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कांग्रेस में भगदड़ से मचा हड़कंप
Varanasi
Updated Thu, 24 Apr 2014 05:30 AM IST
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वाराणसी। कांग्रेस छोड़ एक-एक कर कई नेताओं के जाने से पार्टी में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं, कुछ और नेताओं के पार्टी छोड़ने की चर्चाओं का बाजार गरम है। इससे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। इस भगदड़ से लोकसभा चुनाव में होने वाले नुकसान को रोकने के लिए पार्टी ने प्रचार की रणनीति में बदलाव कर दिया है। चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाने पर जोर दिया जा रहा है।
वरिष्ठ नेता डा. दया शंकर मिश्र दयालू के कांग्रेस छोड़ने के बाद यह सिलसिला नहीं रुक रहा। अभी दयालू के अलावा डा. अशोक सिंह और धर्मेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा ही था कि 2002 में पार्टी के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ चुके डा. अवधेश सिंह ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया। चुनाव के समय पैदा हुए ऐसे हालातों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। इन नेताओं के जाने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं को प्रचार अभियान में उतार दिया गया है। साथ ही लोकसभा चुनाव के प्रचार की रणनीति बदल दी है। वरिष्ठ नेताओं को विकास कार्यों के गुजरात मॉडल को खारिज कर स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए कहा गया है।
प्रदेश महासचिव सतीश चौबे, अनिल श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं करा कर स्थानीय मुद्दों से विपक्षियों को घेरने के लिए कहा गया है। प्रदेश महासचिव डा. सतीश राय व सतीश चौबे को प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए आक्रामक प्रचार का जिम्मा दिया गया है। इन वरिष्ठ नेताओं को उन लोगों से संपर्क साधकर पार्टी से जोड़े रखने की कोशिश करने के लिए भी कहा गया है, जिनके भविष्य में कांग्रेस छोड़ने की चर्चाएं हैं। नुक्कड़ सभाओं में पेयजल, सीवर, ड्रेनेज के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई धनराशि के दुरुपयोग का मुद्दा बनाकर सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी की आड़ में भाजपा को घेरने के लिए कहा गया है।
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वरिष्ठ नेता डा. दया शंकर मिश्र दयालू के कांग्रेस छोड़ने के बाद यह सिलसिला नहीं रुक रहा। अभी दयालू के अलावा डा. अशोक सिंह और धर्मेंद्र सिंह ने कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामा ही था कि 2002 में पार्टी के टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़ चुके डा. अवधेश सिंह ने भी कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया। चुनाव के समय पैदा हुए ऐसे हालातों से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बेचैनी बढ़ गई है। इन नेताओं के जाने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों के अलावा कुछ वरिष्ठ नेताओं को प्रचार अभियान में उतार दिया गया है। साथ ही लोकसभा चुनाव के प्रचार की रणनीति बदल दी है। वरिष्ठ नेताओं को विकास कार्यों के गुजरात मॉडल को खारिज कर स्थानीय मुद्दों को उठाने के लिए कहा गया है।
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प्रदेश महासचिव सतीश चौबे, अनिल श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष प्रजानाथ शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ नेताओं को जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं करा कर स्थानीय मुद्दों से विपक्षियों को घेरने के लिए कहा गया है। प्रदेश महासचिव डा. सतीश राय व सतीश चौबे को प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के जरिए आक्रामक प्रचार का जिम्मा दिया गया है। इन वरिष्ठ नेताओं को उन लोगों से संपर्क साधकर पार्टी से जोड़े रखने की कोशिश करने के लिए भी कहा गया है, जिनके भविष्य में कांग्रेस छोड़ने की चर्चाएं हैं। नुक्कड़ सभाओं में पेयजल, सीवर, ड्रेनेज के लिए केंद्र सरकार द्वारा दी गई धनराशि के दुरुपयोग का मुद्दा बनाकर सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी की आड़ में भाजपा को घेरने के लिए कहा गया है।
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