‘बदमाश भाग जाता तो वर्दी दागदार हो जाती’

Varanasi Updated Fri, 01 Jun 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। सिपाही मनोज वर्मा की बहादुरी पर पिता, चाचा-चाची ही नहीं पूरा पुलिस महकमा गौरवान्वित है। आखिर उसने गोली लगने के बाद भी बदमाश को दबोच लिया। निहत्थे सिपाही का असलहे से लैस बदमाश से भिड़ जाना यह दर्शाता है कि उसके लिए वर्दी का कितना महत्व था। अस्पताल में उसका यही कहना था कि मुझे गोली लगी थी, लेकिन इससे ज्यादा फिक्र बदमाश के भागने की थी। यदि वह भाग जाता तो वर्दी पर दाग लग जाता। लोग कहते पुलिस को मारकर भाग गया। अस्पताल में मनोज को यह चिंता भी सता रही है कि दूसरा बदमाश भाग निकला। काश! वह उसे भी पकड़ पाता।
इलाहाबाद के सरायममरेज बाबूपुर बेला के रहने वाले दयाशंकर वर्मा के पुत्र मनोज वर्मा को हार रास नहीं आती। इंटर की परीक्षा पास करने के बाद उसने पुलिस में भर्ती का मन बना लिया था। कानपुर यूनिवर्सिटी से स्नातक की परीक्षा पास करने के बाद 2011 में उसकी भर्ती हो गई। जिले में तैनाती के बाद उसने मुस्तैदी से अपनी ड्यूटी निभानी शुरू कर दी। बुधवार को जब वह अपने साथी सिपाही के साथ बड़ागांव के शिवदासपुर स्थित मौला बीर बाबा की मजार के समीप टेंपो से गुजर रहा था तो वहां मौजूद दो बदमाश ट्रक चालक को लूट चुके थे। उसने मौके पर टेंपो रुकवाया। पुलिस को देखते ही दोनों बदमाश भागने लगे। इस बीच उसने एक बदमाश को धर दबोचा। उसने शराब पी रखी थी। पुलिस के चंगुल से मुक्त होने के लिए उसने काफी हाथ-पैर मारे, लेकिन सफल न हो सका। ऐसे में उसने तमंचे से सिपाही मनोज की जांघ पर फायर कर दिया। गोली लगने के बाद उसे असह्य पीड़ा हो रही थी, लेकिन मनोज को फिक्र बदमाश के भागने की थी। गोली लगने के बाद उसके साथी राजीव ने भी बदमाश को जकड़ लिया। इधर, सूचना मिलने पर थानाध्यक्ष मौके पर पहुंच गए। घटना के बाद पुलिस अधिकारियों की शाबासी से उसकी छाती चौड़ी हो गई। सुबह सूचना मिलने पर पिता दयाशंकर वर्मा, मां मीरा देवी, चाचा और चाची मलदहिया स्थित निजी चिकित्सालय पहुंचे। बेटे की बहादुरी पर पिता जहां खुद पर फख्र कर रहे थे वहीं मां बेटे का घाव देखकर भाव विह्वल हो गई थी। चिकित्सालय में भर्ती मनोज की हालत अब भी गंभीर है। हालांकि आपरेशन कर उसके पैर से गोली निकाल ली गई है।

दूसरी स्टोरी

एटीएम लुटेरे का साथी निकला बदमाश
-पूछताछ में लूट और हत्या के कई राज उगले
-पुलिस रिमांड पर लेगी, फरार बदमाश की तलाश
सेवापुरी। सुबह जब दारू उतरी और पुलिस ने सख्ती की तो बदमाश ने खुद को बड़ागांव के कृष्णापुर कला का जितेंद्र गिरी बताया। उसने मौके से फरार साथी को बड़ागांव का ही दिनेश गिरी बताया। साथ ही यह भी जानकारी दी कि दोनों मिलकर इलाके में लूट की वारदात को अंजाम देते हैं, जबकि बुधवार की रात पूछताछ में वह पुलिस को बार-बार छका रहा था। गिरफ्तार बदमाश एटीएम लूटकांड के इनामी वीर बहादुर सिंह बबलू का साथी है। पुलिस ने उसे जेल भेज दिया है।
जितेंद्र को बड़ागांव के शिवदासपुर स्थित मौला बीर बाबा की मजार के समीप बुधवार की रात ट्रक चालक को लूटने के बाद सिपाही मनोज वर्मा ने दबोच लिया था। नशे में धुत बदमाश रात में एसएसपी और डीआईजी के सामने अपने बारे में सही जानकारी नहीं दे रहा था। ऐसे में पुलिस ने नशा उतरने का इंतजार किया। सुबह जब नशा टूटा और सख्ती बरती गई तो उसने सब कुछ उगल दिया। उसने बताया कि वह बड़ागांव के कृष्णापुर कला गांव का रहने वाला है। मौके से फरार उसका फरार साथी दिनेश गिरी है। दोनों एटीएम लूटकांड के प्रमुख अभियुक्त और दस हजार के इनामी बीर बहादुर सिंह उर्फ बब्बू के साथी हैं। पुलिस के मुताबिक जितेंद्र गिरी रोहनिया में चालक की हत्या कर लूट समेत देहात की कई अन्य लूट की घटनाओं में शामिल रहा है। थानाध्यक्ष हरिश्चंद्र सरोज की माने तो उसे रिमंाड लेने के लिए कल अदालत में प्रार्थनापत्र दिया जाएगा। पुलिस फरार उसके साथी की भी तलाश कर रही है।

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