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लेखपालों को देने लगे एसडीएम के बराबर वेतन

Varanasi Updated Wed, 06 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सूबे के राजस्व विभाग में एक लाख से ज्यादा ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं। बनारस मंडल में ऐसी 12 हजार आपत्तियां हैं जिनकी वजह से 35 करोड़ से अधिक का हिसाब-किताब नहीं मिल रहा है। चंदौली में वेतन के मद में 85 लाख ज्यादा भुगतान किया गया है। बनारस में एक लेखपाल को पांच लाख 40 हजार अतिरिक्त भुगतान का मामला सामने आया है। यहां 64 आपत्तियों में लगभग नौ लाख की अनियमितता पाई गई है। जौनपुर में राजकीय वाहन की पर्ची में हेरफेर करके 56 लाख रुपये के गोलमाल पर एक कर्मचारी को निलंबित करने की संस्तुति की गई है।
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मंडलीय सभागार में राजस्व परिषद के सदस्य केके सिन्हा ने मंडल भर की ऑडिट आपत्तियों की समीक्षा की। उन्होंने बताया कि सूबे में एक लाख से ज्यादा ऑडिट आपत्तियां हैं। बनारस में 35 करोड़ के करीब की 12 हजार आपत्तियां की गई हैं। उनमें से पांच हजार आपत्तियां तो पांच से साल पुरानी हैं। तब से लगातार जवाब मांगा जा रहा है लेकिन निराकरण में शिथिलता बरती जा रही है। कुछ ऐसी भी आपत्तियां हैं, जिनमें वसूलयावी प्रमाणपत्र जारी होने के बाद संबंधित विभाग ने भुगतान ले लिया। उसने वसूली का 10 फीसदी शुल्क विभाग में नहीं जमा कराया। इस तरह की दो करोड़ से ज्यादा की रकम बट्टे खाते में जाने का अनुमान है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई है जो हर महीने बैठक में आपत्तियों की समीक्षा करेगी। साल में एक बार मंडलायुक्तों को जिलाधिकारी कार्यालयों का निरीक्षण करना चाहिए लेकिन यह काम पिछले छह-साल से नहीं हो रहा है।

उन्होंने बताया कि छठवें आयोग के वेतन निर्धारण और एसीपी में काफी गड़बडि़यां हुई हैं। चंदौली में वेतन अधिक निर्धारित करने के कारण 85 लाख से ज्यादा गलत भुगतान हो गया है। सर्वाधिक गड़बड़ी लेखपालों और अमीनों के वेतन निर्धारण में हुआ है। कई जगहों पर उनको 2800 की जगह 4200 रुपये का ग्रेड पे दे दिया गया है। कहीं-कहीं एसीपी लगाकर उसे 5600 कर दिया गया है जो कि एसडीएम का पेग्रेड है। जीपीएफ से रकम निकाली जा रही है लेकिन उसकी इंट्री नहीं हो रही है। उन्होंने वेतन निर्धारण की जांच मुख्य कोषाधिकारी कराने का निर्देश दिया। बैठक में मंडलायुक्त चंचल तिवारी, जिलाधिकारी समीर वर्मा के अलावा गाजीपुर, चंदौली, जौनपुर के अधिकारी मौजूद रहे।

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