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बंदी रक्षकों की भर्ती में खेल
Varanasi
Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
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वाराणसी। प्रदेश में सपा सरकार बनने से ऐन पहले चार जेलों में मानकों और प्रक्रिया को ताक पर रख कर बड़े पैमाने पर बंदी रक्षकों की नियुक्ति की गई। इसमें बड़े खेल की आशंका जताई जा रही है। आईजी जेल ने चारों जेल अधीक्षकों से नियुक्तियों का ब्योरा मांगा है। कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह ‘राजा भैया’ ने भी कहा है कि जेल अधीक्षकों का जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
बता दें, पिछली बसपा सरकार ने प्रदेश भर के केंद्रीय कारागारों में बंदी रक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव आ गए। तब इस आशंका में कि यदि बसपा सत्ता में नहीं आई तो नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लग सकती है, गोरखपुर, नैनी, बरेली और आगरा जेल में आनन-फानन में चार सौ बंदी रक्षक नियुक्त कर दिए गए। जल्दबाजी में मानक और प्रक्रिया तक को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि ज्वाइनिंग से पहले अभ्यर्थियों का पुलिस वेरीफिकेशन तक नहीं कराया गया।
इसके बाद सपा ने सत्ता की बागडोर संभालते ही विगत 15 मार्च को भर्तियों पर रोक लगा दी। 16 मार्च को वाराणसी सेंट्रल जेल में करीब तीन हजार अभ्यर्थियों का साक्षात्कार शुरू होना था। इसी तरह फतेहगढ़ में 24 मार्च और सहारनपुर में भी इंटरव्यू होना था, लेकिन इन सभी जेलों में भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी गई। चार जेलों में जो भर्तियां हुई हैं, अब उन पर जांच की तलवार लटक रही है। आईजी जेल आरपी सिंह ने चारों जेल अधीक्षकों से जवाब तलब किया है कि आखिर भर्ती में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। साथ ही इसकी जानकारी शासन को भी दी है। प्रदेश के कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का कहना है कि चारों जेल अधीक्षकों से भर्तियों का ब्योरा मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जल्द ही बंदी रक्षकों की दोबारा भर्ती शुरू की जाएगी।
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बता दें, पिछली बसपा सरकार ने प्रदेश भर के केंद्रीय कारागारों में बंदी रक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी। इसी बीच विधानसभा चुनाव आ गए। तब इस आशंका में कि यदि बसपा सत्ता में नहीं आई तो नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लग सकती है, गोरखपुर, नैनी, बरेली और आगरा जेल में आनन-फानन में चार सौ बंदी रक्षक नियुक्त कर दिए गए। जल्दबाजी में मानक और प्रक्रिया तक को नजरअंदाज कर दिया गया। यहां तक कि ज्वाइनिंग से पहले अभ्यर्थियों का पुलिस वेरीफिकेशन तक नहीं कराया गया।
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इसके बाद सपा ने सत्ता की बागडोर संभालते ही विगत 15 मार्च को भर्तियों पर रोक लगा दी। 16 मार्च को वाराणसी सेंट्रल जेल में करीब तीन हजार अभ्यर्थियों का साक्षात्कार शुरू होना था। इसी तरह फतेहगढ़ में 24 मार्च और सहारनपुर में भी इंटरव्यू होना था, लेकिन इन सभी जेलों में भर्ती प्रक्रिया बंद कर दी गई। चार जेलों में जो भर्तियां हुई हैं, अब उन पर जांच की तलवार लटक रही है। आईजी जेल आरपी सिंह ने चारों जेल अधीक्षकों से जवाब तलब किया है कि आखिर भर्ती में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई। साथ ही इसकी जानकारी शासन को भी दी है। प्रदेश के कारागार मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का कहना है कि चारों जेल अधीक्षकों से भर्तियों का ब्योरा मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार जल्द ही बंदी रक्षकों की दोबारा भर्ती शुरू की जाएगी।
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