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सौर ऊर्जा से उद्योगों को बचाएगी सरकार
Varanasi
Updated Wed, 03 Sep 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती से दम तोड़ते उद्योगाें को बचाने के लिए केंद्र सरकार सौर ऊर्जा को बढ़ावा देगी। इसके लिए उद्यमियों को सब्सिडी के तहत सौर ऊर्जा पैनल उपलब्ध कराए जाएंगे। इस संबंध में जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर ऊर्जा मंत्रालय को भेजा जाएगा। ये बातें मंगलवार को रवींद्रपुरी में प्रधानमंत्री के जनसंपर्क कार्यालय पहुंचे केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने पत्रकारों से बातचीत में कहीं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उद्योगों की स्थापना और उन्हें सुविधाएं देने का काम राज्य सरकार का होता है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश की सरकार पूरी तरह विफल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बारे में कहा कि उन्होंने न जापान में भारत की अमिट छाप छोड़ी है। क्योटो और वाराणसी में काफी समानता है। उसी के अनुरूप यहां का विकास होगा। लव जेहाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि आपस में आक्रोश और विद्वेष नहीं होना चाहिए। दोनों समुदाय के लोगों को बैठकर मामला हल करना चाहिए। रोहनिया उपचुनाव के बारे मेें कहा कि यहां अपना दल नहीं, एनडीए लड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में स्थानीय नेताओं से गुफ्तगू भी की। इस दौरान कार्यालय प्रभारी शिवशरण पाठक, प्रो. कौशल किशोर मिश्र, अशोक पांडेय, रामप्रकाश दूबे, अशोक सिंह, जयप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद वे प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री हरिश्चंद्र श्रीवास्तव का हाल जानने उनके घर महमूरगंज पहुंचे। दूसरी ओर, दशाश्वमेध में केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से उनका अभिनंदन किया गया।
कलराज ने किया विद्वानों का सम्मान
वाराणसी (ब्यूरो)। केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने काशी की पांडित्य परंपरा को सराहा। कहा कि देश-दुनिया में शास्त्रोक्त विवादों का निबटारा सिर्फ काशी के विद्वानों के मत से होता है। कला-संस्कृति के इस केंद्र से देव भाषा संस्कृत के उत्थान की शुरुआत होगी। ये बातें उन्होंने मंगलवार को दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में कहीं।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संस्कृत को सर्वाधिक महत्व देते हुए इसके उत्थान में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। कहा कि मुझे मंत्री नहीं अपने परिवार का सदस्य समझें। इससे पहले उन्होंने 25 से अधिक विद्वानों को सम्मानित किया। यहां उन्हें गीता भेंट की गई। इस मौके पर महापौर रामगोपाल मोहले, प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रो. सुभाष चंद्र तिवारी, महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर ओझा, डॉ. श्रीकांत मिश्र, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, शंकर गिरि व प्रो. कौशल किशोर मिश्र आदि मौजूद थे। संचालन पवन शास्त्री ने किया।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उद्योगों की स्थापना और उन्हें सुविधाएं देने का काम राज्य सरकार का होता है। इस दिशा में उत्तर प्रदेश की सरकार पूरी तरह विफल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के बारे में कहा कि उन्होंने न जापान में भारत की अमिट छाप छोड़ी है। क्योटो और वाराणसी में काफी समानता है। उसी के अनुरूप यहां का विकास होगा। लव जेहाद के सवाल पर उन्होंने कहा कि आपस में आक्रोश और विद्वेष नहीं होना चाहिए। दोनों समुदाय के लोगों को बैठकर मामला हल करना चाहिए। रोहनिया उपचुनाव के बारे मेें कहा कि यहां अपना दल नहीं, एनडीए लड़ रहा है। इस दौरान उन्होंने बंद कमरे में स्थानीय नेताओं से गुफ्तगू भी की। इस दौरान कार्यालय प्रभारी शिवशरण पाठक, प्रो. कौशल किशोर मिश्र, अशोक पांडेय, रामप्रकाश दूबे, अशोक सिंह, जयप्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे। इसके बाद वे प्रदेश के पूर्व वित्त मंत्री हरिश्चंद्र श्रीवास्तव का हाल जानने उनके घर महमूरगंज पहुंचे। दूसरी ओर, दशाश्वमेध में केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की ओर से उनका अभिनंदन किया गया।
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कलराज ने किया विद्वानों का सम्मान
वाराणसी (ब्यूरो)। केंद्रीय लघु उद्योग मंत्री कलराज मिश्र ने काशी की पांडित्य परंपरा को सराहा। कहा कि देश-दुनिया में शास्त्रोक्त विवादों का निबटारा सिर्फ काशी के विद्वानों के मत से होता है। कला-संस्कृति के इस केंद्र से देव भाषा संस्कृत के उत्थान की शुरुआत होगी। ये बातें उन्होंने मंगलवार को दशाश्वमेध स्थित शास्त्रार्थ महाविद्यालय में आयोजित सम्मान समारोह में कहीं।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संस्कृत को सर्वाधिक महत्व देते हुए इसके उत्थान में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। कहा कि मुझे मंत्री नहीं अपने परिवार का सदस्य समझें। इससे पहले उन्होंने 25 से अधिक विद्वानों को सम्मानित किया। यहां उन्हें गीता भेंट की गई। इस मौके पर महापौर रामगोपाल मोहले, प्रो. देवी प्रसाद द्विवेदी, प्रो. सुभाष चंद्र तिवारी, महावीर पंचांग के संपादक पं. रामेश्वर ओझा, डॉ. श्रीकांत मिश्र, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता अशोक पांडेय, शंकर गिरि व प्रो. कौशल किशोर मिश्र आदि मौजूद थे। संचालन पवन शास्त्री ने किया।