उपलब्धि! पूर्वांचल में होगा प्रदेश का दूसरा बड़ा एनडीआरएफ सेंटर
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नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स (एनडीआरएफ) का सेंटर चंदौली जिले के साहूपुरी में बनेगा। साहूपुरी स्थित श्रम विभाग की तकरीबन 34 एकड़ जमीन में पूर्वांचल का बड़ा सेंटर होगा। बाढ़ और आगजनी या अन्य आपदा जैसी घटनाओं की रोकथाम और जानमाल की सुरक्षा के लिए पूर्वांचल सहित बिहार को भी कवर किया जा सकता है। बुधवार को कैबिनेट में इसका निर्णय आने के बाद पूर्वांचल के लिए इसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
अभी तक एनडीआरएफ का कैंप वाराणसी स्थित सांस्कृतिक संकुल में है। किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिए वहीं से टीम रवाना होती थी। लेकिन जगह के अभाव में सुविधाएं एवं संसाधन विकसित नहीं हो पा रहे थे। जवानों की संख्या पर्याप्त नहीं थी। इन सबके लिए एनडीआरएफ के अधिकारी लंबे समय से जमीन की तलाश कर रहे थे। इसके लिए कई जगह जमीन देखी गई मगर बात नहीं बन पाई।
बाद में श्रम विभाग की जमीन को देखा गया। साहूपुरी में विभाग की 34 एकड़ जमीन थी। इसे देखने के बाद तय हुआ कि यहां बनाया जा सकता है। चंदौली जिला प्रशासन के साथ मिलकर एनडीआरएफ के अधिकारियों ने इसका प्रस्ताव शासन को भेजा था। बुधवार को इस पर कैबिनेट की मुहर लगते ही यहां सेंटर बनाने का रास्ता साफ हो गया।
देशभर में एनडीआरएफ के 10 बड़े सेंटर स्थापित हैं। इसमें पटना, चंडीगढ़, ग्रेटर नोयडा, बड़ोदरा, पुणे, चेन्नई, विजयवाड़ा, भुवनेश्वर, कोलकाता और गुहाटी शामिल हैं। प्रदेश का यह दूसरा बड़ा सेंटर होगा। इससे पहले ग्रेटर नोयडा में पहला सेंटर बनाया गया है।
साहूपुरी में श्रम विभाग की 34 एकड़ जमीन है। उसे एनडीआरएफ सेंटर बनाने के लिए तकरीबन एक साल से प्रक्रिया चल रही थी। अब वहां एनडीआरएफ का सेंटर बनेगा।
जेपी सिंह, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, चंदौली।
संसाधन और सुविधाओं से होगा सुसज्जित
साहूपुरी में बनने वाला एनडीआरएफ का सेंटर अत्याधुनिक संसाधनों एवं सुविधाओं से लैस होगा। वहां आपदा से बचाने के लिए बेहतर उपकरणों के साथ कई टीमें बनाई जाएंगी। सूत्रों के अनुसार यहां एनडीआरएफ के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी खोलने की तैयारी है। इसके अलावा वहां रहने एवं कैंटीन की सुविधाएं भी मुहैैया कराई जाएंगी। साथ ही, किसी भी आपदा से निबटने के लिए तत्काल टीम रवाना हो सके, इसके लिए भी बेहतर इंतजाम होंगे।
हर साल बाढ़ और आग से होता है जानमाल का नुकसान
पीडीडीयू नगर। बाढ़ और आगजनी की होने वाली घटनाओं से हर साल काफी संख्या में जानमाल का नुकसान होता है। बाढ़ से लोग घरों में कैद हो जाते हैं या फिर डूबने के कगार पर पहुंच जाते हैं तो बचाने के लिए काफी मशक्कत करनी होती है।
वहीं जिले में गर्मी के दिनों में आग से हर साल सैकड़ों एकड़ फसल तो बर्बाद होती ही है इसे बुझाने में लोगों की जान भी चली जाती है। अब एनडीआरएफ का सेंटर खुल जाने के बाद काफी मदद मिलेगी और जानमाल की सुरक्षा हो सकेगी।