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काशी में जगन्नाथ से पहले गंगा की रथयात्रा
Varanasi
Updated Fri, 08 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। काशी में भगवान जगन्नाथ की विख्यात रथयात्रा से पांच दिन पहले गंगा की अविरलता-निर्मलता के लिए रथयात्रा निकलेगी। इस रथयात्रा का मेला दिल्ली के जंतर मंतर पर 18 जून को लगेगा। अविरल गंगा रथ पर सवार होकर दिल्ली कूच में भोले की नगरी काशी से सौ तपस्वी हिस्सा लेंगे। इसमें वही लोग शामिल होंगे जो गंगा मुक्ति के लिए अबतक अन्न जल त्यागने की अरजी लगा चुके हैं।
गंगा सेवा अभियानम की ओर से तपस्वियों की यह सेना लाव-लश्कर के साथ निकलेगी। ध्वजा-पताका के साथ 14 जून को कूच करने वाले ‘अविरल गंगा रथ’ के साथ 250 वाहनों का काफिला भी शामिल होगा। रथ के स्वरूप और उसके रूट के बारे में गुरुवार की शाम अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विद्यामठ में पत्रकारों को जानकारी दी। इसका नेतृत्व ज्योतिष, द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की शिष्या डा. लक्ष्मीमणि शास्त्री करेंगी। 17 जून को दिल्ली में प्रवेश करने वाली रथयात्रा की व्यापक तैयारी की गई है। यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले शहरों में जहां प्रबंध देखने के लिए संयोजकों की तैनाती की गई है, वहीं रास्ते भर सभाओं के जरिए जनजागरण भी किया जाएगा। रथ के आगे करीब पांच सौ फुट लंबा गंगा मैप आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा। गंगा की तसवीरों से सुसज्जित रथ से यात्रा के हर पड़ाव पर गंगा साहित्य बांटे जाएंगे। राष्ट्रीय नदी गंगा गान की प्रतियां भी बांटी जाएंगी। रथयात्रा के संयोजक मंडल में ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, आचार्य वागीश दत्त मिश्र, रमेश उपाध्याय, रमेश चोपड़ा, विनोद कुमार निषाद उर्फ गुरु, अतहर जमाल लारी, तपस्वी नागनाथ, डॉ हरेंद्र राय, डॉ जीसी तिवारी, सेराज सिद्धिकी, गंगारविंद्र, विनोद शुक्ल के नाम शामिल हैं।
यात्रा के पड़ाव
14 जून की रात इलाहाबाद
15 जून को कानपुर पहुंचेगी रथयात्रा
16 जून की रात आगरा में गुजरेगी रात
17 जून को मथुरा में सभा के बाद रथ पहुंचेगा दिल्ली
यात्रा पथ: काशी से गोपीगंज, इलाहाबाद, खागा, फतेहपुर, कानपुर, अकबरपुर, औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, पलवल, फरीदाबाद, दिल्ली.
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गंगा सेवा अभियानम की ओर से तपस्वियों की यह सेना लाव-लश्कर के साथ निकलेगी। ध्वजा-पताका के साथ 14 जून को कूच करने वाले ‘अविरल गंगा रथ’ के साथ 250 वाहनों का काफिला भी शामिल होगा। रथ के स्वरूप और उसके रूट के बारे में गुरुवार की शाम अभियानम के सार्वभौम संयोजक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने विद्यामठ में पत्रकारों को जानकारी दी। इसका नेतृत्व ज्योतिष, द्वारका-शारदा पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की शिष्या डा. लक्ष्मीमणि शास्त्री करेंगी। 17 जून को दिल्ली में प्रवेश करने वाली रथयात्रा की व्यापक तैयारी की गई है। यात्रा मार्ग पर पड़ने वाले शहरों में जहां प्रबंध देखने के लिए संयोजकों की तैनाती की गई है, वहीं रास्ते भर सभाओं के जरिए जनजागरण भी किया जाएगा। रथ के आगे करीब पांच सौ फुट लंबा गंगा मैप आकर्षण का मुख्य केंद्र होगा। गंगा की तसवीरों से सुसज्जित रथ से यात्रा के हर पड़ाव पर गंगा साहित्य बांटे जाएंगे। राष्ट्रीय नदी गंगा गान की प्रतियां भी बांटी जाएंगी। रथयात्रा के संयोजक मंडल में ब्रह्मचारी ज्योतिर्मयानंद, आचार्य वागीश दत्त मिश्र, रमेश उपाध्याय, रमेश चोपड़ा, विनोद कुमार निषाद उर्फ गुरु, अतहर जमाल लारी, तपस्वी नागनाथ, डॉ हरेंद्र राय, डॉ जीसी तिवारी, सेराज सिद्धिकी, गंगारविंद्र, विनोद शुक्ल के नाम शामिल हैं।
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यात्रा के पड़ाव
14 जून की रात इलाहाबाद
15 जून को कानपुर पहुंचेगी रथयात्रा
16 जून की रात आगरा में गुजरेगी रात
17 जून को मथुरा में सभा के बाद रथ पहुंचेगा दिल्ली
यात्रा पथ: काशी से गोपीगंज, इलाहाबाद, खागा, फतेहपुर, कानपुर, अकबरपुर, औरैया, इटावा, फिरोजाबाद, आगरा, मथुरा, पलवल, फरीदाबाद, दिल्ली.