वरुणा की कीमत चुकाने को जनता लामबंद

Varanasi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। दुनिया में गिनती के प्राचीन शहरों में से एक सांस्कृतिक नगरी वाराणसी की जन्मदाता नदी वरुणा को पुनर्जीवित करने के लिए जनता शनिवार को मुखर हो उठी। नदी के अंतिम छोर पर बसे सरायमोहना के लोग खौल उठे। दोपहर बाद चिलचिलाती धूप की परवाह किए बगैर बच्चे-महिलाएं तक वरुणा बचाओ संघर्ष में कूद पड़े। इस दौरान जुलूस निकाल कर जमकर नारेबाजी की गई। प्रदर्शनकारी वरुणा में गिरने वाले नालों को तत्काल बंद करने की जिला प्रशासन से मांग कर रहे थे।
अमर उजाला में वरुणा के सूखने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद तटीय बस्ती के लोगों का धैर्य जवाब दे गया। जहां-तहां स्वस्फूर्त चेतना जागृत होने लगी। शनिवार की दोपहर बाद सराय मोहना में बड़ी तादाद में लोग वरुणा की रक्षा के लिए उठ खड़े हो गए। बस्ती के लोगों के साथ मानवाधिकार जन निगरानी समिति के कार्यकर्ता भी आ गए। बस्ती में लामबंद लोग शासन-प्रशासन के विरोध में नारेबाजी करने लगे। बस्ती से जुलूस निकला। इसमें महिलाओं ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। जुलूस गांव से होकर गंगा-वरुणा संगम स्थल पर पहुंचा। यहां मावाधिकार जन निगरानी समिति के आनंद कुमार निषाद, नीता साहनी, डॉ. राजेश सिंह का कहना था कि पछुआ हवा बहने पर घरों में भी चैन से रहना दुश्वार हो गया है। सड़े नाले की बदबू गंगा किनारे से लेकर पूरी बस्ती में फैल जा रही है। करीब आठ हजार की आबादी वाली सराय मोहाना बस्ती के लोगों का दर्द था कि वह गंगा में स्नान तक नहीं कर पा रहे हैं। नाले का अवजल संगम से होकर नदी में फैल जा रहा है। स्नान करने वालों के शरीर पर चकत्ते पड़ने और खुजली की शिकायत होने से हर किसी के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। ऐसे में जितना जल्दी हो सके नालों का गिरना रोका जाना चाहिए। प्रदर्शन करने वालों में मोहन लाल निषाद, बलराम प्रसाद, नीता साहनी, रामजी, राजकुमार, चिंता देवी, बगेसरा देवी, केशव प्रसाद समेत तमाम लोग शामिल थे।

इनसेट
वरुणा के मुद्दे पर कल डीएम से मिलेंगे
वाराणसी। वरुणा नदी को साफ-सुथरा बनाने के लिए नागरिकों ने कमर कस ली है। सोमवार को इलाके के लोगों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मिलेगा। यह जानकारी मानवाधिकार जन निगरानी समिति के आनंद कुमार निषाद ने दी।

- अंतरगृही यात्रा तीर्थ का सबसे बड़ा पड़ाव है सराय मोहना
-अंतिम छोर से उठी नदी की रक्षा की आवाज बेसिन में फैली तो बड़ा आंदोलन तय

रणनीति
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- गांव-गांव में जन जागरूकता टोलियों का गठन करना
- वरुणा बचाओ संघर्ष से हर घर से एक सदस्य को जोड़ने की तैयारी
- नदी घाटी को पुनर्जीवन प्रदान करने के लिए नागरिक खुद आगे आएं

रामेश्वर में सूखी वरुणा की गोद में मिले मूर्ति भंडार
रामेश्वर। वरुणा नदी पर बने नए पुल के ठीक नीचे प्राचीन मूर्तियों का भंडार देखा गया है। ये मूर्तियां किस काल की और किस शैली की हैं यह जांच का विषय है। लेकिन पंचक्रोशी यात्रा के सर्वाधिक महत्वपूर्ण पड़ाव रामेश्वर में देवी-देवताओं की मूर्तियां नदी में किन परिस्थियों में फेंकी गईं, इसे लेकर अनेक सवाल खड़े हो गए हैं। नदी सूखने के बाद मूर्तियों का भंडार तलहटी में नजर आने पर बस्तियों से तमाशबीन वहां नजारा लेने भी पहुंच रहे हैं। लोगों के मन में यह जानने की उत्सुकता है कि आखिर वह मूर्तियां तस्करी की हैं या किसी और बहाने उन्हें वहां छोड़ा गया है। वहां दिखने वाली तमाम मूर्तियां खंडित हैं लेकिन उनकी ऐतिहासिकता को नजर अंदाज नहीं किया जा सकता।

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