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भदोहीः घर में एक हफ्ते से नहीं बन रहा था खाना, भूख से चली गई किशोर की जान
ब्यूरो,अमर उजाला,भदोही
Updated Thu, 25 May 2017 02:34 PM IST
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भूख से मौत की सूचना पर जांच करते ज्ञानपुर तहसीलदार जगवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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भदोही जिले के थानीपुर गांव में एक किशोर की रहस्यमय हालात में मौत हो गई। किशोर के पिता ने बेटे की मौत भूख से होने की बात कहकर सनसनी फैला दी। कहा कि उसके घर में एक सप्ताह से रोजाना खाना नहीं बन रहा था। मंगलवार रात में बेटा मां के हाथ से केवल पानी पीकर सो गया और सुबह उठ नहीं सका।
यह जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी विशाख जी ने तहसीलदार जगवीर सिंह को मौके पर भेजा। तहसीलदार को घर की रसोई खाली मिली। तहसीलदार ने पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए हैं। तात्कालिक तौर पर प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को गेहूं और चावल दिया गया है।
थानीपुर गांव निवासी राधेश्याम गौतम राजगीर का काम करता है। उसके दो पुत्र शिव श्याम (12), कृष्णा (5) और चार पुत्रियां लक्ष्मीना (14), अनुराधा (13), रानी (3) और संगीता (दो माह) हैं। करीब बीस दिन से राधेश्याम को काम न मिलने से परिवार की आजीविका बाधित हो गई थी।
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परिवार में एक दिन के अंतराल पर भोजन बन रहा था, फिर भी बड़ा परिवार होने के चलते सभी को भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा था।
राधेश्याम ने कहा कि उसके पिता के नाम से राशन कार्ड था, जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाया था।
बताया कि मंगलवार रात वह परिवार के साथ बिना कुछ खाए सो गया था। देर रात उसके बड़े बेटे शिव श्याम की हालत बिगड़ गई। पैसे न होने के कारण वह इलाज भी नहीं करवा सका और बेटे की मौत हो गई। बुधवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम कराए बगैर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामले में डीएम विशाख जी ने कहा कि प्रथम दृष्टया किशोर की मौत बीमारी से होना प्रतीत होती है। परिवार को लोहिया आवास और इंदिरा आवास की सरकारी सहायता मिल चुकी थी। राधेश्याम के पिता का अंत्योदय कार्ड बना था। चार महीने पहले पिता की मृत्यु के दो महीने बाद तक राधेश्याम ने राशन भी लिया था।
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यह जानकारी मिलते ही जिलाधिकारी विशाख जी ने तहसीलदार जगवीर सिंह को मौके पर भेजा। तहसीलदार को घर की रसोई खाली मिली। तहसीलदार ने पीड़ित परिवार के बयान दर्ज किए हैं। तात्कालिक तौर पर प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को गेहूं और चावल दिया गया है।
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थानीपुर गांव निवासी राधेश्याम गौतम राजगीर का काम करता है। उसके दो पुत्र शिव श्याम (12), कृष्णा (5) और चार पुत्रियां लक्ष्मीना (14), अनुराधा (13), रानी (3) और संगीता (दो माह) हैं। करीब बीस दिन से राधेश्याम को काम न मिलने से परिवार की आजीविका बाधित हो गई थी।
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परिवार में एक दिन के अंतराल पर भोजन बन रहा था, फिर भी बड़ा परिवार होने के चलते सभी को भरपेट खाना नहीं मिल पा रहा था।
राधेश्याम ने कहा कि उसके पिता के नाम से राशन कार्ड था, जिसका नवीनीकरण नहीं हो पाया था।
बताया कि मंगलवार रात वह परिवार के साथ बिना कुछ खाए सो गया था। देर रात उसके बड़े बेटे शिव श्याम की हालत बिगड़ गई। पैसे न होने के कारण वह इलाज भी नहीं करवा सका और बेटे की मौत हो गई। बुधवार दोपहर बाद पोस्टमार्टम कराए बगैर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
मामले में डीएम विशाख जी ने कहा कि प्रथम दृष्टया किशोर की मौत बीमारी से होना प्रतीत होती है। परिवार को लोहिया आवास और इंदिरा आवास की सरकारी सहायता मिल चुकी थी। राधेश्याम के पिता का अंत्योदय कार्ड बना था। चार महीने पहले पिता की मृत्यु के दो महीने बाद तक राधेश्याम ने राशन भी लिया था।