कथक में परन-टुकड़ों से मालविका की थिरकन बनी यादगार

Varanasi Updated Sun, 25 Nov 2012 12:00 PM IST
वाराणसी। गंगा किनारे मुक्ताकाशीय मंच पर शनिवार की शाम गायन, वादन और नृत्य की मोहक प्रस्तुतियों से चारदिनी गंगा महोत्सव का जोरदार आगाज हुआ। डा. मालविका मित्रा ने जहां भाव-भंगिमाओं की अदाकारी से मन मोहा, वहीं सरोद-सितार की युगलबंदी से उभरते कलाकारों की साधना प्रस्फुटित हुई। राजेंद्र प्रसाद घाट पर यह कार्यक्रम पर्यटन विभाग की ओर से आयोजित किया गया।
दर्शकों से खचाखच भरी बालकनीनुमा सीढि़यों पर इस महोत्सव का लुत्फ उठाने के लिए विदेेशी मेहमान भी आतुर नजर आए। अली अब्बास खां की शहनाई से संगीत महोत्सव की शुरुआत हुई। कोलकाता की प्रख्यात नृत्यांगना डा. मालविका मित्रा ने कथक नृत्य किया। नाधिंधिंना... पर जयपुर घराने की उठान जब उन्होंने प्रस्तुत की तो तमाम संगीत प्रेमी भावपूर्ण प्रस्तुति पर मुग्ध हो उठे। परन, टुकड़े के बाद छोटी-छोटी तिहाइयां यादगार बन गईं। कथक के विशेष अंग गत को बारीकी से पेश किया। कृष्ण के बांसुरी प्रेम और गोपी विरह पर उनके नृत्य प्रयोग का कोई जोड़ नहीं था। बांसुरी की धुन पर दादरा की प्रस्तुति से उन्होंने हर तन-मन को सींचा। बोल थे- कन्हैया तोरी मुरली बैरन भई...। बनारस घराने के शास्त्रीय गायक गणेश मिश्र ने भी पूरब अंग की गायकी से रंग जमाया। राग जोग में बड़ा ख्याल से उन्होंने शुरुआत की। बोल थे ‘बालम नहिं आयो मोरे घरवा’.. ‘सगरी रैन गईलीं’। इसके बाद दादरा के बोल थे- ‘डगर बिच कैसे चलूं मग रोके कन्हैया बेपीर’...। तबले पर युगल किशोर मिश्र, वायलिन पर पं. सुखदेव मिश्र, साइड रिदम पर संजय श्रीवास्तव, बांसुरी पर प्रांजल और तानपूरे पर श्रीलंका के रवींद्र ने संगत की। इनके बाद प्रतिध्वनि कल्चरल सोसाइटी की ओर से गंगा पर आधारित बैले नृत्य और मुझे कलुषित न करो की मोहक प्रस्तुति हुई। रूपाली बागची के निर्देशन में गंगा प्रदूषण पर आधारित नृत्य नाटिका पर लोग विभोर हो उठे। वस्त्र विन्यास रीति सान्याल, अमृता चक्रवर्ती और रूप सज्जा अनूप मोतीलाल, शिप्रा चक्रवर्ती का था। अंत में उभरते कलाकार लक्ष्य मोहन के सितार और आयुष मोहन के सरोद की युगलबंदी हुई। मैहर घराने के इन कलाकारों ने राग विहाग में अलाप, जोड़ के बाद राग देस में विलंबित, द्रुत लय में प्रस्तुति की। तबले पर संगत की पं. किशन महाराज के नाती शुभ महाराज ने। इस मौके पर पद्मभूषण पं. छन्नूलाल मिश्र के अलावा मंडलायुक्त चंचल तिवारी उनकी पत्नी सीमा तिवारी, जिलाधिकारी सौरभ बाबू उनकी पत्नी स्मिता माहेश्वरी और डीआईजी ए सतीश गणेश भी अपनी पत्नी के साथ अंत तक जमे रहे। पर्यटन उप निदेशक अवनीश चंद्र मिश्र, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी रवींद्र मिश्र, क्षेत्रीय संस्कृति अधिकारी रत्नेश वर्मा, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डा. सुभाष यादव व्यवस्था संभाल रहे थे।
इनसेट
संगीत का बनारस घराना दुनिया में बेजोड़: सुरेंद्र पटेल
वाराणसी। लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र पटेल ने शनिवार की शाम राजेंद्र प्रसाद घाट पर दीप जलाकर 18वें गंगा महोत्सव का उद्घाटन किया। यहां उन्होंने कहा कि शास्त्रीय संगीत में बनारस घराने का कोई जोड़ दुनिया में नहीं है। गंगा-जमुनी तहजीब के शहर में यह महोत्सव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। संगीत का यह गुलदस्ता आने वाले दिनों में और खुशबू बिखेरेगा।

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