पांचों पड़ावों की व्यवस्थाएं पूरी नहीं कर पाया है।
पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतिम पड़ाव कपिलधारा में 12 धर्मशालाएं हैं, लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक धर्मशाला में तीन वर्षों से शौचालय बंद है और एक धर्मशाला बंद पड़ी है, जबकि दो धर्मशालाओं में शौचालय ही नहीं हैं। तीसरे पड़ाव रामेश्वर में भी कई दुश्वारियां हैं। शनिवार को सीडीओ अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे और रामेश्वर वरुणा घाट, मंदिर तथा धर्मशालाओं का निरीक्षण किया। सीडीओ प्रखर सिंह ने रामेश्वर तीर्थ धाम पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरुणा नदी में पानी छोड़ने, नदी की सफाई कराने, धर्मशालाओं में पेयजल, प्रकाश और शौचालयों की सफाई सुनिश्चित कराने, प्याऊ की व्यवस्था करने, गर्मी से राहत के लिए मैट और फर्राटा पंखे लगाने, खराब हैंडपंपों को ठीक कराने, जलापूर्ति के लिए टंकी लगाने, तीर्थयात्रियों के लिए सस्ते दर की दुकान खोलने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एंबुलेंस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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मंदिर प्रशासन और ग्राम प्रधान ने सीडीओ से रामेश्वर में निर्मित टीएफसी को आम तीर्थयात्रियों के लिए हस्तांतरित करने की मांग की। रामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर अनूप तिवारी ने बताया कि जिला प्रशासन ने निर्देश तो दिए हैं, लेकिन अभी कार्य शुरू नहीं हुए हैं। करीब एक किमी तक चौखंडी रेलवे फाटक का मार्ग पूरी तरह खराब है। इस मौके पर डीपीआरओ आदर्श, डीडीओ विजय कुमार जायसवाल, बीडीओ राजेश कुमार सिंह, एडीओ पंचायत धनंजय कुमार और सचिव श्यामनारायण आदि मौजूद रहे। वहीं, परिक्रमा यात्रा के चौथे पड़ाव शिवपुर के पांचों पांडवा क्षेत्र में भी तैयारियां जारी रहीं। गर्मी को देखते हुए पंचक्रोशी यात्रियों के ठहरने और विश्राम के लिए रामलीला मैदान, राजा गोकुलचंद्र धर्मशाला, रामलीला धर्मशाला और हनुमान धर्मशाला की सफाई कर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। शिवपुर वार्ड पार्षद बलराम कनौजिया ने बताया कि धूप से बचाव के लिए छायादार टेंट लगाए जा रहे हैं। ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर और कूलर लगाए जाएंगे। बिजली-पानी की व्यवस्था भी की जा रही है।
दूसरे पड़ाव भीमचंडी में सार्वजनिक शौचालय और नालियों की सफाई कराई गई, मगर परिक्रमा पाथवे टूटा पड़ा है। पहले पड़ाव कर्दम ऋषि की तपस्थली कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित 10 धर्मशालाओं में टूटे नलों और खराब बल्बों को दुरुस्त कराया गया। पार्षद सुशीला देवी ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं जल्द दुरुस्त कर ली जाएंगी।
पंचक्रोशी परिक्रमा में शिव के 108 गण
काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग में भगवान शिव के 108 गण हैं। पंचक्रोशी यात्रा प्रदक्षिणा समिति के संचालक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि पंचक्रोशी परिक्रमा का प्रत्येक पड़ाव पांच-पांच कोस का होता है। इसमें सबसे लंबा पड़ाव 23 किलोमीटर का है, जबकि बाकी पड़ाव 15-15 किलोमीटर के हैं। कुल 25 कोस की यात्रा होती है। काशी की इस यात्रा को करने से पाप धुल जाते हैं और पुण्यफल के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।
32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी बाद आता है अधिकमास
षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के युवराज गोस्वामी प्रियेन्दु बावा ने बताया कि गोपाल मंदिर में पुरुषोत्तम मास भर प्रभु मुकुंद राय जी व गोपाल लाल जी के विविध मनोरथ, श्रीमद्भागवत सप्ताह, प्रवचन सत्र और वैष्णव परिवार की महिलाओं द्वारा पुष्टिमार्गीय पाठ आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि मनीषियों ने अधिकमास यानी मलमास या पुरुषोत्तम मास को मान्यता दी है। सूर्य सिद्धांतानुसार एक सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घड़ी, 31 पल और 30 विपल होते हैं। सौर और चंद्रमासों में लगभग पौने तीन वर्ष में 30 दिन का अंतर पड़ जाता है। इसी को अधिशेष या मलमास कहा जाता है। 32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी का समय बीतने पर 30 दिन का अधिमास आता है। इस चंद्रमास में रवि संक्रमण नहीं होता और मास तथा संक्रांति का संबंध भी टूट जाता है। इस मास के अधिपति साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण माने गए हैं। इस माह में स्नान, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष फल प्राप्त होता है।
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अधिकमास में मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा, लेकिन भगवान विष्णु की पूजा और काशी में पंचक्रोशी यात्रा का विशेष महत्व माना जाता है। इस यात्रा को करने के लिए 15 जून तक श्रद्धालुओं की भीड़ रहेगी। परिक्रमा रविवार से शुरू हो रही है, लेकिन प्रशासन अभी तक पांचों पड़ावों की व्यवस्थाएं पूरी नहीं कर पाया है।
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पंचक्रोशी परिक्रमा के अंतिम पड़ाव कपिलधारा में 12 धर्मशालाएं हैं, लेकिन उनमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। एक धर्मशाला में तीन वर्षों से शौचालय बंद है और एक धर्मशाला बंद पड़ी है, जबकि दो धर्मशालाओं में शौचालय ही नहीं हैं। तीसरे पड़ाव रामेश्वर में भी कई दुश्वारियां हैं। शनिवार को सीडीओ अधिकारियों के साथ वहां पहुंचे और रामेश्वर वरुणा घाट, मंदिर तथा धर्मशालाओं का निरीक्षण किया। सीडीओ प्रखर सिंह ने रामेश्वर तीर्थ धाम पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने वरुणा नदी में पानी छोड़ने, नदी की सफाई कराने, धर्मशालाओं में पेयजल, प्रकाश और शौचालयों की सफाई सुनिश्चित कराने, प्याऊ की व्यवस्था करने, गर्मी से राहत के लिए मैट और फर्राटा पंखे लगाने, खराब हैंडपंपों को ठीक कराने, जलापूर्ति के लिए टंकी लगाने, तीर्थयात्रियों के लिए सस्ते दर की दुकान खोलने तथा स्वास्थ्य सेवाओं के साथ एंबुलेंस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
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मंदिर प्रशासन और ग्राम प्रधान ने सीडीओ से रामेश्वर में निर्मित टीएफसी को आम तीर्थयात्रियों के लिए हस्तांतरित करने की मांग की। रामेश्वर मंदिर के पीठाधीश्वर अनूप तिवारी ने बताया कि जिला प्रशासन ने निर्देश तो दिए हैं, लेकिन अभी कार्य शुरू नहीं हुए हैं। करीब एक किमी तक चौखंडी रेलवे फाटक का मार्ग पूरी तरह खराब है। इस मौके पर डीपीआरओ आदर्श, डीडीओ विजय कुमार जायसवाल, बीडीओ राजेश कुमार सिंह, एडीओ पंचायत धनंजय कुमार और सचिव श्यामनारायण आदि मौजूद रहे। वहीं, परिक्रमा यात्रा के चौथे पड़ाव शिवपुर के पांचों पांडवा क्षेत्र में भी तैयारियां जारी रहीं। गर्मी को देखते हुए पंचक्रोशी यात्रियों के ठहरने और विश्राम के लिए रामलीला मैदान, राजा गोकुलचंद्र धर्मशाला, रामलीला धर्मशाला और हनुमान धर्मशाला की सफाई कर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। शिवपुर वार्ड पार्षद बलराम कनौजिया ने बताया कि धूप से बचाव के लिए छायादार टेंट लगाए जा रहे हैं। ठंडे पानी के लिए वाटर कूलर और कूलर लगाए जाएंगे। बिजली-पानी की व्यवस्था भी की जा रही है।
दूसरे पड़ाव भीमचंडी में सार्वजनिक शौचालय और नालियों की सफाई कराई गई, मगर परिक्रमा पाथवे टूटा पड़ा है। पहले पड़ाव कर्दम ऋषि की तपस्थली कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के पास स्थित 10 धर्मशालाओं में टूटे नलों और खराब बल्बों को दुरुस्त कराया गया। पार्षद सुशीला देवी ने बताया कि सभी व्यवस्थाएं जल्द दुरुस्त कर ली जाएंगी।
पंचक्रोशी परिक्रमा में शिव के 108 गण
काशी की पंचक्रोशी परिक्रमा मार्ग में भगवान शिव के 108 गण हैं। पंचक्रोशी यात्रा प्रदक्षिणा समिति के संचालक उमाशंकर गुप्ता ने बताया कि पंचक्रोशी परिक्रमा का प्रत्येक पड़ाव पांच-पांच कोस का होता है। इसमें सबसे लंबा पड़ाव 23 किलोमीटर का है, जबकि बाकी पड़ाव 15-15 किलोमीटर के हैं। कुल 25 कोस की यात्रा होती है। काशी की इस यात्रा को करने से पाप धुल जाते हैं और पुण्यफल के साथ मोक्ष की प्राप्ति होती है।
32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी बाद आता है अधिकमास
षष्ठपीठ गोपाल मंदिर के युवराज गोस्वामी प्रियेन्दु बावा ने बताया कि गोपाल मंदिर में पुरुषोत्तम मास भर प्रभु मुकुंद राय जी व गोपाल लाल जी के विविध मनोरथ, श्रीमद्भागवत सप्ताह, प्रवचन सत्र और वैष्णव परिवार की महिलाओं द्वारा पुष्टिमार्गीय पाठ आयोजित होगा। उन्होंने बताया कि मनीषियों ने अधिकमास यानी मलमास या पुरुषोत्तम मास को मान्यता दी है। सूर्य सिद्धांतानुसार एक सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घड़ी, 31 पल और 30 विपल होते हैं। सौर और चंद्रमासों में लगभग पौने तीन वर्ष में 30 दिन का अंतर पड़ जाता है। इसी को अधिशेष या मलमास कहा जाता है। 32 मास, 16 दिन और 4 घड़ी का समय बीतने पर 30 दिन का अधिमास आता है। इस चंद्रमास में रवि संक्रमण नहीं होता और मास तथा संक्रांति का संबंध भी टूट जाता है। इस मास के अधिपति साक्षात पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण माने गए हैं। इस माह में स्नान, दान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान करने का विशेष फल प्राप्त होता है।