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वेतन न मिलने पर परिचारक ने खा लिया जहर
Varanasi
Updated Sat, 09 Mar 2013 05:31 AM IST
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वाराणसी। चार माह से वेतन न मिलने से नाराज संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के वाग्देवी मंदिर में तैनात संविदा परिचारक महेंद्र नाथ यादव ने शुक्रवार को जहर खा लिया। हालत बिगड़ने पर उसे कबीर चौरा अस्पताल ले जाया गया। वहां स्थिति गंभीर होने पर मलदहिया स्थित एक निजी हास्पिटल में भर्ती कराया गया। मौके पर सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें परिचारक ने मंदिर व्यवस्थापक पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसे लेकर छात्रसंघ के पदाधिकारियों ने हंगामा खड़ा दिया। योग साधना केंद्र में चल रही न्याय वैश्विक विवाद कार्यशाला में व्यवस्थापक प्रो. रामपूजन पांडेय बैठे हुए थे। छात्र उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए केंद्र तक पहुंच गए। वहां ताला जड़कर व्यवस्थापक की गिरफ्तारी की मांग करने लगे। मौके पर पहुंची पुलिस ने उन्हें समझाकर शांत कराया।
आजमगढ़ निवासी महेंद्र नाथ यादव ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं 1998 से काम कर रहा हूं। अब तक जितने भी व्यवस्थापक आए हैं उनके साथ अच्छे से काम किया, जबकि वर्तमान व्यवस्थापक जब से आए हैं तब से कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल रहा। वह आए दिन वेतन रोकने की धमकी देते रहते हैं। धोखाधड़ी का आरोप लगाकर मेरा चार महीने से वेतन रोका हुआ है। वो मुझे हटाकर अपने आदमी को रखना चाहते हैं। यही नौकरी मेरे और मेरे परिवार का सहारा है।
कोट :-
महेंद्रनाथ यादव को अगर कोई शिकायत थी तो उसे पहले बताना चाहिए था। वेतन रोकने का आरोप गलत है।-प्रो.बिंदा प्रसाद, कुलपति
परिचारक के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। वेतन मेरे स्तर से जारी नहीं होता तो मैं कैसे रोक सकता हूं। -प्रो. रामपूजन पांडेय, वाग्देवी मंदिर के व्यवस्थापक
पीडि़त ने अपनी शिकायत के संबंध में कुलपति को पत्र लिखा था। कुलपति ने उसी पत्र को थाने भेजकर जांच करने को कहा है। पत्र में प्रो. रामपूजन पांडेय पर वेतन को लेकर परेशान करने का आरोप लगाया गया है। पीडि़त के होश में आने पर उसका बयान लिया जाएगा।- राजमोहन यादव, इंस्पेक्टर चेतगंज
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आजमगढ़ निवासी महेंद्र नाथ यादव ने सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं 1998 से काम कर रहा हूं। अब तक जितने भी व्यवस्थापक आए हैं उनके साथ अच्छे से काम किया, जबकि वर्तमान व्यवस्थापक जब से आए हैं तब से कर्मचारियों को समय से वेतन नहीं मिल रहा। वह आए दिन वेतन रोकने की धमकी देते रहते हैं। धोखाधड़ी का आरोप लगाकर मेरा चार महीने से वेतन रोका हुआ है। वो मुझे हटाकर अपने आदमी को रखना चाहते हैं। यही नौकरी मेरे और मेरे परिवार का सहारा है।
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कोट :-
महेंद्रनाथ यादव को अगर कोई शिकायत थी तो उसे पहले बताना चाहिए था। वेतन रोकने का आरोप गलत है।-प्रो.बिंदा प्रसाद, कुलपति
परिचारक के सारे आरोप बेबुनियाद हैं। वेतन मेरे स्तर से जारी नहीं होता तो मैं कैसे रोक सकता हूं। -प्रो. रामपूजन पांडेय, वाग्देवी मंदिर के व्यवस्थापक
पीडि़त ने अपनी शिकायत के संबंध में कुलपति को पत्र लिखा था। कुलपति ने उसी पत्र को थाने भेजकर जांच करने को कहा है। पत्र में प्रो. रामपूजन पांडेय पर वेतन को लेकर परेशान करने का आरोप लगाया गया है। पीडि़त के होश में आने पर उसका बयान लिया जाएगा।- राजमोहन यादव, इंस्पेक्टर चेतगंज
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