अंजुमन हैदरी के जेरे इंतजाम में दालमंडी स्थित मस्जिद मीर नादे अली में बृहस्पतिवार की रात में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई की याद में मजलिस हुई। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना सैयद जुसुफ अहमद मशहदी ने कहा कि कल का यहूदी भी अली से खौफ खाता था और आज का यहूदी भी अली से खौफ खाता है। इसलिए ऊपर से बम बरसा कर एक 82 साल के मर्दे मुजाहिद को तब मारा जब वो कुरान की तिलावत कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ये यहूदी कौम पूरी दुनिया में जुल्म और ज्यादती करके हुकूमत करना चाहती है। मगर, हम इमाम हुसैन के मानने और उनके बताए राह पर चलने वाले हैं। हमारे इमाम ने कर्बला से दुनिया को ये पैगाम दिया कि जिल्लत की जिंदगी से इज्जत की मौत बेहतर है। आज भी इमाम हुसैन के चाहने वाले उनके इस फरमान पर अमल करते हुए अपना सिर तो कटा सकते हैं लेकिन किसी जालिम के आगे सिर नहीं झुका सकते। मौलाना ने कर्बला वालों के मसायब पढ़े तो सभी की आंखें नम हो गईं। आगाज लियाकत अली खां और उनके साथियों ने सोजख्वानी से किया। मौलाना हाफिज हसन रजा बनारसी और अतश बनारसी ने कलाम पेश किए। अंजुमन गुल्जारिया अब्बासिया और अंजुमन हैदरी ने नौहाख्वानी की। अंजुमन के सचिव जुल्फेकार जैदी और महासचिव नायब रजा की देखरेख में मजलिस हुई। संचालन मौलाना बाकर बलियावी और शुक्रिया अंजुमन हैदरी के अध्यक्ष सैयद अब्बास मुर्तुजा शमसी ने किया।