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धनबल के प्रभाव में गंगा पर स्टैंड नहीं ले पा रहीं पार्टियां : गोविंदाचार्य

Varanasi Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। अतीत में भाजपा का थिंक टैंक रह चुके केएन गोविंदाचार्य गंगा के लिए वाराणसी में चल रहे संतों के आंदोलन को गति देने में पूरी तन्मयता से जुटे हुए हैं। दिल्ली रवाना होने से पहले गुरुवार दोपहर अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत की। कहा कि सभी दल में अच्छे लोग हैं। पर कोई भी दल गंगा के नैसर्गिक प्रवाह के पक्ष में स्टैंड लेने की स्थिति में नहीं है। इसका कारण है धनबल का प्रभाव। पिछले 10 वर्षों में इस मुद्दे पर उन्हें जो अनुभूति हुई, उसका यही सार है।
गंगा आंदोलन पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि पीएमओ को तो जैसे सांप सूंघ गया है। 17 अप्रैल को महत्वपूर्ण लोगों की मौजूदगी में प्रधानमंत्री ने स्वामी सानंद से बातचीत कर निर्णय लेने की बात कही थी। लेकिन, बीस दिन बाद भी पीएम को बात करने का समय नहीं मिला। यह एकदम गैरजिम्मेदाराना और संवेदनहीन रुख है। प्रधानमंत्री अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। कहा कि अपनी बात पर कायम न रहने वाले प्रधानमंत्री या सरकार के रहने का क्या मतलब है? उन्होंने कहा कि कई दलों में गंगा के मुद्दे पर संवेदना रखने वाले नेता हैं। वे उनसे लगातार संपर्क में भी हैं। इनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, अजीत जोगी, जयराम रमेश, नारायण सामी और मार्गरेट अल्वा के अलावा भाजपा की सुषमा स्वराज, उमा भारती शामिल हैं। भाजपा के लोगों के इस मुद्दे पर कम संख्या में जुड़ाव पर कहा कि उनसे उम्मीद भी नहीं की थी। हालांकि, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने 2008 में उत्तराखंड में मुख्यमंत्री से नदियों की अविरलता को प्रभावित करने वाली परियोजना वापस कराने में अहम भूमिका निभाई थी। वाराणसी में चल रहे गंगा आंदोलन पर यहां के सांसद के रुख से वे विस्मित हैं। कहा, भाजपा में लगातार सक्रिय डा. मुरली मनोहर जोशी क्या बदल गए हैं? काशी में गंगा के लिए आंदोलन हो रहा है और वे यहीं से सांसद हैं। ऐसे में वे आंदोलन का नेतृत्व क्यों नहीं कर रहे? यह इतना महत्वपूर्ण विषय है कि वे एक झटके में अखिल भारतीय स्तर पर स्वीकार्य नेता बन जाएंगे।



गंगा के लिए गोविंदाचार्य की छह मांगें
-गंगा नदी के मुख्य प्रवाह में इसका अपना 70 फीसदी जल रहे
-गंगा की जमीन राजस्व रिकार्ड में निबंधित हो
-गंगा समेत सभी नदियों को प्रकृति का चैतन्य अंश मानकर इनके प्रबंधन को भारतीय नजरिये से विचार हो
-गंगा के संदर्भ मेें आस्था पक्ष की प्रथम वरीयता हो और इससे मिलने वाले लाभ दूसरी वरीयता में हों
-प्रयाग में होने वाले कुंभ मेले में पूरे तीन माह रोजाना 250 क्यूमेक्स जल प्रवाह सुनिश्चित हो
-केंद्र और प्रदेश सरकारें सुनिश्चित करें कि गंगा किनारे के शहरों का औद्योगिक कचरा-अवजल नदी में ना गिरे

13 को फिर वाराणसी में होंगे गोविंदाचार्य
वाराणसी। महामना पं. मदन मोहन मालवीय ने अविरल गंगा की मांग पर जिस गंगा महासभा के बैनर तले आंदोलन किया था, उसी संगठन की एक अहम बैठक 13 मई को वाराणसी में हो रही है। फिर 21 मई को गंगा सेवा अभियानम द्वारा आहूत संतों का सम्मेलन होगा। दोनों ही अवसरों पर सुरभि शोध संस्थान के संरक्षक केएन गोविंदाचार्य भी मौजूद रहेंगे।

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