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कृषि विकास दर चार प्रतिशत करने का लक्ष्य
Varanasi
Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। 12वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि विकास की दर चार प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्थागत ढांचे को मजबूत करने पर विशेष बल रहेगा। योजना के प्रस्तावों पर अंतिम मुहर 29 दिसंबर को राष्ट्रीय विकास परिषद की बैठक में लगाई जाएगी। बीएचयू के स्वतंत्रता भवन में शनिवार को शुरू हुए इंडियन सोसाइटी आफ एग्रीकल्चरल इकोनामिक्स (आईएसएई) के 72वें दो दिनी वार्षिक सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि योजना आयोग के सदस्य डा. नरेंद्र जाधव ने ये बातें कहीं।
उन्हाेंने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 14 प्रतिशत है जबकि अधिकांश आबादी इसी क्षेत्र पर निर्भर है। भारत सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में 8.2 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा है। बताया कि देश में कृषि विकास दर 9वीं पंचवर्षीय योजना में 2.5 प्रतिशत, 10वीं में 2.4 प्रतिशत, 11वीं में 3.3 प्रतिशत थी। कृषि के क्षेत्र में मौसमी परिवर्तन, राज्यवार प्रदर्शन, कृषि रोजगार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां अधिक हैं। संगठन के अध्यक्ष और तमिलनाडु एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सी. रामास्वामी ने कृषि संबंधी शोध कार्यों के बढ़ावे पर बल दिया ताकि योजना बनाते समय उनका उपयोग किया जा सके। यूएएस बंगलूरू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. पीजी चेनगप्पा ने कृषि क्षेत्र में पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इस मौके पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आरपी सिंह, डा. ओपी सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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उन्हाेंने कहा कि देश के सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का योगदान केवल 14 प्रतिशत है जबकि अधिकांश आबादी इसी क्षेत्र पर निर्भर है। भारत सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में 8.2 प्रतिशत विकास दर का लक्ष्य रखा है। बताया कि देश में कृषि विकास दर 9वीं पंचवर्षीय योजना में 2.5 प्रतिशत, 10वीं में 2.4 प्रतिशत, 11वीं में 3.3 प्रतिशत थी। कृषि के क्षेत्र में मौसमी परिवर्तन, राज्यवार प्रदर्शन, कृषि रोजगार, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव जैसी चुनौतियां अधिक हैं। संगठन के अध्यक्ष और तमिलनाडु एग्रीकल्चर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. सी. रामास्वामी ने कृषि संबंधी शोध कार्यों के बढ़ावे पर बल दिया ताकि योजना बनाते समय उनका उपयोग किया जा सके। यूएएस बंगलूरू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डा. पीजी चेनगप्पा ने कृषि क्षेत्र में पब्लिक, प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इस मौके पर कृषि विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो. आरपी सिंह, डा. ओपी सिंह आदि ने भी विचार व्यक्त किए।
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