बीएचयू में अभाविप का आंदोलन: छात्रों ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया, बोले- प्रशासनिक चुप्पी तोड़ो; प्रदर्शन
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में छात्रहित और परिसर की सुरक्षा समेत विभिन्न मुद्दों को लेकर अभाविप का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। शनिवार को धरना स्थल पर विद्यार्थियों ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया। इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने प्रशासन पर कार्यक्रम में बाधा डालने का आरोप लगाया। संगठन ने छात्रहित, सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में सुधार की मांग दोहराई।
विस्तार
काशी हिंदू विश्वविद्यालय में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) की बीएचयू इकाई का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। यह आंदोलन 23 सितंबर से शुरू हुआ है। छात्रहित, परिसर की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही इसके मुख्य मुद्दे हैं। प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में सुधार भी उनकी प्रमुख मांगों में शामिल है।
आंदोलन के दौरान छात्रों ने पहले मौन प्रदर्शन किया था। इसके बाद भारी बारिश के बीच ओपन माइक कार्यक्रम भी आयोजित हुआ। शनिवार को धरना स्थल पर छात्रों ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ किया। विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के विद्यार्थियों ने इसमें सहभागिता की। विद्यार्थियों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आस्था व्यक्त की।
उन्होंने आंदोलन के प्रति अपना संकल्प भी दोहराया। अभाविप पदाधिकारियों का कहना है कि वे प्रशासन का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। वे छात्रहित से जुड़े मुद्दों पर अलग-अलग शांतिपूर्ण कार्यक्रम कर रहे हैं। संगठन ने कहा कि मांगों पर ठोस कार्रवाई होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
सुंदरकांड पाठ और प्रशासनिक दबाव
इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन के अनुसार, सुंदरकांड पाठ के समय विश्वविद्यालय प्रशासन ने बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ने विद्यार्थियों को कार्यक्रम आयोजित नहीं करने देने का प्रयास किया। इसके बावजूद छात्रों ने अपना कार्यक्रम जारी रखा। छात्रों ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ सफलतापूर्वक संपन्न कराया। इकाई मंत्री अनुराग तिवारी ने कहा कि यह पाठ संघर्ष के बीच धैर्य और सकारात्मक संकल्प का प्रतीक है।
आंदोलन की प्रमुख मांगें
अभाविप कार्यकर्ताओं ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट किया है। इनमें छात्रहित की रक्षा सर्वोपरि है। परिसर की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उनकी मुख्य मांग है। प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही भी वे चाहते हैं। प्रॉक्टोरियल व्यवस्था में आवश्यक सुधार भी उनकी मांगों में शामिल है। विद्यार्थी पिछले कई दिनों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा रहे हैं।
शांतिपूर्ण विरोध के तरीके
अभाविप का आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक है। 23 सितंबर को शुरू हुए इस आंदोलन में कई तरह के कार्यक्रम हुए हैं। छात्रों ने मौन प्रदर्शन के माध्यम से अपनी बात रखी। भारी बारिश के बीच ओपन माइक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। सामूहिक सुंदरकांड पाठ भी इसी कड़ी का हिस्सा था। विद्यार्थी प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।